गढ़वाल विश्वविद्यालय के विकास को नई गति देने की पहल,केंद्रीय शिक्षा मंत्री के समक्ष उठी 459 करोड़ की अवसंरचना परियोजना

देहरादून/श्रीनगर गढ़वाल। हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल केंद्रीय विश्वविद्यालय के शैक्षणिक एवं अनुसंधान ढांचे को राष्ट्रीय स्तर के अनुरूप विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल करते हुए उत्तराखंड के कैबिनेट मंत्री एवं उच्च शिक्षा मंत्री डॉ.धन सिंह रावत ने नई दिल्ली में केंद्रीय शिक्षा मंत्री प्रहलाद जोशी से शिष्टाचार भेंट कर उच्च शिक्षा से जुड़े विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से चर्चा की। इस दौरान गढ़वाल केंद्रीय विश्वविद्यालय में उच्च शिक्षा वित्तपोषण अभिकरण (हायर एजुकेशन फाइनेंसिंग एजेंसी) के अंतर्गत लगभग 459 करोड़ 9 लाख 50 हजार रुपये की लागत से प्रस्तावित शैक्षणिक एवं अनुसंधान अवसंरचना विकास परियोजना को लेकर भी विस्तृत विचार-विमर्श किया गया। बैठक में विश्वविद्यालय के शैक्षणिक विस्तार,आधुनिक शिक्षण सुविधाओं,अनुसंधान प्रयोगशालाओं,नवाचार केंद्रों,छात्र सुविधाओं तथा भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप आधारभूत संरचना को सुदृढ़ बनाने पर विशेष चर्चा हुई। प्रस्तावित परियोजना के क्रियान्वयन से विश्वविद्यालय को आधुनिक संसाधनों से सुसज्जित करने के साथ-साथ राष्ट्रीय स्तर पर गुणवत्तापूर्ण शिक्षा एवं शोध को नई दिशा मिलने की उम्मीद जताई गई। इस महत्वपूर्ण पहल पर हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल केंद्रीय विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो.श्रीप्रकाश सिंह ने विश्वविद्यालय परिवार की ओर से कैबिनेट मंत्री डॉ.धन सिंह रावत का हार्दिक आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय के विकास से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों को केंद्र सरकार के समक्ष प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करना तथा विश्वविद्यालय के हितों के लिए निरंतर प्रयास करना अत्यंत सराहनीय है। कुलपति ने विश्वास व्यक्त किया कि केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय के सहयोग और उत्तराखंड सरकार के सकारात्मक प्रयासों से यह महत्वाकांक्षी परियोजना शीघ्र धरातल पर उतरेगी। इसके पूर्ण होने के बाद विश्वविद्यालय में आधुनिक शिक्षण व्यवस्था,उच्च स्तरीय अनुसंधान सुविधाएं,नवाचार एवं तकनीकी विकास को नई गति मिलेगी, जिससे गढ़वाल केंद्रीय विश्वविद्यालय राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी विशिष्ट पहचान और अधिक मजबूत करेगा। उन्होंने कहा कि यह परियोजना केवल आधारभूत ढांचे के विकास तक सीमित नहीं रहेगी,बल्कि विद्यार्थियों,शोधार्थियों और शिक्षकों के लिए आधुनिक शैक्षणिक वातावरण तैयार करने में भी मील का पत्थर साबित होगी। इससे विश्वविद्यालय में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा,अनुसंधान और नवाचार को बढ़ावा मिलेगा तथा उत्तराखंड के युवाओं को अपने प्रदेश में ही बेहतर शैक्षणिक सुविधाएं उपलब्ध हो सकेंगी।
