श्रीनगर गढ़वाल। वीर चन्द्र सिंह गढ़वाली राजकीय मेडिकल कॉलेज श्रीनगर के मनोरोग विभाग की ओर से मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ बनाने के उद्देश्य से एक दिवसीय ऑनलाइन प्रशिक्षण कार्यशाला आयोजित की गई। हेमवती नंदन बहुगुणा बेस अस्पताल श्रीनगर से आयोजित इस कार्यशाला में जनपद रुद्रप्रयाग के चिकित्सा अधिकारियों एवं आशा फैसिलिटेटरों को मानसिक रोगों की प्रारंभिक पहचान,प्राथमिक स्तर पर उपचार,गंभीर मरीजों के रेफरल और नियमित फॉलोअप से संबंधित व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया। जिलाधिकारी रुद्रप्रयाग के निर्देश पर आयोजित कार्यक्रम में मेडिकल कॉलेज के मनोरोग विभागाध्यक्ष डॉ.मोहित सैनी,असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ.पार्थ दत्ता और असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ.श्वेता कृष्णा ने प्रतिभागियों को मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े विभिन्न विषयों पर विस्तार से जानकारी दी। विशेषज्ञों ने बताया कि मानसिक रोगों की समय पर पहचान,उचित उपचार और मरीज की निरंतर निगरानी से बीमारी की गंभीरता को कम करने तथा जीवन की गुणवत्ता में सुधार लाने में मदद मिल सकती है। प्रशिक्षण के दौरान अवसाद,चिंता,घबराहट के दौरे-पैनिक अटैक,आत्महत्या के जोखिम,नशे से संबंधित समस्याओं और मानसिक स्वास्थ्य आपात स्थितियों के प्रबंधन पर विशेष चर्चा की गई। साथ ही सामान्य मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं की पहचान करने,मरीज की स्थिति का प्रारंभिक आकलन करने और जरूरत के अनुसार उपचार एवं विशेषज्ञ परामर्श उपलब्ध कराने की प्रक्रिया समझाई गई। कार्यशाला में पर्वतीय क्षेत्रों में प्रचलित सांस्कृतिक मान्यताओं से जुड़ी ट्रांस एवं पजेशन अवस्थाओं और कन्वर्जन डिसऑर्डर के चिकित्सकीय मूल्यांकन पर भी जानकारी दी गई। विशेषज्ञों ने इस बात पर जोर दिया कि ऐसी परिस्थितियों में मरीज की स्थिति का संवेदनशीलता के साथ आकलन किया जाना चाहिए,ताकि जरूरत के अनुसार उचित चिकित्सकीय सहायता उपलब्ध कराई जा सके। मनोरोग विभागाध्यक्ष डॉ.मोहित सैनी ने कहा कि पर्वतीय क्षेत्रों की भौगोलिक परिस्थितियों के कारण कई बार लोगों को विशेषज्ञ मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंचने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। ऐसे में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर तैनात चिकित्सा अधिकारियों को सामान्य मानसिक रोगों की पहचान,प्रारंभिक उपचार और गंभीर मरीजों को समय पर उच्च चिकित्सा केंद्रों में रेफर करने के लिए प्रशिक्षित करना बेहद जरूरी है। उन्होंने कहा कि प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं को मानसिक स्वास्थ्य के प्रति अधिक सक्षम बनाकर दूरस्थ क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को समय पर उपचार उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण मदद मिल सकती है। प्रशिक्षण के दौरान आशा फैसिलिटेटरों को मानसिक स्वास्थ्य के क्षेत्र में उनकी जिम्मेदारियों के बारे में विस्तार से बताया गया। उन्हें समुदाय में मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं के शुरुआती संकेत पहचानने,लोगों को जागरूक करने,जरूरतमंद मरीजों को स्वास्थ्य सेवाओं से जोड़ने और उपचार के दौरान नियमित फॉलोअप में सहयोग करने की जानकारी दी गई। विशेषज्ञों ने बताया कि मानसिक रोगों को लेकर समाज में व्याप्त झिझक और गलत धारणाओं को दूर करना भी आवश्यक है। यदि परिवार और समुदाय के स्तर पर मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं को समझने तथा मरीजों को सहयोग देने का वातावरण तैयार किया जाए,तो मरीजों को समय पर उपचार के लिए प्रेरित किया जा सकता है। कार्यशाला में सरल स्क्रीनिंग उपकरणों के इस्तेमाल,प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर उपलब्ध उपचार विकल्पों और विशेषज्ञ चिकित्सा केंद्रों में रेफरल की आवश्यकता पहचानने पर विशेष जोर दिया गया। प्रतिभागियों को बताया गया कि किन परिस्थितियों में मरीज को तत्काल विशेषज्ञ सहायता की जरूरत हो सकती है और उपचार के बाद नियमित निगरानी क्यों महत्वपूर्ण है। प्रशिक्षण को प्रभावी एवं व्यावहारिक बनाने के लिए केस आधारित अभ्यास और प्रश्नोत्तर सत्र भी आयोजित किया गया। इस दौरान प्रतिभागियों ने मानसिक स्वास्थ्य से संबंधित विभिन्न परिस्थितियों पर चर्चा की और विशेषज्ञों से अपने सवालों के जवाब प्राप्त किए। विशेषज्ञों ने स्पष्ट किया कि आत्महत्या के जोखिम और अन्य गंभीर मानसिक स्वास्थ्य आपात स्थितियों में समय पर आकलन,उचित चिकित्सकीय सहायता और आवश्यकतानुसार तत्काल रेफरल बेहद महत्वपूर्ण हैं। कार्यक्रम में मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ.पारुल गोयल के मार्गदर्शन एवं अपर मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ.सीमा टेकचंदानी के समन्वय से आयोजित किया गया। जिला समन्वयक नागेश्वर प्रसाद ने आयोजन में सहयोग किया। कार्यक्रम में 29 चिकित्सा अधिकारी,18 आशा फैसिलिटेटर,तीन ब्लॉक समन्वयक शामिल रहे। मनोरोग विभाग की ओर से आयोजित इस कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े कर्मियों की क्षमता बढ़ाना और मानसिक स्वास्थ्य देखभाल को जमीनी स्तर तक पहुंचाना रहा। प्रशिक्षण के माध्यम से चिकित्सा अधिकारियों और आशा फैसिलिटेटरों को मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं की पहचान से लेकर मरीजों को उपचार से जोड़ने तक की प्रक्रिया के प्रति अधिक सक्षम बनाने का प्रयास किया गया। कार्यशाला के माध्यम से यह संदेश दिया गया कि मानसिक स्वास्थ्य भी समग्र स्वास्थ्य का महत्वपूर्ण हिस्सा है। समय पर पहचान,उचित उपचार,समुदाय का सहयोग और नियमित फॉलोअप के जरिए मानसिक रोगों से प्रभावित लोगों को बेहतर देखभाल उपलब्ध कराई जा सकती है। इससे विशेष रूप से दूरस्थ पर्वतीय क्षेत्रों में मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच और प्रभावशीलता बढ़ाने में मदद मिलने की उम्मीद है।
