Tuesday 28/ 04/ 2026 

Bharat Najariya
सितारगंज में मानसिक गणना का महाकुंभ: 500+ प्रतिभागियों के बीच मुदित राठी बने “चैंपियन ऑफ चैंपियंस”।उत्तराखंड बोर्ड परीक्षा में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले जनपद के मेधावी विद्यार्थियों के साथ आज एक प्रेरणादायी संवाद कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में जिलाधिकारी नितिन सिंह भदौरिया ने अपने छात्र जीवन से लेकर सिविल सेवा तक के संघर्षपूर्ण और प्रेरक सफर को साझा करते हुए विद्यार्थियों को सफलता के सूत्र बताए। उन्होंने सभी विद्यार्थियों को उनके शानदार प्रदर्शन के लिए बधाई दी और उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। साथ ही उपस्थित अभिभावकों और शिक्षकों के योगदान की भी सराहना करते हुए उन्हें भी शुभकामनाएं दीं।रुद्रपुर। उत्तराखंड सरकार द्वारा भाजपा नेता नितिन चरण वाल्मीकि को उत्तराखंड सफाई कर्मचारी आयोग में सदस्य नामित किए जाने पर आज वाल्मीकि समाज के सैकड़ों लोग पूर्व विधायक राजेश शुक्ला के आवास पहुंचे, जहां उन्होंने फूल-मालाओं से उनका स्वागत किया तथा मिठाई खिलाकर प्रदेश के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी एवं पूर्व विधायक राजेश शुक्ला के प्रति आभार व्यक्त किया।इस अवसर पर वाल्मीकि समाज के सरपंच राकेश बाल्मीकि ने कहा कि पूर्व विधायक राजेश शुक्ला सदैव सर्व समाज के हित में कार्य करते हैं और हर वर्ग के लोगों से उनका सीधा जुड़ाव है। उन्होंने कहा कि आज उनके प्रयासों के चलते ही प्रदेश सरकार ने बाल्मीकि समाज के प्रतिनिधि के रूप में नितिन चरण वाल्मीकि को उत्तराखंड सफाई कर्मचारी आयोग में सदस्य नामित कर समाज को सम्मानित करने का कार्य किया है। इसके लिए समस्त समाज प्रदेश सरकार एवं पूर्व विधायक राजेश शुक्ला का हृदय से आभारी है।पूर्व विधायक राजेश शुक्ला ने प्रदेश के मुखिया पुष्कर सिंह धामी का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में उत्तराखंड सरकार समाज के हर वर्ग के उत्थान के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा लिए जा रहे ऐसे निर्णय सामाजिक समरसता को मजबूत करने के साथ ही वंचित वर्गों को मुख्यधारा में लाने का कार्य कर रहे हैं। भाजपा अनुसूचित मोर्चा पूर्व जिला महामंत्री नितिन चरण वाल्मीकि का आयोग में सदस्य के रूप में मनोनयन निश्चित रूप से समाज के लिए गर्व का विषय है और इससे समाज के लोगों की आवाज को मजबूती मिलेगी। उन्होंने विश्वास जताया कि मुख्यमंत्री धामी के नेतृत्व में प्रदेश सरकार आगे भी इसी तरह सभी वर्गों के हित में कार्य करती रहेगी।इस दौरान समाज के वरिष्ठ नेता कल्लू चरन, राकेश वाल्मीकि, श्याम बाबू, मैकिल, धीरज लाल, मुकेश कुमार, रमेश वाल्मीकि, ईशा चरन, छत्रपाल सिंह पप्पू लाल, राजेंद्र कुमार, जॉनी वाल्मीकि, अरुन वाल्मीकि, विवेक कुमार, अंकित कुमार, राजू वाल्मीकि, संजू वाल्मीकि, नरेश कुमार, शिवम कुमार, राजीव वाल्मीकि, संदीप धानुक, मोंटी वाल्मीकि, सौरभ कुमार, अक्षय रावत, जेकब सिंह समेत बड़ी संख्या में वाल्मीकि समाज के लोग एवं स्थानीय कार्यकर्ता उपस्थित थे।जिलाधिकारी नितिन सिंह भदौरिया की अध्यक्षता में जिला सभागार में जनपद में मातृ मृत्यु दर की स्थिति को लेकर महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक आयोजित हुई। बैठक में स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के साथ मातृ मृत्यु के कारणों और भविष्य में रोकथाम के उपायों पर विस्तृत चर्चा की गई।जिलाधिकारी ने स्वास्थ्य विभाग को कड़े निर्देश देते हुए कहा कि हाई-रिस्क प्रेगनेंसी वाले मामलों की पहचान कर उनकी विशेष निगरानी सुनिश्चित की जाए। उन्होने कहा कि आशा एवं एएनएम के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में गर्भवती महिलाओं के पंजीकरण एवं नियमित जांच में किसी प्रकार की ढिलाई न बरती जाए। प्रसव के दौरान रेफरल सिस्टम को और अधिक सुदृढ़ एवं प्रभावी बनाया जाए, ताकि आपातकालीन स्थिति में समय की बचत हो सके। उन्होने निर्देश देतु हुए कहा कि जनपद में पंजीकृत ऐसे चिकित्सालयों को चिन्हित किया जाए जहाँ पंजीकृत चिकित्सकों की निगरानी में प्रसव नहीं कराए जा रहे हैं ऐसे संस्थानों पर स्वास्थ्य विभाग द्वारा समय-समय पर आकस्मिक निरीक्षण किया जाए तथा अनियमितता पाये जाने पर कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। उन्होने सख्त निर्देश देते हुए कहा कि गृह प्रसव कराने वाली दाइयों की भी सतत निगरानी रखी जाए। यदि कोई दाई अवैध रूप से प्रसव कराती हुई पाई जाती है, तो उसके विरुद्ध एफआईआर दर्ज करायी जाए। उन्होने कहा कि गर्भवती महिलाओं को यदि आशा कार्यकत्री प्राइवेट चिकित्सालयों में ले जाते हुए पायी जाती है तो सम्बन्धित आशा वर्कर के खिलाफ कार्यवाही भी सुनिश्चित की जाये। उन्होने कहा कि मातृ मृत्यु दर को कम करना सरकार की सर्वाेच्च प्राथमिकताओं में है इस दिशा में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ0 केके अग्रवाल ने बताया कि जनपद में अब तक कुल 18 मातृ मृत्यु के मामले सामने आए थे। जिसमे से 11 मामलों की विस्तृत समीक्षा पहले ही की जा चुकी है जबकि आज 7 नए मामलों की समीक्षा पूर्ण की गई। मृत्यु के कारणों का विश्लेषण अधिकारियों ने प्रत्येक केस की रिपोर्ट का बारीकी से अध्ययन किया। इसमें प्रसव के दौरान होने वाली जटिलताओं, एनीमिया (खून की कमी), तथा समय पर अस्पताल न पहुँचने जैसे कारणों पर गंभीर चर्चा हुई।शहर की पहचान और आध्यात्मिक ऊर्जा का नया केंद्र बनेगा शिव कॉरिडोरः विकास शर्माप्रभारी मंत्री प्रदीप बत्रा का नगर निगम में जोरदार स्वागतमसूरी अस्पताल की बदहाल व्यवस्था पर उठा सवाल, स्वास्थ्य मंत्री को सौंपा ज्ञापनमसूरी, 27 अप्रैल देव भूमि जन कल्याण विकास एकता समिति के बैनर तले शहर में स्वास्थ्य सेवाओं की खराब स्थिति को लेकर आवाज बुलंद की गई। समिति के शहर अध्यक्ष तनमीत सिंह के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल ने उत्तराखंड सरकार के स्वास्थ्य मंत्री सुबोध उनियाल को उपजिलाधिकारी मसूरी के माध्यम से ज्ञापन सौंपकर तत्काल सुधार की मांग की।ज्ञापन में उप जिला चिकित्सालय की बदहाल स्थिति का विस्तार से उल्लेख किया गया। समिति ने आरोप लगाया कि अस्पताल में चिकित्सकों और कर्मचारियों की भारी कमी है, जिससे मरीजों को समय पर इलाज नहीं मिल पा रहा। इसके साथ ही आधुनिक चिकित्सा उपकरणों का अभाव, जरूरी दवाइयों की कमी, साफ-सफाई की खराब व्यवस्था और आपातकालीन सेवाओं की कमजोर स्थिति को भी गंभीर समस्या बताया गया। समिति का कहना है कि मसूरी जैसे प्रमुख पर्यटन स्थल पर हर साल हजारों पर्यटक पहुंचते हैं, ऐसे में स्वास्थ्य सेवाओं का मजबूत होना बेहद जरूरी है। वर्तमान हालात न केवल स्थानीय निवासियों बल्कि पर्यटकों के लिए भी परेशानी का कारण बन रहे हैं। ज्ञापन के माध्यम से समिति ने मांग की कि अस्पताल में डॉक्टरों और स्टाफ की तैनाती बढ़ाई जाए, आधुनिक उपकरण उपलब्ध कराए जाएं और स्वास्थ्य सेवाओं को दुरुस्त करने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि जल्द सुधार नहीं हुआ तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। इस दौरान समिति के केन्द्रीय अध्यक्ष प्रकाश राणा, उपाध्यक्ष गौरव गुप्ता, महासचिव गोविन्द प्रसाद नौटियाल, सहसचिव विजय जुगरान, कोषाध्यक्ष सलीम अहमद सहित विजय लक्ष्मी कोली, नफीस बानो, इमरान, राजेश, जितेंद्र और साजिद समेत दर्जनों कार्यकर्ता मौजूद रहे।श्रीनगर में गूंजा आस्था का विराट घोष-गौ सम्मान आह्वान बना जनचेतना का महाअभियानरुद्रपुर में महिला सम्मेलन, आरक्षण पर जताया आक्रोशहिमालय की जैव विविधता बेहद समृद्ध, मानवसभ्यता की खातिर संरक्षण अनिवार्यः प्रो. एसपी
राज्य

मसूरी के पास कैम्पटी क्षेत्र में अवैध निर्माण पर बड़ी कार्रवाई, दो भवन सील, स्थानीय लोगों में आक्रोशधनोल्टी/मसूरी 27 अप्रैल टिहरी जिला स्तरीय विकास प्राधिकरण द्वारा कैम्पटी क्षेत्र में अवैध निर्माण के खिलाफ सख्त कार्रवाई करते हुए दो भवनों को सील किए जाने से क्षेत्र में विवाद और आक्रोश की स्थिति बन गई है। प्राधिकरण की कार्रवाई जहां नियमों के अनुपालन के तहत बताई जा रही है, वहीं स्थानीय लोग इसे पक्षपातपूर्ण और भ्रष्टाचार से प्रेरित बता रहे हैं।प्राधिकरण कार्यालय, धनोल्टी से जारी आदेश के अनुसार, मसूरी-कैम्पटी फॉल मार्ग पर सड़क के बांयी ओर स्थित सचिन (ठेकेदार) और विनोद राणा के भवन पर बिना अनुमति निर्माण करने का आरोप था। उत्तराखंड नगर एवं ग्राम नियोजन एवं विकास अधिनियम 1973 (संशोधित 2013) की धारा 27(1) के तहत कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था और धारा 28(1) के अंतर्गत निर्माण कार्य रोकने के आदेश भी दिए गए थे। सुनवाई के बाद निर्माण को अवैध पाए जाने पर धारा 28ए के तहत भवन को सील करने का आदेश पारित किया गया।पूर्व में भी सीलिंग की कार्रवाई तय की गई थी, लेकिन पर्याप्त पुलिस बल और भीड़ के कारण इसे लागू नहीं किया जा सका। अब पुनः कार्रवाई करते हुए संबंधित भवन को सील कर दिया गया है।स्थानीय लोगों में भारी रोषकार्रवाई के बाद कैम्पटी और आसपास के क्षेत्रों में लोगों में भारी आक्रोश देखने को मिल रहा है। स्थानीय निवासियों के साथ प्रवेष राणा, विनोद राणा का आरोप है कि विभाग चुनिंदा लोगों को निशाना बनाकर उत्पीड़न कर रहा है, जबकि क्षेत्र में कई अन्य अवैध निर्माण बिना किसी रोक-टोक के खड़े हैं। लोगों का कहना है कि उन्होंने बड़ी मुश्किलों से अपनी जमीन पर निर्माण कर जीवन यापन का साधन बनाया है, लेकिन विभाग द्वारा उनके खिलाफ कठोर कार्रवाई की जा रही है।कुछ स्थानीय लोगों ने प्राधिकरण के सहायक अभियंता दिग्विजय तिवारी पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि क्षेत्र में बड़े स्तर पर भ्रष्टाचार के जरिए निर्माण कार्य कराए जा रहे हैं, लेकिन कार्रवाई केवल सीमित लोगों पर ही हो रही है। उन्होंने उच्च अधिकारियों से पूरे क्षेत्र का निष्पक्ष निरीक्षण कर सभी अवैध निर्माणों पर समान रूप से कार्रवाई करने की मांग की है। वही सहायक अभिंयता दिग्विजय तिवारी की जांच कर कार्यवाही की मांग की है।प्रशासन का पक्षवहीं, नीलू चावला (एसडीएम धनोल्टी) ने आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि विभाग द्वारा सभी कार्रवाई सरकार की गाइडलाइन और नियमों के तहत की जा रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जिन भवनों को सील किया गया है, उनकी विधिवत सुनवाई की गई थी और अवैध पाए जाने के बाद ही कार्रवाई की गई।एसडीएम कहा कि यदि संबंधित पक्ष द्वारा अवैध निर्माण को स्वयं नहीं हटाया गया, तो भविष्य में ध्वस्तीकरण (डिमोलिशन) की कार्रवाई भी की जा सकती है। उन्होंने बताया कि क्षेत्र में अन्य अवैध निर्माणों के खिलाफ भी केस दर्ज कर जांच और सुनवाई की प्रक्रिया जारी है और आने वाले समय में और भी बड़ी कार्रवाई देखने को मिल सकती है।राजनीतिक रंग भी आया सामनेमामले ने अब राजनीतिक रंग भी लेना शुरू कर दिया है। कुछ प्रभावित लोगों का कहना है कि वे सत्तारूढ़ दल से जुड़े हैं, इसके बावजूद उनके साथ इस प्रकार की कार्रवाई की जा रही है, जिसे वे अन्यायपूर्ण बता रहे हैं। वहीं प्रशासन ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि कार्रवाई पूरी तरह निष्पक्ष और नियमों के अनुरूप है।आगे क्या?कैम्पटी क्षेत्र में अवैध निर्माण को लेकर चल रही यह कार्रवाई अब बड़ा मुद्दा बनती जा रही है। एक ओर प्रशासन सख्ती के संकेत दे रहा है, वहीं दूसरी ओर स्थानीय लोगों का विरोध भी तेज होता दिख रहा है। आने वाले दिनों में इस मामले में और व्यापक कार्रवाई तथा विरोध की संभावना जताई जा रही है।

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