कृषि व सहकारिता के संयुक्त प्रयासों से आत्मनिर्भर बन रहा किसान और गांव की आर्थिकी मजबूत होगी तो देश समृद्ध बनेगा-सुबोध उनियाल

गढ़वाल। श्रीनगर के आवास विकास मैदान में आयोजित नौ दिवसीय सहकारिता मेला ग्रामीण विकास,आत्मनिर्भर भारत और आर्थिक सशक्तिकरण की भावना से सराबोर रहा। इस अवसर पर मुख्य अतिथि वन एवं पर्यावरण मंत्री सुबोध उनियाल तथा विशिष्ट अतिथि सहकारिता मंत्री डॉ.धन सिंह रावत ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। कार्यक्रम में मंत्री सुबोध उनियाल ने कहा कि यदि देश की अर्थव्यवस्था को मजबूत करना है,तो सबसे पहले गांव की आर्थिकी को सशक्त बनाना होगा। उन्होंने कहा कि सहकारिता ही वह माध्यम है जो किसान,मजदूर,महिला और युवा सभी को एक सूत्र में जोड़कर आर्थिक क्रांति का मार्ग प्रशस्त करती है। सुबोध उनियाल ने कहा कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और सहकारिता मंत्री डॉ.धन सिंह रावत के नेतृत्व में उत्तराखंड का सहकारी मॉडल पूरे देश के लिए एक मिसाल बन रहा है। उन्होंने कहा कि जब गांवों में रोजगार के अवसर बढ़ेंगे,उत्पादन और विपणन के लिए स्थानीय मंच मिलेगा,तब पलायन की समस्या अपने आप समाप्त हो जाएगी। उन्होंने सहकारिता मंत्री डॉ.रावत के नवाचारपूर्ण प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि 500 नाली भूमि क्लस्टर योजना,बिना ब्याज ऋण योजना,रेहड़ी-पटरी वालों के लिए आर्थिक सहायता और लखपति दीदी योजना जैसी पहले ग्रामीण जीवन में नई चेतना ला रही हैं। कार्यक्रम में विशेष अवसर पर जिले के 156 किसानों को कुल 2 करोड़ 21 लाख 50 हजार रुपये का ब्याज रहित ऋण वितरित किया गया। यह ऋण पंडित दीनदयाल उपाध्याय सहकारिता किसान कल्याण योजना के अंतर्गत दिया गया। रिखणीखाल ब्लॉक के 55 किसानों को रुपए 79 लाख,नैनीडांडा ब्लॉक के 61 किसानों को रुपए 84.50 लाख और बिरोंखाल ब्लॉक के 40 किसानों को रुपए 58 लाख की धनराशि प्रदान की गई। सहकारिता मंत्री डॉ.धन सिंह रावत ने कहा कि सहकारिता अब एक आंदोलन का रूप ले चुकी है। राज्य सरकार किसानों,महिला समूहों और युवाओं को आर्थिक रूप से सशक्त करने के लिए निरंतर प्रयासरत है। आने वाले वर्षों में हर विकासखंड में सहकारिता आधारित लघु उद्योग और महिला उद्यमिता केंद्र स्थापित किए जाएंगे। उन्होंने बताया कि सरकार द्वारा लघु एवं सीमांत किसानों को रुपए 1 लाख तक ब्याजमुक्त फसली ऋण तथा पशुपालन और मशरूम उत्पादन हेतु रुपए 1.60 से रुपए 5 लाख तक का ब्याज रहित ऋण उपलब्ध कराया जा रहा है। डॉ.रावत ने कहा कि मिलेट्स मिशन योजना के तहत सहकारी समितियां किसानों से मंडुवा रुपए 4,886 प्रति क्विंटल की दर से क्रय कर रही हैं,जिससे किसानों को फसल का उचित मूल्य मिल रहा है और पारंपरिक कृषि को नया जीवन मिल रहा है। मेले के दौरान महिला मंगल दलों के लोक-सांस्कृतिक कार्यक्रम मुख्य आकर्षण रहे। थलीसैंण,कपरोली और आसपास के क्षेत्रों से आई महिलाओं ने पारंपरिक गीत-नृत्य प्रस्तुत कर उत्तराखंडी लोक संस्कृति की झलक पेश की। शाम को लोकगायिका हेमा नेगी करासी के गीतों ने पूरे वातावरण को लोक रंगों से भर दिया। मेले की शुरुआत आर.सी.मेमोरियल उफल्डा पब्लिक स्कूल के बैंड प्रदर्शन से हुई,जिसमें बच्चों के शानदार प्रदर्शन पर मुख्य अतिथि द्वारा रुपए 2100 की पुरस्कार राशि भेंट की गई। कार्यक्रम में इफको के अध्यक्ष दिलीप संघाणी,निदेशक उमेश त्रिपाठी,अपर निबंधक आनंद ए.डी.शुक्ला,महाप्रबंधक जिला सहकारी बैंक संजय रावत,मेला संयोजक मातवर सिंह रावत,संपत सिंह रावत,महावीर कुकरेती,नरेंद्र सिंह रावत, मनोज पटवाल,ब्लॉक प्रमुख खिर्सू अनिल भण्डारी,भाजपा जिला महामंत्री गणेश भट्ट,मंडल अध्यक्ष विनय घिल्डियाल सहित अनेक गणमान्यजन उपस्थित रहे। कार्यक्रम के अंत में अतिथियों को स्मृति चिह्न भेंट कर सम्मानित किया गया। सहकारिता विभाग के अधिकारियों ने बताया कि मेले के माध्यम से ग्रामीण उत्पादों,महिला समूहों और सहकारी समितियों को अपने कार्यों का प्रदर्शन करने का अवसर मिला,जिससे स्थानीय उत्पादों को बाजार से सीधा जुड़ाव प्राप्त हुआ है। सहकारिता मेला केवल एक आयोजन नहीं,बल्कि ग्रामीण नवजागरण की नई शुरुआत है। जिस दिन गांव आत्मनिर्भर बन जाएंगे,उस दिन पलायन शब्द इतिहास बन जाएगा। सहकारिता की यह लहर उत्तराखंड के हर घर में समृद्धि की नई कहानी लिख रही है।