पुरानी पेंशन की मांग को लेकर उत्तराखंड में आंदोलन को नई धार-दीपावली पर घर-घर सजेगी ओपीएस रंगोली

 

 

देहरादून/श्रीनगर गढ़वाल। पुरानी पेंशन बहाली की मांग को लेकर उत्तराखंड में कर्मचारियों का आंदोलन लगातार व्यापक स्वरूप लेता जा रहा है। दो नवंबर को देहरादून में आयोजित राष्ट्रीय पुरानी पेंशन बहाली संयुक्त मोर्चा (एनओपीआरयूएफ) की आर-पार महारैली के बाद अब संगठन ने दीपावली के पावन अवसर पर प्रदेशव्यापी पुरानी पेंशन रंगोली अभियान शुरू करने का आह्वान किया है। इस अनूठी पहल के माध्यम से प्रदेश के सभी जनपदों में कर्मचारी अपने घरों,आंगनों,कार्यालयों और सार्वजनिक स्थलों पर रंगोलियां सजाकर पुरानी पेंशन बहाली की मांग को समाज और सरकार तक पहुंचाएंगे। मोर्चा का मानना है कि पुरानी पेंशन का मुद्दा केवल कर्मचारियों के वेतन अथवा सेवानिवृत्ति के बाद मिलने वाली आर्थिक सुविधा तक सीमित नहीं है,बल्कि यह उनके सम्मान,सामाजिक सुरक्षा और जीवनभर की सेवा के बाद सुरक्षित भविष्य से जुड़ा महत्वपूर्ण विषय है। इसी भावना को जन-जन तक पहुंचाने के उद्देश्य से इस बार दीपावली पर दीपों के साथ पुरानी पेंशन बहाली के संदेश से सजी रंगोलियां भी आकर्षण का केंद्र बनेंगी। देहरादून में दो नवंबर 2026 को आयोजित आर-पार महारैली में प्रदेश के विभिन्न जनपदों से बड़ी संख्या में कर्मचारियों,शिक्षकों और विभिन्न विभागों के कार्मिकों ने प्रतिभाग कर पुरानी पेंशन बहाली की मांग को लेकर अपनी एकजुटता प्रदर्शित की थी। महारैली के माध्यम से कर्मचारियों ने स्पष्ट किया कि वे अपनी सामाजिक सुरक्षा से जुड़े इस विषय पर लंबे समय से समाधान की प्रतीक्षा कर रहे हैं। महारैली के बाद अब दीपावली पर रंगोली अभियान के माध्यम से आंदोलन को एक रचनात्मक और जनसहभागिता आधारित स्वरूप देने की तैयारी है। संगठन का प्रयास है कि पुरानी पेंशन का विषय केवल कर्मचारी संगठनों की बैठकों और सभाओं तक सीमित न रहे,बल्कि प्रत्येक कर्मचारी परिवार और समाज के बीच भी इस पर व्यापक चर्चा हो। मुख्यमंत्री के बयान के बाद पुरानी पेंशन का मुद्दा फिर चर्चा में हाल ही में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी द्वारा पुरानी पेंशन के विषय में दिए गए बयान के बाद यह मुद्दा एक बार फिर चर्चा के केंद्र में है। मोर्चा का कहना है कि कर्मचारियों की लगातार एकजुटता और आंदोलन के माध्यम से उठाई जा रही आवाज अब सरकार के शीर्ष स्तर तक पहुंच रही है। संगठन ने सरकार से अपेक्षा की है कि वह कर्मचारियों के साथ सार्थक संवाद स्थापित कर उनकी वर्षों पुरानी मांग पर सकारात्मक निर्णय ले। मोर्चा के अनुसार राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली और एकीकृत पेंशन योजना के स्थान पर कर्मचारी पुरानी पेंशन व्यवस्था की बहाली चाहते हैं। संगठन का तर्क है कि बाजार आधारित पेंशन व्यवस्था में भविष्य की आर्थिक सुरक्षा को लेकर कर्मचारियों के मन में अनेक आशंकाएं हैं। ऐसे में पुरानी पेंशन व्यवस्था को बहाल करना उनके लिए सामाजिक और आर्थिक सुरक्षा का महत्वपूर्ण विषय है। मोर्चा के प्रदेश प्रभारी विक्रम सिंह रावत ने कहा कि पुरानी पेंशन बहाली का विषय कर्मचारियों के जीवन की सुरक्षा और उनके भविष्य से जुड़ा हुआ है। कर्मचारी अपने सेवाकाल का महत्वपूर्ण हिस्सा राज्य और देश की सेवा में समर्पित करते हैं। ऐसे में सेवानिवृत्ति के बाद सम्मानजनक जीवन और आर्थिक सुरक्षा सुनिश्चित होना भी आवश्यक है। उन्होंने कहा कि दो नवंबर की आर-पार महारैली ने कर्मचारियों की एकजुटता का प्रभावशाली प्रदर्शन किया है। अब दीपावली पर रंगोली अभियान के माध्यम से अपनी मांग को सकारात्मक,शांतिपूर्ण और रचनात्मक तरीके से समाज के सामने रखा जाएगा। उन्होंने प्रदेश के सभी जनपदों के पदाधिकारियों से अभियान को सफल बनाने और अधिक से अधिक कर्मचारियों को जोड़ने की अपील की। प्रदेश अध्यक्ष मनोज अवस्थी ने कहा कि दो नवंबर की महारैली ने सरकार तक कर्मचारियों की भावनाएं और उनकी मांग पहुंचाने का कार्य किया है। अब सरकार को कर्मचारियों के साथ सार्थक संवाद स्थापित कर पुरानी पेंशन बहाली की दिशा में ठोस पहल करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि पुरानी पेंशन केवल आर्थिक मांग नहीं,बल्कि कर्मचारियों के सम्मान,सामाजिक सुरक्षा और भविष्य की स्थिरता का सवाल है। कर्मचारी अपना पूरा जीवन सरकारी सेवा में समर्पित करते हैं। इसलिए सेवानिवृत्ति के बाद उनका भविष्य बाजार की अनिश्चितताओं के भरोसे नहीं छोड़ा जाना चाहिए। दीपावली रंगोली अभियान के संबंध में उन्होंने कहा कि आंदोलन अब बैठकों,धरना-प्रदर्शनों और महारैलियों तक सीमित नहीं रहेगा,बल्कि इसे कर्मचारियों के परिवारों और समाज के प्रत्येक वर्ग तक पहुंचाया जाएगा। दीपावली प्रकाश और खुशियों का पर्व है। इस अवसर पर प्रत्येक कर्मचारी के घर और आंगन में पुरानी पेंशन बहाली का संदेश दिखाई देना चाहिए। उन्होंने अधिकारियों,कर्मचारियों,शिक्षकों,महिला कार्मिकों और उनके परिवारजनों से अपील की कि वे पुरानी पेंशन के संदेश से सजी रंगोलियां बनाकर उनकी तस्वीरें और वीडियो संगठन के साथ साझा करें। उन्होंने कहा कि यह संघर्ष किसी एक व्यक्ति अथवा संगठन का नहीं,बल्कि आने वाली पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य से जुड़ा विषय है। प्रदेश महासचिव सीताराम पोखरियाल ने कहा कि रंगोली कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए प्रदेश,मंडल और जिला कार्यकारिणियों के माध्यम से व्यापक समन्वय स्थापित किया जाएगा। प्रत्येक जनपद में संगठन के पदाधिकारी कर्मचारियों से संपर्क कर उन्हें अभियान से जोड़ेंगे। उन्होंने कहा कि इस कार्यक्रम की विशेषता यह है कि प्रत्येक कर्मचारी अपनी सुविधा और रचनात्मकता के अनुसार इसमें भागीदारी कर सकता है। कोई अपने घर के आंगन में रंगोली बनाएगा तो कोई कार्यालय में पुरानी पेंशन बहाली का संदेश प्रदर्शित करेगा। परिवार के सदस्य भी इस अभियान में अपनी सहभागिता निभा सकेंगे। प्रदेश उपाध्यक्ष केदार फरस्वाण ने कहा कि दो नवंबर की महारैली ने कर्मचारियों की सामूहिक शक्ति को प्रदर्शित किया है। पुरानी पेंशन बहाली की मांग को लेकर कर्मचारियों की एकजुटता ही इस आंदोलन की सबसे बड़ी ताकत है। उन्होंने सरकार से कर्मचारियों की भावनाओं का सम्मान करते हुए पुरानी पेंशन बहाली की दिशा में ठोस निर्णय लेने की मांग की। उन्होंने कहा कि दीपावली पर आयोजित होने वाला रंगोली अभियान आंदोलन को घर-घर तक पहुंचाने का प्रभावशाली माध्यम बनेगा। प्रदेश महिला अध्यक्ष रनीता विश्वकर्मा ने कहा कि पुरानी पेंशन का विषय प्रत्येक कर्मचारी परिवार की आर्थिक सुरक्षा से जुड़ा हुआ है। घर की आर्थिक स्थिरता,बच्चों का भविष्य और सेवानिवृत्ति के बाद सम्मानजनक जीवन में पेंशन की महत्वपूर्ण भूमिका है। महिला कर्मचारी भी इस मांग को लेकर पूरी मजबूती से अपनी भागीदारी निभा रही हैं। उन्होंने प्रदेश की सभी महिला कर्मचारियों और महिला पदाधिकारियों से दीपावली पर पुरानी पेंशन संदेश वाली रंगोलियां बनाकर अभियान को सफल बनाने का आह्वान किया। प्रदेश महिला वरिष्ठ उपाध्यक्ष नीतू कार्की ने कहा कि महिला कर्मचारियों की चिंताएं भी उतनी ही महत्वपूर्ण हैं जितनी अन्य कर्मचारियों की। रंगोली अभियान के माध्यम से महिलाएं अपने परिवारों के साथ इस मुहिम में शामिल होकर पुरानी पेंशन बहाली के प्रति अपनी प्रतिबद्धता प्रदर्शित करेंगी। गढ़वाल मंडल महिला अध्यक्ष रश्मि गौड़ ने कहा कि गढ़वाल मंडल के विभिन्न जनपदों में महिला कर्मचारियों और उनके परिवारों के बीच अभियान को लेकर जागरूकता बढ़ाई जाएगी। वहीं कुमाऊं मंडल महिला अध्यक्ष सुधा पांडे ने कहा कि कुमाऊं मंडल के सभी जनपदों में भी रंगोलियों के माध्यम से पुरानी पेंशन बहाली की आवाज बुलंद की जाएगी। उन्होंने महिलाओं से पारंपरिक रंगोलियों के साथ पुरानी पेंशन बहाली का संदेश जोड़ने की अपील की। प्रदेश समन्वयक लक्ष्मण सिंह सजवाण ने कहा कि पुरानी पेंशन बहाली का आंदोलन अब प्रदेश की सीमाओं से आगे बढ़कर राष्ट्रीय स्तर पर अपनी उपस्थिति दर्ज करा रहा है। दो नवंबर की महारैली ने कर्मचारियों की एकजुटता का संदेश दिया है। उन्होंने कहा कि दीपावली रंगोली अभियान प्रदेश के प्रत्येक जनपद में कर्मचारियों को जोड़ने का प्रभावी माध्यम बनेगा। रंगोलियों में उकेरे गए संदेश कर्मचारियों की उम्मीदों,संघर्ष और सुरक्षित भविष्य के संकल्प को अभिव्यक्त करेंगे। राष्ट्रीय पुरानी पेंशन बहाली संयुक्त मोर्चा उत्तराखंड की ओर से प्रदेश के सभी जनपदों में इस अभियान को व्यापक स्तर पर संचालित करने की तैयारी की गई है। रंगोलियों के माध्यम से पुरानी पेंशन योजना,हमें पुरानी पेंशन चाहिए,एक मिशन पुरानी पेंशन और पेंशन हमारा अधिकार है जैसे संदेश प्रदर्शित किए जाएंगे। इस अभियान में महिला एवं पुरुष कर्मचारी,युवा कार्मिक,शिक्षक,अधिकारी और उनके परिवारजन भी भागीदारी निभाएंगे। संगठन की योजना है कि प्रदेश के प्रत्येक जनपद से रंगोलियों की तस्वीरें और वीडियो एकत्रित कर उन्हें साझा किया जाए,जिससे पूरे उत्तराखंड में एक साथ पुरानी पेंशन बहाली की आवाज बुलंद हो सके। मोर्चा ने स्पष्ट किया कि यह किसी राजनीतिक गतिविधि का हिस्सा नहीं,बल्कि कर्मचारियों की सामाजिक सुरक्षा से जुड़े विषय पर जन-जागरूकता का शांतिपूर्ण और रचनात्मक अभियान है। इस बार उत्तराखंड में दीपावली का उत्सव एक विशेष संदेश के साथ मनाने की तैयारी है। घरों में दीप जलेंगे,आंगनों में रंगोलियां सजेंगी और रंगों के माध्यम से कर्मचारी अपने सुरक्षित भविष्य की मांग को अभिव्यक्त करेंगे। दो नवंबर की महारैली के बाद शुरू की जा रही यह पहल पुरानी पेंशन बहाली के आंदोलन को जनसहभागिता से जोड़ने का एक नया प्रयास है। मोर्चा के पदाधिकारियों ने दोहराया कि जब तक पुरानी पेंशन बहाली की मांग पर सकारात्मक निर्णय नहीं होता,तब तक संगठन का संघर्ष जारी रहेगा। राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली और एकीकृत पेंशन योजना नहीं,पुरानी पेंशन चाहिए। पेंशन हमारा अधिकार है। कर्मचारियों का सम्मान और सुरक्षित भविष्य हमारी प्राथमिकता। पुरानी पेंशन बहाली तक संघर्ष जारी रहेगा।