गैरसैंण विधानसभा सत्र में चुनौतियों के बीच कर्तव्य निभाते रहे पुलिस के जवान-क्षेत्राधिकारी तपेश कुमार ने अस्पताल पहुंचकर जाना घायल जवान का हाल

 

 

 

श्रीनगर गढ़वाल। कर्तव्य की राह में चुनौतियां कितनी भी कठिन क्यों न हों,वर्दी का फर्ज निभाने का जज्बा कभी कमजोर नहीं पड़ता। चोटों का दर्द,शारीरिक थकान और विपरीत परिस्थितियां भी पुलिस जवानों के हौसले को डिगा नहीं सकीं। गैरसैंण में आयोजित विधानसभा सत्र के दौरान शांति,सुरक्षा एवं कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस के जवान पूरी मुस्तैदी और समर्पण के साथ अपने कर्तव्यों का निर्वहन करते रहे। बीते दिनों गैरसैंण में विधानसभा सत्र के दौरान विभिन्न संगठनों की ओर से अपनी मांगों को लेकर किए गए धरना-प्रदर्शन एवं अन्य कार्यक्रमों के बीच सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखना पुलिस बल के लिए किसी बड़ी चुनौती से कम नहीं था। कई बार परिस्थितियां तनावपूर्ण हुईं और धक्का-मुक्की सहित अप्रत्याशित घटनाओं का सामना करना पड़ा। इस दौरान कुछ पुलिस अधिकारी एवं कर्मचारी चोटिल भी हुए,लेकिन इसके बावजूद जवानों ने अपने कर्तव्य से पीछे हटने के बजाय पूरी जिम्मेदारी और मुस्तैदी के साथ मोर्चा संभाले रखा। इसी क्रम में जनपद चमोली में तैनात कांस्टेबल 38 ना.पु.विक्रम खनेड़ा की ड्यूटी 27 अक्टूबर 2026 को गैरसैंण में आयोजित विधानसभा सत्र के दौरान दुक्तमा बैरियर पर वीडियोग्राफी के लिए लगाई गई थी। ड्यूटी के दौरान उनके दाहिने हाथ में गंभीर चोट लग गई, जिससे हड्डी फ्रैक्चर हो गई। उपचार के लिए वह 31 अक्टूबर को बेस अस्पताल श्रीकोट में भर्ती हुए। चिकित्सकों द्वारा उनका ऑपरेशन 2 नवंबर को किया जाना निर्धारित है। घायल जवान का हौसला बढ़ाने और उसकी कुशलक्षेम जानने के लिए क्षेत्राधिकारी श्रीनगर तपेश कुमार बेस अस्पताल पहुंचे। उन्होंने जवान से मुलाकात कर उसके स्वास्थ्य,उपचार एवं स्वास्थ्य में हो रहे सुधार की जानकारी ली। साथ ही उसके शीघ्र स्वस्थ होने की कामना करते हुए हौसला बढ़ाया। वहीं प्रभारी निरीक्षक कोतवाली श्रीनगर द्वारा भी समय-समय पर अस्पताल पहुंचकर घायल जवान की कुशलक्षेम पूछी जा रही है तथा उसके उपचार और स्वास्थ्य की स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है। वर्दी केवल पहचान नहीं,कर्तव्य और समर्पण का प्रतीक है। गैरसैंण में चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों के बीच पुलिस जवानों का साहस और कर्तव्यनिष्ठा यह संदेश देता है कि जनसुरक्षा की जिम्मेदारी निभाने वाले जवान हर परिस्थिति में अपने दायित्वों को सर्वोपरि रखते हैं। ऐसे जांबाज जवानों का मनोबल बढ़ाना और उनके प्रति सम्मान व्यक्त करना समाज की भी जिम्मेदारी है।