Friday 25/ 09/ 2026 

Bharat Najariya
महिला सशक्तिकरण और रोजगार के लिए रीड इंडिया की पहल,रुद्रपुर में शुरू हुआ नया प्रशिक्षण केंद्र।मुखर्जीनगर में 400 श्रमिकों को विधायक शिव अरोरा ने बाटी लेबर किट, विधायक बोले—हर पात्र श्रमिक तक पहुंच रहा है सरकार की योजना का लाभ1200 नशीले कैप्सूल के साथ एक तस्कर गिरफ्तार, 462 ग्राम मनःप्रभावी औषधि बरामदकिच्छा। नशे के अवैध कारोबार के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत एएनटीएफ रुद्रपुर और कोतवाली किच्छा पुलिस की संयुक्त टीम ने एक व्यक्ति को 1200 SPASMED BLUE कैप्सूल के साथ गिरफ्तार किया है। बरामद कैप्सूल का कुल वजन करीब 462 ग्राम बताया गया है। पुलिस के अनुसार बरामद मात्रा वाणिज्यिक श्रेणी में आती है।पुलिस के मुताबिक 23 सितंबर को क्षेत्राधिकारी एएनटीएफ प्रशांत कुमार के पर्यवेक्षण में एएनटीएफ रुद्रपुर और किच्छा पुलिस की टीम दरऊ चौकी क्षेत्र में चेकिंग कर रही थी। इसी दौरान वीरूनगला जाने वाले रास्ते पर मोटरसाइकिल सवार एक संदिग्ध व्यक्ति को रोककर तलाशी ली गई। तलाशी के दौरान उसके पास से 1200 SPASMED BLUE कैप्सूल बरामद हुए।पुलिस ने आरोपी की पहचान 40 वर्षीय छोटे खां पुत्र शोहराब खान, निवासी ईश्वरीपुर, थाना शीशगढ़, जिला बरेली के रूप में की है। उसके पास से कैप्सूल के अलावा एक पैशन मोटरसाइकिल, 650 रुपये नकद और एक वीवो मोबाइल फोन भी बरामद किया गया।पुलिस ने आरोपी के खिलाफ कोतवाली किच्छा में धारा 8/22/60 एनडीपीएस एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज किया है। आवश्यक कानूनी कार्रवाई के बाद आरोपी को न्यायालय के समक्ष पेश किया जा रहा है।क्लिनिक की आड़ में नशीले कैप्सूल बेचने का आरोपपुलिस के अनुसार प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने बताया कि वह कैप्सूल किच्छा निवासी अनीस अहमद से प्राप्त करता था और नशे के आदी युवकों को बेचता था। पूछताछ में टांडा बहेड़ी क्षेत्र में क्लिनिक की आड़ में प्रतिबंधित नशीले कैप्सूलों के कारोबार की जानकारी भी सामने आने की बात पुलिस ने कही है। पुलिस अब इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों के बारे में जानकारी जुटा रही है।यह कार्रवाई वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक ऊधमसिंहनगर अजय गणपति के निर्देशन में चलाए जा रहे ऑपरेशन प्रहार के तहत की गई। पुलिस का कहना है कि जिले में नशीले पदार्थों की तस्करी और अवैध कारोबार के खिलाफ कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी।नियमितीकरण और नियुक्ति की मांग को लेकर सफाई कर्मचारी पुनःधरने परमुख्यमंत्री ने हल्दी घेरा खटीमा में 722.76 लाख की लागत से नवनिर्मित गौशाला का लोकार्पण एवं 10884.28 लाख की 15 विकास योजनाओं का शिलान्यास किया।कपड़ों के गोदाम में लगी भीषण आग, लाखों रुपये के नुकसान की आशंकाहल्द्वानी। भोलेनाथ गार्डन में गुरुवार को उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब मकान की दूसरी मंजिल पर बने कपड़ों के गोदाम से अचानक धुएं का गुबार उठने लगा। देखते ही देखते आग ने विकराल रूप धारण कर लिया और गोदाम में रखा कपड़ों का सामान धू-धूकर जलने लगा। आग की लपटें देखकर आसपास के लोगों में हड़कंप मच गया और मौके पर भीड़ जुट गई।सूचना मिलते ही पुलिस और अग्निशमन विभाग की टीम मौके पर पहुंची। गोदाम गली के भीतर होने के कारण दमकल कर्मियों को आग तक पहुंचने और राहत-बचाव कार्य में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। आग की भयावहता को देखते हुए दमकल की दो गाड़ियां मौके पर भेजी गईं। फायर कर्मियों ने मोर्चा संभालते हुए आग पर काबू पाने का प्रयास शुरू किया।मुख्य अग्निशमन अधिकारी (सीएफओ) गौरव किरार भी मौके पर पहुंचे और राहत एवं बचाव कार्य का जायजा लिया। फायर कर्मियों ने कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाने का प्रयास किया। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, आग से गोदाम में रखा कपड़ों का काफी सामान जलकर राख हो गया। नुकसान का आकलन किया जा रहा है। फिलहाल लाखों रुपये के नुकसान की आशंका जताई जा रही है।आग लगने के कारणों का अभी पता नहीं चल सका है। पुलिस और अग्निशमन विभाग की टीम मामले की जांच में जुटी है। आग की घटना के चलते आसपास के क्षेत्र में काफी देर तक अफरा-तफरी का माहौल बना रहा।सितारगंज महिला ग्राम प्रधान पर आरोपों को लेकर प्रधान संघ का विरोधउत्तराखंड युवा कांग्रेस का तीन दिवसीय बुनियादी प्रशिक्षण शिविर आयोजित, वरिष्ठ नेताओं ने कार्यकर्ताओं को दिए दिशा निर्देश​रामनगर।उत्तराखंड युवा कांग्रेस द्वारा तीन दिवसीय बुनियादी प्रशिक्षण शिविर का सफल आयोजन किया गया। इस शिविर की अध्यक्षता युवा कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष विशाल सिंह भोजक एवं प्रदेश प्रभारी सुरभि द्विवेदी द्वारा संयुक्त रूप से की गई। शिविर में राज्य भर से युवा कांग्रेस के पदाधिकारियों ने हिस्सा लिया।​कार्यकर्ताओं को वैचारिक, रणनीतिक और संगठनात्मक रूप से सशक्त बनाने के उद्देश्य से आयोजित इस शिविर में दिल्ली से आई तीन सदस्यीय विशेषज्ञों की टीम ने मुख्य प्रशिक्षक के रूप में मार्गदर्शन प्रदान किया।​शिविर के दौरान कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं ने शिरकत की और युवा पदाधिकारियों का मार्गदर्शन किया।​प्रदेश कांग्रेस के उपनेता भुवन कापड़ी और विधायक काजी निजामुद्दीन ने युवाओं को जन-मुद्दों पर संघर्ष करने और जमीनी स्तर पर संगठन की पकड़ मजबूत करने का आह्वान किया।​प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गणेश गोदियाल और गुरदीप सप्पल ने विशेष रूप से उपस्थित रहकर कार्यकर्ताओं को महत्वपूर्ण दिशा निर्देश दिए और संगठन की भावी रणनीति साझा की।​प्रदेश अध्यक्ष विशाल सिंह भोजक और प्रदेश प्रभारी सुरभि द्विवेदी ने कहा कि तीन दिनों के इस गहन प्रशिक्षण से पदाधिकारियों में नई ऊर्जा का संचार हुआ है। शिविर से प्राप्त सीख के आधार पर युवा कांग्रेस पूरे प्रदेश में जनता के अधिकारों की लड़ाई को और अधिक मजबूती से लड़ेगी।इस दौरान युवा कांग्रेस के प्रदेश महासचिवसुमित लोहनी,प्रदेश महासचिव चांद खान, युवा कांग्रेस प्रदेश महासचिव अब्दुल रहमान, युवा कांग्रेस के पूर्व प्रदेश प्रवक्ता एडवोकेट फैजुल हक,विकाश कुमार आर्य,अमरजोत, नितिन शाह, अभय कत्यूरा,सचिन चौधरी,जुगल कंबोज,अर्णव कंबोज,गौरव सागर,उदित थपलियाल आदि मौजूद रहें।रामनगर में अवैध लीसा तस्करी का भंडाफोड़, कैंटर से 9 लांख के करीब के 390 कनस्तर लीसा बरामद; एक आरोपी गिरफ्ताररामनगर के पीरूमदारा स्वास्थ्य केंद्र की समस्याओं को लेकर विधि प्रकोष्ठ, युवा कांग्रेस ने प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र ब्लॉक इंचार्ज से की मुलाकात, सौंपा ज्ञापन
राज्य

हिमालय की जैव विविधता बेहद समृद्ध, मानवसभ्यता की खातिर संरक्षण अनिवार्यः प्रो. एसपी

तीर्थंकर महावीर यूनिवर्सिटी के कॉलेज ऑफ एग्रीकल्चर की ओर से विकसित भारत 2047 के तहत सतत विकास लक्ष्यों- एसडीजीएस पर दो दिनी नेशनल कॉन्फ्रेंस का शंखनाद

ख़ास बातें
प्राकृतिक खेती धरतीपुत्रों के स्वर्णिम भविष्य के लिए जरूरीः प्रो. मंजुला
विकसित भारत- 2047 के सपने के प्रति टीएमयू संजीदाः प्रो. पीके जैन
एग्रीकल्चर को समस्या का हिस्सा नहीं, बल्कि समाधान का हिस्सा बनाएं
सततता को सिद्धांत नहीं, बल्कि जीवन शैली में अपनाएंः डॉ. गणेश दत्त
नेशनल कॉन्फ्रेंस में अतिथियों ने कॉन्फ्रेंस प्रोसिडिंग का किया विमोचन

हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल यूनिवर्सिटी, उत्तराखंड के पूर्व कुलपति एवम् जाने-माने पर्यावरणविद प्रो. एसपी सिंह ने हिमालय को थर्ड पोल की संज्ञा देते हुए कहा, हिमालय केवल भारत ही नहीं, बल्कि चीन, म्यांमार और अन्य एशियाई देशों के लिए भी जल, जैव विविधता और जलवायु संतुलन का प्रमुख स्रोत है। हिमालय से निकलने वाली नदियां करोड़ों लोगों के जीवन, कृषि, पेयजल और उद्योगों को सहारा देती हैं, क्योंकि यहां ध्रुवीय क्षेत्रों के बाद सबसे अधिक बर्फ और हिम भंडार है। उन्होंने चिंता जताते हुए कहा, हिमालयी क्षेत्र में बर्फ पिघलना और जलवायु परिवर्तन गंभीर खतरे की घंटी है। यदि यह प्रक्रिया इसी तरह बढ़ती रही, तो सिंधु, गंगा, ब्रह्मपुत्र जैसी नदी प्रणालियों पर गहरा प्रभाव पड़ेगा, जिससे कृषि, जल सुरक्षा और पर्यावरणीय स्थिरता संकट में पड़ सकती है। उन्होंने कहा कि हिमालय की जैव विविधता अत्यंत समृद्ध है और इसका संरक्षण मानव सभ्यता के भविष्य के लिए अनिवार्य है। उन्होंने नदी सर्वेक्षण, कृषि उपयोग, अपशिष्ट प्रबंधन और सतत संसाधन उपयोग को भी महत्वपूर्ण बताया। कृषि क्षेत्र को समस्या का हिस्सा नहीं, बल्कि समाधान का हिस्सा बनना होगा। इसके लिए वैज्ञानिक दृष्टिकोण, पर्यावरणीय चेतना और सामुदायिक सहभागिता आवश्यक है। प्रो. सिंह तीर्थंकर महावीर यूनिवर्सिटी, मुरादाबाद के कॉलेज ऑफ एग्रीकल्चर की ओर से विकसित भारत 2047 के तहत सतत विकास लक्ष्यों- एसडीजीएस पर दो दिनी नेशनल कॉन्फ्रेंस के शुभारम्भ मौके पर बतौर मुख्य अतिथि बोल रहे थे। इससे पूर्व मुख्य अतिथि प्रो. एसपी सिंह, राष्ट्रीय जल विज्ञान संस्थान, रुड़की के वैज्ञानिक-ई डॉ. गोपाल कृष्ण, जीबी पंत राष्ट्रीय हिमालयी पर्यावरण संस्थान, अल्मोड़ा के वैज्ञानिक-ई डॉ. केएस कानवाल, टीएमयू की डीन एकेडमिक्स प्रो. मंजुला जैन, एग्रीकल्चर कॉलेज के डीन प्रो. प्रवीन कुमार जैन आदि ने मां सरस्वती के समक्ष दीप प्रज्ज्वलित करके नेशनल कॉन्फ्रेंस का शंखनाद किया। अतिथियों ने कॉन्फ्रेंस प्रोसिडिंग का विमोचन भी किया। कॉन्फ्रेंस सचिव प्रो. गणेश दत्त भट्ट और प्रो. महेश कुमार की उल्लेखनीय मौजूदगी रही। संचालन असिस्टेंट डीन एकेडमिक्स डॉ. नेहा आनंद ने किया।

पर्यावरणविद प्रो. सिंह ने सतत विकास और हिमालयी अध्ययन के महत्व पर विस्तार से चर्चा करते हुए कहा, आज कृषि, पर्यावरण और जल संसाधनों के सामने सबसे बड़ी चुनौती संतुलित विकास की है। सतत विकास का अर्थ केवल आर्थिक प्रगति नहीं, बल्कि प्रकृति, संसाधनों और आने वाली पीढ़ियों के हितों को ध्यान में रखकर विकास करना है। उन्होंने कहा कि भारत की कृषि में जल संकट, मृदा क्षरण, प्रदूषण, जलवायु परिवर्तन और कृषि अपशिष्ट का सही प्रबंधन न होना सबसे बड़ी बाधा है, इसलिए अब कृषि को अधिक टिकाऊ, पर्यावरण अनुकूल और संसाधन संरक्षण आधारित बनाना आवश्यक है। उन्होंने कार्बन जस्टिस की अवधारणा पर भी बल दिया, जिसका आशय है, विकास और उत्सर्जन का भार सभी पर समान रूप से पड़े और पर्यावरणीय न्याय सुनिश्चित किया जाए। सतत विकास, जल संरक्षण, जैव विविधता सुरक्षा और जलवायु न्याय के बिना विकास अधूरा है। डीन एकेडमिक्स प्रो. मंजुला जैन ने इंस्टिट्यूशंस इन्नोवेशन काउंसिल- आईआईसी की महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डालते हुए कहा, इस काउंसिल में नवाचार, उद्यमिता और समस्या समाधान की क्षमता विकसित करने का एक सशक्त मंच है, जो उन्हें भविष्य के कृषि नवप्रवर्तक बनने के लिए प्रेरित करता है। उन्होंने इंटरनेशनल ईयर ऑफ मिलेट्स 2023 के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा, भारत ने मिलेट्स को बढ़ावा देने में वैश्विक नेतृत्व स्थापित किया है। मिलेट्स जलवायु परिवर्तन के दौर में एक सशक्त, पोषणयुक्त एवं टिकाऊ फसल विकल्प हैं, जो खाद्य एवं पोषण सुरक्षा सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने एसडीजीएस का उल्लेख करते हुए बताया, सतत विकास लक्ष्यों को प्राप्त करने में कृषि की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने प्राकृतिक खेती, संसाधन संरक्षण और टिकाऊ कृषि पद्धतियों को अपनाने पर बल दिया, जिससे लाइफ ऑन लैंड जैसे लक्ष्यों को प्रभावी रूप से प्राप्त किया जा सके। प्रो. जैन ने कहा, टीएमयू सरीखे संस्थान नवाचार, शोध और सतत कृषि के माध्यम से राष्ट्रीय एवम् वैश्विक लक्ष्यों की प्राप्ति में महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं। एग्रीकल्चर कॉलेज के डीन प्रो. प्रवीन कुमार जैन ने कहा, यशस्वी प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के विकसित भारत 2047 के सपने के प्रति टीएमयू संजीदा है। वर्मी कम्पोस्ट इकाई, सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट- एसटीपी एवम् इफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट- ईटीपी जैसी व्यवस्थाएं प्रभावी रूप से संचालित हैं। उन्होंने कहा, कृषि को अधिक उत्पादक, पर्यावरण-अनुकूल और भविष्य-उन्मुख बनाने के लिए प्राकृतिक खेती, मृदा स्वास्थ्य संरक्षण, जल संसाधनों के विवेकपूर्ण उपयोग के संग-संग जैव विविधता संरक्षण पर विशेष ध्यान देना होगा। कॉन्फ्रेंस सचिव प्रो. गणेश दत्त भट्ट ने कहा, यह नेशनल कॉन्फ्रेंस केवल एक अकादमिक आयोजन नहीं, बल्कि सतत विकास लक्ष्यों को व्यवहार में उतारने की दिशा में एक सार्थक प्रयास है। उन्होंने कहा कि आज के समय में कृषि, पर्यावरण और समाज एक-दूसरे से गहराई से जुड़े हुए हैं, और सततता को केवल एक सिद्धांत नहीं, बल्कि जीवन शैली के रूप में अपनाना होगा। नेशनल कॉन्फ्रेंस में डॉ. आशुतोष अवस्थी, डॉ. देवेन्द्र पाल सिंह, डॉ. चारु बिष्ट, डॉ. अमित कुमार मौर्या, डॉ. शबनम ठाकुर, डॉ. शाकुली सक्सेना, डॉ. उपासना, डॉ. नेहा, डॉ. प्रिंस साहू, डॉ. निमित कुमार, डॉ. ब्रजपाल रजाबत, डॉ. आयुष मिश्रा, डॉ. सुषमा सिंह, डॉ. जेम्स सिंह, डॉ. इशिता, डॉ. अनुप्रिया, डॉ. अनिल कुमार सिंह के संग-संग बीएससी और एमएससी एग्रीकल्चर के स्टुडेंट्स मौजूद रहे।

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