Wednesday 25/ 02/ 2026 

Bharat Najariya
सोशल मीडिया पर भगवान राम माता सीता के लिये अभद्र भाषा का प्रयोग करने वाले आकाश बाबू के खिलाफ भारी आक्रोश! विधायक शिव अरोरा हिन्दू सगठनो के साथ पहुँचे ट्रांजिष्ट कैम्प थाना कोतवाल को निर्देशित कर बोले उसका ऐसा इलाज हो सात पुश्ते याद करे, पुलिस सुनिश्चित कर ले देवभूमि मे अब रामद्रोही नजर नहीं आना चाहिएऐतिहासिक स्वागत उत्तराखंड राज्य हज समिति के अध्यक्ष पद पर कविज खतीब अहमदजिलाधिकारी नितिन सिंह भदौरिया ने निर्माणाधीन एम्स किच्छा का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान उन्होने निर्माण कार्यो की धीमी गति पर गहरी नाराजगी व्यक्त करते हुए श्रमिकों की संख्या व उपकरण बढ़ाते हुए कार्यो में गति लाकर आगामी माह मई तक चिकित्सालय कार्य पूर्ण करने के निर्देश महाप्रबंधक नागार्जुन कन्सट्रेशन कम्पनी (एनसीसी) शंकर बालू को दिये। उन्होने कहा प्राथमिकता से चिकित्सालय के प्रशासनिक भवन व ओपीडी भवनों को कार्ययोजना बनाते हुए प्राथमिकता से पूर्ण करने के निर्देश दिये ताकि शीघ्रता से ओपीडी प्रारम्भ की जा सकें साथ ही उन्होने केन्द्रीय लोक निर्माण विभाग के अभियंता को मेडिकल उपकरणों व फर्नीचर खरीद हेतु फर्मो को आर्डर करने के निर्देश भी दिये।जिलाधिकारी ने चिकित्सालय निर्माण कार्यो के साथ ही इलैक्ट्रीकल व मैकेनिकल कार्यो का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान उन्होने मुख्य चिकित्साधिकारी, उप जिलाधिकारी को प्रत्येक पाक्षिक कार्य प्रगति की मॉनिटरिंग करते हुए कार्य प्रगति रिपोर्ट देने के निर्देश मौके पर दिये।इसके उपरांत जिलाधिकारी ने निर्माणाधीन मेडिकल व नर्सिग स्टाफ आवासों का भी निरीक्षण किया। उन्होने कार्यो की गुणवत्ता व सयबद्धता पर विशेष ध्यान देने के निर्देश कार्यदायी संस्थाओं के अभियंताओ को दियें। निरीक्षण के दौरान महाप्रबंधक एनसीसी ने बताया कि चिकित्सालय भवन के दो फ्लोरो का कार्य आगामी माह मई तक पूर्ण कर लिए जायेगें तथा शेष कार्य माह जुलाई तक पूर्ण कर लिए जायेगें। उन्होने बताया कि मेडिकल व नर्सिंग स्टाफ के आवासीय भवनों का कार्य 80 से 85 प्रतिशत कार्य पूर्ण कर लिया गया है, शेष कार्य भी शीघ्र पूर्ण कर लिया जायेगा। उन्होने बताया कि एम्स चिकित्सालय के पेंटिंग हेतु कलर की स्वीकृति मिल गयी है। निर्माण कार्य पूर्ण होते ही पेंटिग का कार्य भी प्रारम्भ कर दिया जायेगा। केन्द्रीय लोनिवि के अभियंता ने बताया कि मेडिकल उपकरणों का आर्डर फर्मो को दे दिया गया है तथा फर्नीचर के सैम्पल ले लिए गये है, सैम्पल स्वीकृत होते ही फर्नीचर का आर्डर भी शीघ्र दिया जायेगा।जिलाधिकारी ने एसटीपी कार्यो में भी गति लाकर शीघ्र पूर्ण करने के निर्देश दिये साथ ही ड्रेनेज कार्य भी अधिशासी अभियंता सिंचाई से मिलकर कराने के निर्देश दिये।निरीक्षण के दौरान मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ0 केके अग्रवाल, उप जिलाधिकारी गौरव पाण्डेय, अधिशासी अभियंता सिंचाई बीएस डांगी, एजीएम एनसीसी अजौय, प्रबंधक हरिशंकर, अरूण सिंह, सहायक अभियंता सीपीडब्लूडी राकेश पटेल, तहसीलदार गिरीश त्रिपाठी आदि मौजूद थे।अधिवक्ता का पेशा चुनौतीपूर्ण, जनहित सर्वोपरि: जिलाधिकारीटीएमयू का फिजिकल एजुकेशन कॉलेज फिरचैंपियन ऑफ द चैंपियंसमुखानी रोड पनचक्की पर सड़क हादसे में बुजुर्ग की मौत पर डीएम रयाल ने मजिस्ट्रेटी जांच के आदेशहल्द्वानी अंबिका विहार के पंचक्की रोड पर सड़क हादसे में बुजुर्ग की मौत के बाद जिला प्रशासन हरकत में आए हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए जिला अधिकारी ललित मोहन रयाल ने मजिस्ट्रेटी जांच के आदेश दे दिए हैं। जिला अधिकारी ने स्पष्ट किया है की हादसे के कर्म निर्माण कार्यों में बस्ती गई लापरवाही और जिम्मेदार अधिकारियों संस्थाओं की भूमिका की गहन जांच की जाएगी। पूरे प्रकरण की जांच सिटी मजिस्ट्रेट एपी बाजपेई को सोफी गई है। उन्हें निर्देश दिए गए हैं कि निर्धारित समय सीमा में विस्तृत जांच रिपोर्ट प्रस्तुत करें। प्रशासन ने संकेत दिए हैं की यदि जांच में किसी भी स्तर पर लापरवाही पाई जाती है तो संबंधित जिम्मेदारों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। इस घटना के बाद शहर में चल रहे निर्माण कार्य की निगरानी और सुरक्षा व्यवस्थाओं को लेकर भी प्रशासन सतर्क नजर आ रहा है।रिपोर्टर । महेंद्र कुमार खबर पड़ताल हल्द्वानी नैनीताल उत्तराखंडभव्य हिंदू सम्मेलन में की सैकड़ो लोगों ने सहभागिताजल की रक्षा, सृष्टि की सुरक्षाउत्तराखंड पुलिस का सख्त एक्शन: सितारगंज में 03 फरार वारंटी धर दबोचे, वारंट तामीली अभियान ने पकड़ी रफ्तार।
उत्तराखण्ड

परिवारों को जोड़ती परंपरा शिव ध्वजा-सिद्धपीठ श्री देवलेश्वर महादेव मंदिर की यह अनूठी परंपरा

श्रीनगर गढ़वाल। पलायन के इस दौर में जब गांव खाली हो रहे हैं,परिवार बिखर रहे हैं और हमारी भाषा-बोली,तीज-त्योहार धीरे-धीरे पीछे छूटते जा रहे हैं,ऐसे समय में देवभूमि की धरती पर एक ऐसी पहल शुरू हुई है जिसने लोगों को फिर से अपनी जड़ों से जोड़ा है। यह पहल है-शिव ध्वजा परंपरा की,जिसे सिद्धपीठ श्री देवलेश्वर महादेव मंदिर समिति ने वर्ष 2016 में प्रारंभ किया था। शिव ध्वजा केवल एक धार्मिक परंपरा नहीं बल्कि गांवों और परिवारों को पुनः एक सूत्र में बांधने का माध्यम बन गई है। हर वर्ष यह ध्वजा एक नए गांव द्वारा लाई जाती है और इस ध्वजा लाने की प्रक्रिया भी अत्यंत अनूठी है। बैकुंठ चतुर्दशी मेले के दौरान पर्चियां डाली जाती हैं,जिनमें उन गांवों के नाम होते हैं जो अगले वर्ष ध्वजा लाने का दावा करते हैं। जिस गांव का नाम निकलता है,वही अगले वर्ष शिव ध्वजा लाता है। ध्वजा लाने के लिए गांव के हर परिवार की भागीदारी अनिवार्य होती है,साथ ही गांव की विवाहित बेटियों को विशेष रूप से बुलाया जाता है। यह परंपरा इस संदेश के साथ चलती है कि चाहे बेटी कहीं भी हो,उसकी जड़ें अपने गांव और अपने देवता से हमेशा जुड़ी रहती हैं। धूमधाम से निकाली जाने वाली यह शिव ध्वजा पूरे वर्ष बाबा भोलेनाथ को अर्पित रहती है। एक वर्ष के बाद जब नई ध्वजा आती है,तभी पुरानी ध्वजा उतारी जाती है और वह भी उसी गांव द्वारा जिसने उसे चढ़ाया था। शिव ध्वजा की यह परंपरा वर्ष 2016 में उजियाड़ी गांव से शुरू हुई। 48 फीट ऊंची पहली ध्वजा ने इस परंपरा की नींव रखी। इसके बाद हर वर्ष एक नया गांव इस परंपरा को आगे बढ़ाता रहा। 2017-तामलग गांव 54 फीट ऊंची ध्वजा,2018-गहड़ गांव अब तक की सबसे ऊंची 58 फीट ध्वजा,2019-गगवाड़ा गांव लगभग समान ऊंचाई की ध्वजा,2020-कोविड काल में भी परंपरा नहीं टूटी,समिति ने स्वयं 48 फीट की ध्वजा अर्पित की। 2021-बौसरी गांव 50 फीट,2022-धनाऊ गांव 56 फीट,2023-ननकोट गांव 54 फीट,2024-बुडोली गांव 54 फीट,2025-डांग गांव इस बार शिव ध्वजा लाएगा। जब ध्वजा मंदिर परिसर में पहुंचती है,तो सबसे पहले बाबा देवलेश्वर महादेव से आज्ञा ली जाती है कि हे भोलेनाथ नई ध्वजा प्रस्तुत है,कृपया पुरानी ध्वजा उतारने की अनुमति दें। आज्ञा मिलते ही पुरानी ध्वजा उतारी जाती है और नई ध्वजा चढ़ाकर महा आरती के साथ मेले का शुभारंभ होता है। ध्वजा का बदलता स्वरूप एकता के तीन रंग-आठ वर्षों तक शिव ध्वजा केवल सफेद रंग में आती थी,जो बाबा भोलेनाथ की पवित्रता का प्रतीक था। लेकिन वर्ष 2023 में क्षेत्र के धर्माचार्यों की उपस्थिति में एक धर्मसभा आयोजित की गई,जिसमें सर्वसम्मति से ध्वजा का स्वरूप बदला गया। अब शिव ध्वजा तीन रंगों में आती है-पीला: प्रथम पूज्य गणपति को समर्पित,सफेद: भोलेनाथ की पवित्रता का प्रतीक,लाल: माता पार्वती का आशीर्वाद दर्शाता है। तीनों रंगों का यह संयोजन त्रिदेव और त्रिशक्ति की एकता का प्रतीक है,जो इस परंपरा को और भी आध्यात्मिक और सांस्कृतिक गहराई प्रदान करता है। गांवों को जोड़ने वाली ध्वजा संस्कृति को सहेजने का पर्व शिव ध्वजा आज केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं,बल्कि गांवों के पुनर्जागरण का उत्सव बन चुकी है। यह परंपरा उस सामाजिक ताने-बाने को फिर से मजबूत कर रही है,जो पलायन की वजह से कमजोर पड़ता जा रहा था। हर वर्ष जब गांव के लोग,बेटियां और परदेसी एक साथ जुटते हैं,तो यह केवल एक ध्वजा नहीं,बल्कि एकता,आस्था और अपनी मिट्टी से जुड़ाव का प्रतीक बन जाती है। आइए बनें साक्षी इस वर्ष की शिव ध्वजा के इस वर्ष 1 नवंबर 2025 को जब डांग गांव की शिव ध्वजा मंदिर परिसर में पहुंचेगी,तब एक बार फिर पूरे क्षेत्र में हर-हर महादेव के जयघोष गूंजेंगे। यह केवल ध्वजा नहीं होगी,यह उस आस्था का प्रतीक होगी जो गांवों,परिवारों और पीढ़ियों को जोड़ रही है।

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