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मसूरी में रिस्पना नदी किनारे सड़क निर्माण से बढ़ा खतरा, ग्रामीणों ने जताई बाढ़ और भू-स्खलन की आशंकामलबा डंपिंग को लेकर उठे सवाल, पर्यावरण और गांवों की सुरक्षा पर चिंतापिछले वर्ष के क्लाउडबर्स्ट के बाद सहमे ग्रामीण, प्रशासन से कार्रवाई की मांग मसूरी क्षेत्र में रिस्पना नदी के किनारे चल रहे सड़क निर्माण कार्य को लेकर स्थानीय ग्रामीणों में चिंता बढ़ने लगी है। बार्लाेगंज से चामासारी गांव तक बनाई जा रही करीब चार किलोमीटर लंबी सड़क के निर्माण के दौरान निकाले जा रहे मलबे और मिट्टी के निस्तारण को लेकर ग्रामीणों ने गंभीर सवाल खड़े किए हैं। लोगों का आरोप है कि निर्माण कार्य से निकलने वाला मलबा नदी किनारे और पहाड़ी ढलानों पर डाला जा रहा है, जिससे भविष्य में बाढ़ और भू-स्खलन जैसी आपदाओं का खतरा बढ़ सकता है। जानकारी के अनुसार मसूरी नगर पालिका परिषद की ओर से लगभग 76 लाख रुपये की लागत से यह सड़क निर्माण कार्य कराया जा रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि सड़क निर्माण विकास के लिए जरूरी है, लेकिन यदि पर्यावरणीय मानकों और सुरक्षा उपायों का पालन नहीं किया गया तो इसका खामियाजा नीचे बसे गांवों को भुगतना पड़ सकता है।खेतवाला गांव निवासी सुरेंद्र पंवार ने आरोप लगाया कि सड़क निर्माण से निकलने वाला मलबा रिस्पना नदी के बेसिन में जमा हो रहा है, जिससे खेतवाला, चामासारी और मक्रेती गांवों में बाढ़ का खतरा लगातार बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि निर्माण एजेंसी की ओर से उचित डंपिंग जोन का पालन नहीं किया जा रहा और मलबे को पहाड़ियों के किनारे फेंका जा रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि पिछले वर्ष 16 सितंबर को क्षेत्र में आए क्लाउडबर्स्ट की त्रासदी अभी भी लोगों के जहन में ताजा है। उस घटना में कई घरों को नुकसान पहुंचा था और एक दंपती की मौत हो गई थी। ऐसे में लोग किसी भी प्रकार के पर्यावरणीय खतरे को लेकर अधिक संवेदनशील हो गए हैं।स्थानीय लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि सड़क निर्माण कार्य की पर्यावरणीय जांच कराई जाए और यह सुनिश्चित किया जाए कि मलबे का निस्तारण वैज्ञानिक तरीके से निर्धारित डंपिंग जोन में ही हो। ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते उचित कदम नहीं उठाए गए तो बरसात के दौरान नदी का बहाव प्रभावित हो सकता है और निचले इलाकों में तबाही की स्थिति पैदा हो सकती है। वहीं लोक निर्माण विभाग के अधिशासी अभियंता राजेश कुमार ने ग्रामीणों के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि निर्माण कार्य से निकलने वाले मलबे के लिए निर्धारित डंपिंग जोन चिन्हित किया गया है और उसी स्थान पर मलबा डाला जा रहा है। उन्होंने कहा कि विभाग पर्यावरणीय मानकों का पालन करते हुए कार्य कर रहा है। हालांकि ग्रामीणों का कहना है कि केवल कागजों में नियमों का पालन दिखाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि जमीनी स्तर पर निगरानी और पारदर्शिता जरूरी है। पर्यावरणविदों का भी मानना है कि पहाड़ी क्षेत्रों में सड़क निर्माण के दौरान मलबा प्रबंधन बेहद महत्वपूर्ण होता है, क्योंकि थोड़ी सी लापरवाही भी बड़े प्राकृतिक संकट को जन्म दे सकती है। बरसात का मौसम नजदीक आने के साथ ही क्षेत्र के लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि निर्माण कार्यों की नियमित मॉनिटरिंग की जाए और रिस्पना नदी क्षेत्र को किसी भी संभावित पर्यावरणीय खतरे से सुरक्षित रखने के लिए प्रभावी कदम उठाए जाएं।

