Sunday 28/ 06/ 2026 

Bharat Najariya
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दिल्ली से उठी व्यवस्था परिवर्तन की हुंकार-राष्ट्रीय गौरव सम्मान से सम्मानित हुए 25 कर्मयोगी


नई दिल्ली/श्रीनगर गढ़वाल। देश की राजधानी स्थित कांस्टिट्यूशन क्लब शुक्रवार को किसान आंदोलनों,संत समाज और सामाजिक संगठनों के एक व्यापक राष्ट्रीय विमर्श का केंद्र बना। लोक आंदोलन न्यास,मातृ सदन हरिद्वार,अखिल भारतीय पंचायत परिषद तथा किसान मंच के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित राष्ट्रीय कार्यकर्ता बैठक एवं राष्ट्रीय गौरव सम्मान–2026 समारोह में देशभर से आए किसान नेताओं,संतों,पर्यावरणविदों,सामाजिक कार्यकर्ताओं और प्रबुद्ध नागरिकों ने भाग लिया। कार्यक्रम का मुख्य विषय कृषि,जल,जंगल, जमीन,मां गंगा और पर्यावरण संरक्षण रहा। इस अवसर पर विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय सामाजिक योगदान देने वाले देश के 25 कर्मयोगियों को राष्ट्रीय गौरव सम्मान से अलंकृत किया गया। पूरे कार्यक्रम के दौरान देश की कृषि नीति,पर्यावरण संरक्षण,लोकतांत्रिक अधिकारों और जन-सरोकारों से जुड़े मुद्दों पर गंभीर मंथन हुआ। लोक आंदोलन न्यास की राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष कल्पना इनामदार ने कहा कि देश अनेक सामाजिक और आर्थिक चुनौतियों से गुजर रहा है। उनका कहना था कि विभिन्न सामाजिक संगठनों और जनआंदोलनों को साझा मंच पर लाकर व्यापक जनजागरण खड़ा करने की दिशा में लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य की परिस्थितियों को देखते हुए समाज के सभी वर्गों को एकजुट होकर लोकतांत्रिक मूल्यों और जनहित के प्रश्नों पर आगे आने की आवश्यकता है। किसान मंच के राष्ट्रीय प्रवक्ता एवं उपाध्यक्ष भोपाल सिंह चौधरी ने गंगा और उसकी सहायक नदियों पर बनने वाली परियोजनाओं को लेकर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि अविरल और निर्मल गंगा देश की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक धरोहर है। उन्होंने गंगा संरक्षण को राष्ट्रीय प्राथमिकता बनाने की मांग उठाई। मातृ सदन के प्रमुख मठाधीश स्वामी शिवानंद सरस्वती महाराज ने अपने संबोधन में वर्तमान प्रशासनिक और राजनीतिक व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा कि समाज में व्याप्त अन्याय,भ्रष्टाचार और पर्यावरणीय संकट के समाधान के लिए व्यापक सामाजिक जागरण और जनसंगठनों की एकजुटता आवश्यक है। वरिष्ठ किसान नेता गुरनाम सिंह चढ़ूनी ने भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को लेकर अपनी आपत्तियां व्यक्त करते हुए इसे किसानों के हितों के प्रतिकूल बताया। उन्होंने घोषणा की कि इस विषय को लेकर आगामी 31 जुलाई को देशव्यापी आंदोलन का आह्वान किया जाएगा तथा इसकी रणनीति तय करने के लिए 1 जुलाई को चंडीगढ़ में राष्ट्रीय बैठक आयोजित होगी। किसान मंच के संरक्षक पीयूष जोशी ने अपने संबोधन में लोकतांत्रिक अधिकारों,जनआंदोलनों और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता से जुड़े मुद्दे उठाते हुए कहा कि सामाजिक संगठनों और किसान आंदोलनों को एकजुट होकर जनहित के प्रश्नों पर लोकतांत्रिक तरीके से संघर्ष करना चाहिए। स्वामी कमलानंद महाराज ने गाय,गंगा और गोबर आधारित ग्राम विकास मॉडल को ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने का प्रभावी माध्यम बताया। वहीं किसान नेता बी.एम.सिंह ने पर्यावरण संरक्षण और किसानों के अधिकारों से जुड़े मामलों में कानूनी लड़ाई को और मजबूत करने की आवश्यकता पर बल दिया। उत्तराखंड किसान मंच के प्रदेश अध्यक्ष कार्तिक उपाध्याय ने हिमालयी क्षेत्रों,राष्ट्रीय उद्यानों तथा गंगा में कथित अवैध खनन और पर्यावरणीय चुनौतियों का उल्लेख करते हुए कहा कि प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा के लिए व्यापक जनभागीदारी आवश्यक है। कार्यक्रम के दूसरे सत्र में देशभर से चयनित 25 समाजसेवियों,किसान नेताओं और जनआंदोलन से जुड़े कर्मयोगियों को राष्ट्रीय गौरव सम्मान-2026 से सम्मानित किया गया। सम्मान प्राप्त करने वालों में चौधरी शाह आलम सिद्दीकी,शब्दाब केसर,प्रदीप हुड्डा,एडवोकेट अनीस अहमद,सतपाल चौहान,पर्यावरणविद् संजय राणा सहित अनेक प्रमुख हस्तियां शामिल रहीं। सम्मान प्राप्त करने के उपरांत किसान मंच उत्तराखंड के प्रदेश उपाध्यक्ष कमल तिवारी ने सभी आयोजकों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह सम्मान उनके सामाजिक दायित्वों को और बढ़ाता है तथा वे भविष्य में भी जल,जंगल,जमीन और पर्यावरण संरक्षण के लिए निरंतर संघर्ष करते रहेंगे। कार्यक्रम में विमल बत्रा,तरुण उप्पल,धर्मपाल सिंह,नीलम राजकुमार,डॉ.राजकुमार साहू,हर्ष ठाकुर,नरेश आनंद, मुकेश,अजय कुमार,बबीता,गीता देवी,मंजू चौहान,अनुज शर्मा,श्रीकृष्ण राय,महेश गुप्ता,सत्यभान चौहान,दत्ता आवरी,संजय छाबड़ी,अलीम,जाकिर अंसारी,कैप्टन नरेश कुमार,धर्मवीर सिंह,डॉ.सतीश चंद्र,प्रकाश बंधु,मिथिलेश कुमार,संतोष सिंह,डॉ.उदय चंद,जय पंडित,चौधरी सदाब,ओमप्रकाश,शिवकांत,रीता कुमारी सहित देशभर से आए अनेक सामाजिक कार्यकर्ता,किसान प्रतिनिधि,संत एवं बुद्धिजीवी उपस्थित रहे। कार्यक्रम का समापन इस संकल्प के साथ हुआ कि कृषि,पर्यावरण,गंगा संरक्षण,लोकतांत्रिक अधिकारों और सामाजिक न्याय जैसे मुद्दों पर देशव्यापी जनजागरण को और अधिक सशक्त बनाया जाएगा।

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