Tuesday 28/ 04/ 2026 

Bharat Najariya
थलीसैंण में बदली सोच की तस्वीर-स्वास्थ्य विभाग की मुहिम से सुरक्षित मातृत्व की ओर मजबूत कदमश्रीनगर में रोजगार का उत्सव-43 कनिष्ठ सहायकों को मिला नियुक्ति पत्र,शिक्षा मंत्री ने खोले विकास के द्वारश्रीनगर में राष्ट्रीय लोक अदालत को लेकर प्री-लोक अदालत बैठकजिला योजना 2026-27 के परिव्यय पर विस्तृत समीक्षा बैठक आयोजित,विकास कार्यों में नवाचार व स्वरोजगार पर विशेष जोरदेवप्रयाग-कीर्तिनगर में गूंजा गौ सम्मान का आध्यात्मिक शंखनाद-संतों की अगुवाई में उठी राष्ट्रव्यापी चेतनासितारगंज में मानसिक गणना का महाकुंभ: 500+ प्रतिभागियों के बीच मुदित राठी बने “चैंपियन ऑफ चैंपियंस”।उत्तराखंड बोर्ड परीक्षा में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले जनपद के मेधावी विद्यार्थियों के साथ आज एक प्रेरणादायी संवाद कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में जिलाधिकारी नितिन सिंह भदौरिया ने अपने छात्र जीवन से लेकर सिविल सेवा तक के संघर्षपूर्ण और प्रेरक सफर को साझा करते हुए विद्यार्थियों को सफलता के सूत्र बताए। उन्होंने सभी विद्यार्थियों को उनके शानदार प्रदर्शन के लिए बधाई दी और उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। साथ ही उपस्थित अभिभावकों और शिक्षकों के योगदान की भी सराहना करते हुए उन्हें भी शुभकामनाएं दीं।रुद्रपुर। उत्तराखंड सरकार द्वारा भाजपा नेता नितिन चरण वाल्मीकि को उत्तराखंड सफाई कर्मचारी आयोग में सदस्य नामित किए जाने पर आज वाल्मीकि समाज के सैकड़ों लोग पूर्व विधायक राजेश शुक्ला के आवास पहुंचे, जहां उन्होंने फूल-मालाओं से उनका स्वागत किया तथा मिठाई खिलाकर प्रदेश के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी एवं पूर्व विधायक राजेश शुक्ला के प्रति आभार व्यक्त किया।इस अवसर पर वाल्मीकि समाज के सरपंच राकेश बाल्मीकि ने कहा कि पूर्व विधायक राजेश शुक्ला सदैव सर्व समाज के हित में कार्य करते हैं और हर वर्ग के लोगों से उनका सीधा जुड़ाव है। उन्होंने कहा कि आज उनके प्रयासों के चलते ही प्रदेश सरकार ने बाल्मीकि समाज के प्रतिनिधि के रूप में नितिन चरण वाल्मीकि को उत्तराखंड सफाई कर्मचारी आयोग में सदस्य नामित कर समाज को सम्मानित करने का कार्य किया है। इसके लिए समस्त समाज प्रदेश सरकार एवं पूर्व विधायक राजेश शुक्ला का हृदय से आभारी है।पूर्व विधायक राजेश शुक्ला ने प्रदेश के मुखिया पुष्कर सिंह धामी का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में उत्तराखंड सरकार समाज के हर वर्ग के उत्थान के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा लिए जा रहे ऐसे निर्णय सामाजिक समरसता को मजबूत करने के साथ ही वंचित वर्गों को मुख्यधारा में लाने का कार्य कर रहे हैं। भाजपा अनुसूचित मोर्चा पूर्व जिला महामंत्री नितिन चरण वाल्मीकि का आयोग में सदस्य के रूप में मनोनयन निश्चित रूप से समाज के लिए गर्व का विषय है और इससे समाज के लोगों की आवाज को मजबूती मिलेगी। उन्होंने विश्वास जताया कि मुख्यमंत्री धामी के नेतृत्व में प्रदेश सरकार आगे भी इसी तरह सभी वर्गों के हित में कार्य करती रहेगी।इस दौरान समाज के वरिष्ठ नेता कल्लू चरन, राकेश वाल्मीकि, श्याम बाबू, मैकिल, धीरज लाल, मुकेश कुमार, रमेश वाल्मीकि, ईशा चरन, छत्रपाल सिंह पप्पू लाल, राजेंद्र कुमार, जॉनी वाल्मीकि, अरुन वाल्मीकि, विवेक कुमार, अंकित कुमार, राजू वाल्मीकि, संजू वाल्मीकि, नरेश कुमार, शिवम कुमार, राजीव वाल्मीकि, संदीप धानुक, मोंटी वाल्मीकि, सौरभ कुमार, अक्षय रावत, जेकब सिंह समेत बड़ी संख्या में वाल्मीकि समाज के लोग एवं स्थानीय कार्यकर्ता उपस्थित थे।जिलाधिकारी नितिन सिंह भदौरिया की अध्यक्षता में जिला सभागार में जनपद में मातृ मृत्यु दर की स्थिति को लेकर महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक आयोजित हुई। बैठक में स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के साथ मातृ मृत्यु के कारणों और भविष्य में रोकथाम के उपायों पर विस्तृत चर्चा की गई।जिलाधिकारी ने स्वास्थ्य विभाग को कड़े निर्देश देते हुए कहा कि हाई-रिस्क प्रेगनेंसी वाले मामलों की पहचान कर उनकी विशेष निगरानी सुनिश्चित की जाए। उन्होने कहा कि आशा एवं एएनएम के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में गर्भवती महिलाओं के पंजीकरण एवं नियमित जांच में किसी प्रकार की ढिलाई न बरती जाए। प्रसव के दौरान रेफरल सिस्टम को और अधिक सुदृढ़ एवं प्रभावी बनाया जाए, ताकि आपातकालीन स्थिति में समय की बचत हो सके। उन्होने निर्देश देतु हुए कहा कि जनपद में पंजीकृत ऐसे चिकित्सालयों को चिन्हित किया जाए जहाँ पंजीकृत चिकित्सकों की निगरानी में प्रसव नहीं कराए जा रहे हैं ऐसे संस्थानों पर स्वास्थ्य विभाग द्वारा समय-समय पर आकस्मिक निरीक्षण किया जाए तथा अनियमितता पाये जाने पर कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। उन्होने सख्त निर्देश देते हुए कहा कि गृह प्रसव कराने वाली दाइयों की भी सतत निगरानी रखी जाए। यदि कोई दाई अवैध रूप से प्रसव कराती हुई पाई जाती है, तो उसके विरुद्ध एफआईआर दर्ज करायी जाए। उन्होने कहा कि गर्भवती महिलाओं को यदि आशा कार्यकत्री प्राइवेट चिकित्सालयों में ले जाते हुए पायी जाती है तो सम्बन्धित आशा वर्कर के खिलाफ कार्यवाही भी सुनिश्चित की जाये। उन्होने कहा कि मातृ मृत्यु दर को कम करना सरकार की सर्वाेच्च प्राथमिकताओं में है इस दिशा में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ0 केके अग्रवाल ने बताया कि जनपद में अब तक कुल 18 मातृ मृत्यु के मामले सामने आए थे। जिसमे से 11 मामलों की विस्तृत समीक्षा पहले ही की जा चुकी है जबकि आज 7 नए मामलों की समीक्षा पूर्ण की गई। मृत्यु के कारणों का विश्लेषण अधिकारियों ने प्रत्येक केस की रिपोर्ट का बारीकी से अध्ययन किया। इसमें प्रसव के दौरान होने वाली जटिलताओं, एनीमिया (खून की कमी), तथा समय पर अस्पताल न पहुँचने जैसे कारणों पर गंभीर चर्चा हुई।शहर की पहचान और आध्यात्मिक ऊर्जा का नया केंद्र बनेगा शिव कॉरिडोरः विकास शर्मा
राज्य

थलीसैंण में बदली सोच की तस्वीर-स्वास्थ्य विभाग की मुहिम से सुरक्षित मातृत्व की ओर मजबूत कदम


पौड़ी/श्रीनगर गढ़वाल। पौड़ी जनपद के दुर्गम एवं पारंपरिक सोच वाले क्षेत्रों में अब स्वास्थ्य सेवाओं की नई किरण दिखाई देने लगी है। स्वास्थ्य विभाग द्वारा चलाया जा रहा संस्थागत प्रसव जागरूकता अभियान थलीसैंण विकासखंड में धीरे-धीरे सकारात्मक बदलाव की इबारत लिख रहा है। जहां कभी गृह प्रसव की परंपरा गहरी जड़ें जमाए हुए थी,वहीं अब विभागीय प्रयासों से सुरक्षित प्रसव की ओर लोगों का रुझान बढ़ने लगा है। थलीसैंण के उपकेंद्र बगेली क्षेत्र में एक गर्भवती महिला का प्रसव मई के प्रथम सप्ताह में संभावित था,लेकिन अचानक समय से पूर्व प्रसव पीड़ा शुरू हो गई। परिजनों ने परंपरागत तरीके से दाई को बुलाकर घर पर ही प्रसव की तैयारी कर ली थी। स्थिति की जानकारी मिलते ही आशा कार्यकर्त्री और सहायक नर्स प्रसूति (एएनएम) मौके पर पहुंचीं और परिजनों को संस्थागत प्रसव के लिए समझाने का प्रयास किया,लेकिन प्रारंभ में परिवार इसके लिए तैयार नहीं हुआ। ऐसे में प्रभारी चिकित्साधिकारी थलीसैंण डॉ.खुशबू खत्री ने तुरंत हस्तक्षेप करते हुए 108 एंबुलेंस सेवा को मौके पर भेजा और स्वयं फोन पर परिजनों से संवाद कर उन्हें अस्पताल ले जाने के लिए राजी किया। तत्पश्चात महिला को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पाबों पहुंचाया गया,जहां उसने एक स्वस्थ बेटी को जन्म दिया। जच्चा और बच्चा दोनों पूर्णतः स्वस्थ हैं। इसी अभियान का सकारात्मक प्रभाव एक अन्य मामले में भी देखने को मिला। उपकेंद्र डड़ोली में पंजीकृत एक गर्भवती महिला ने परिवारजनों के विरोध के बावजूद साहस दिखाते हुए स्वयं एएनएम को सूचना दी और अपनी चार वर्ष की बेटी के साथ उपकेंद्र पहुंच गई। स्थिति को देखते हुए 108 सेवा को सूचित किया गया,लेकिन प्रसव की संभावना अधिक होने के कारण महिला को उपकेंद्र पर ही रोका गया। वहां एएनएम और सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी (सीएचओ) की टीम ने सफलतापूर्वक प्रसव कराया और महिला ने एक स्वस्थ बच्ची को जन्म दिया। मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ.शिव मोहन शुक्ला के अनुसार अप्रैल माह में थलीसैंण विकासखंड में कुल 41 प्रसव हुए,जिनमें से 40 संस्थागत प्रसव कराए गए। यह आंकड़ा इस बात का प्रमाण है कि कठिन परिस्थितियों और सामाजिक चुनौतियों के बावजूद स्वास्थ्य विभाग की मुहिम प्रभावी साबित हो रही है। चुनौतियां अब भी बरकरार हालांकि थलीसैंण क्षेत्र में संस्थागत प्रसव को बढ़ावा देना अभी भी एक चुनौती बना हुआ है। यहां आज भी कई परिवार पारंपरिक गृह प्रसव को प्राथमिकता देते हैं। स्वास्थ्य कर्मियों को कई बार गर्भवती महिलाओं के परिजनों की ओर से विरोध और अभद्र व्यवहार का सामना भी करना पड़ता है। इसके बावजूद स्वास्थ्य विभाग की टीम निरंतर समर्पण के साथ कार्य कर रही है और लक्ष्य है कि क्षेत्र में शत-प्रतिशत सुरक्षित संस्थागत प्रसव सुनिश्चित किया जाए। आगे की रणनीति मुख्य चिकित्साधिकारी ने स्पष्ट किया कि यदि आवश्यकता पड़ी तो जनप्रतिनिधियों और प्रशासन का सहयोग लेकर इस अभियान को और अधिक सशक्त बनाया जाएगा,ताकि हर गर्भवती महिला को सुरक्षित मातृत्व का अधिकार मिल सके। थलीसैंण में स्वास्थ्य विभाग की यह पहल केवल एक अभियान नहीं,बल्कि जीवन बचाने और भविष्य संवारने का मिशन बन चुकी है। जागरूकता,तत्परता और समर्पण के इस त्रिवेणी प्रयास ने यह सिद्ध कर दिया है कि यदि इच्छाशक्ति मजबूत हो,तो दुर्गम क्षेत्र भी बदलाव की नई कहानी लिख सकते हैं। सुरक्षित मां,स्वस्थ शिशु यही है सशक्त समाज की पहचान।

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