भागवत कथा बनी पर्यावरण संरक्षण का संकल्प-समलौण ने कटहल का पौधा रोपकर दिया प्रकृति बचाने का संदेश

पौड़ी/श्रीनगर गढ़वाल। धार्मिक आयोजनों को सामाजिक सरोकारों से जोड़ते हुए राठ क्षेत्र की प्रतिष्ठित सामाजिक संस्था समलौण ने एक बार फिर पर्यावरण संरक्षण का प्रेरणादायी संदेश दिया। जनपद पौड़ी गढ़वाल के विकासखंड पाबों की पट्टी बाली कंडारस्यूं स्थित ग्राम ओडली के अगस्तेश्वर संस्कृत विद्यालय में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के समापन अवसर पर विद्यालय परिसर में कटहल का समलौण पौधा रोपित कर प्रकृति संरक्षण का संकल्प दोहराया गया। पौधारोपण विद्यालय के संस्थापक कांति प्रसाद बहुगुणा तथा कथावाचक आचार्य अरविंद चमोली के करकमलों से संपन्न हुआ। पौधे के संरक्षण एवं संवर्धन की जिम्मेदारी विद्यालय के वरिष्ठ आचार्य पीताम्बर दत्त नौड़ियाल ने स्वीकार की। कार्यक्रम का संचालन संस्था के उपाध्यक्ष मुकेश नौड़ियाल ने किया। इस अवसर पर वक्ताओं ने कहा कि आज तेजी से बिगड़ता पर्यावरण मानव अस्तित्व के लिए गंभीर चुनौती बन चुका है। जलवायु परिवर्तन,बढ़ता प्रदूषण और घटते वन क्षेत्र भविष्य के लिए खतरे का संकेत हैं। इन समस्याओं का स्थायी समाधान केवल व्यापक वृक्षारोपण और उनके संरक्षण से ही संभव है। उन्होंने प्रत्येक व्यक्ति से अपने जीवन में कम से कम एक पौधा लगाकर उसकी देखभाल करने का आह्वान किया। समलौण आंदोलन के राज्य संयोजक मातबर सिंह बर्त्वाल ने बताया कि संस्था ने 16 जनवरी 2016 को इसी स्थान पर प्रथम राठ महोत्सव का आयोजन कर पर्यावरण संरक्षण और लोक संस्कृति के संरक्षण का अभियान शुरू किया था। तब रोपा गया देवदार का पौधा आज विशाल वृक्ष का रूप लेकर उस संकल्प का साक्षी बना हुआ है। उन्होंने कहा कि संस्था पिछले एक दशक से निरंतर ग्रामीण समाज को पर्यावरण संरक्षण और सांस्कृतिक विरासत के प्रति जागरूक करने का कार्य कर रही है। संस्था के अध्यक्ष मनोज रौथाण एवं सचिव नरेंद्र सिंह नेगी ने बताया कि संस्था प्रत्येक वर्ष 30 जुलाई को वृक्ष संरक्षण दिवस के रूप में मनाती है।इसी क्रम में इस वर्ष 30 जुलाई 2026 को गढ़वाल राइफल्स,लैंसडाउन परिसर में 500 बांज के समलौण पौधों का सघन वृक्षारोपण किया जाएगा,जिसके लिए तैयारियां प्रारंभ कर दी गई हैं। विद्यालय के संस्थापक कांति प्रसाद बहुगुणा ने संस्था के कार्यों की मुक्तकंठ से सराहना करते हुए कहा कि वर्तमान समय में वृक्षारोपण केवल सामाजिक दायित्व नहीं बल्कि आने वाली पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य का आधार है। उन्होंने संस्था के पर्यावरण संरक्षण अभियान को प्रोत्साहित करने के लिए 1100 रुपये की सम्मान राशि भी भेंट की। कार्यक्रम में संस्था के वरिष्ठ सदस्य आचार्य महावीर प्रसाद नौड़ियाल,विद्यालय प्रबंधन समिति के अध्यक्ष जगदीश प्रसाद बहुगुणा,सचिव शशि देवी बहुगुणा,कोषाध्यक्ष हरिश्चंद्र बहुगुणा,सुरेंद्र बहुगुणा,मनीष नौड़ियाल,अमरीश नौड़ियाल सहित अनेक ग्रामीण,आचार्य एवं गणमान्य लोग उपस्थित रहे। धार्मिक आस्था और पर्यावरण संरक्षण के इस अनूठे संगम ने उपस्थित लोगों को प्रकृति के प्रति अपने दायित्व का बोध कराया तथा समाज को हरित भविष्य की दिशा में आगे बढ़ने का प्रेरक संदेश दिया।
