जनक दरबार में गूंजी पुरानी पेंशन बहाली की गुहार-2 नवंबर को मुख्यमंत्री आवास घेरेंगे कार्मिक,मांग पूरी न हुई तो भूख हड़ताल की चेतावनी

 

पौड़ी/श्रीनगर गढ़वाल। पुरानी पेंशन बहाली की मांग को लेकर उत्तराखंड में कार्मिकों का आंदोलन लगातार तेज होता जा रहा है। राष्ट्रीय पुरानी पेंशन बहाली संयुक्त मोर्चा के प्रदेश महासचिव सीताराम पोखरियाल ने सीता स्वयंवर के अवसर पर आयोजित जनक दरबार में पुरानी पेंशन बहाली का मुद्दा उठाते हुए महाराज जनक के समक्ष प्रदेश के शिक्षक-कर्मचारियों और अधिकारियों की पीड़ा रखी। उन्होंने कार्मिकों के सुरक्षित भविष्य, सामाजिक सुरक्षा और सेवानिवृत्ति के बाद सम्मानजनक जीवन की मांग करते हुए सरकार से इस विषय पर गंभीरता से विचार करने की अपील की। जनक दरबार में अपनी बात रखते हुए सीताराम पोखरियाल ने कहा कि जनक दरबार न्याय,मर्यादा और जनभावनाओं के सम्मान का प्रतीक है। इसी विश्वास के साथ वे उन हजारों कार्मिकों की आवाज लेकर पहुंचे हैं,जो अपने जीवन के बहुमूल्य वर्ष देश और प्रदेश की सेवा में समर्पित कर देते हैं। उन्होंने कहा कि जीवनभर सेवा करने वाले कर्मचारियों को सेवानिवृत्ति के बाद आर्थिक सुरक्षा और सम्मानजनक जीवन की चिंता से मुक्त होना चाहिए। उन्होंने भावपूर्ण शब्दों में कहा महाराज जनक हम आपके न्यायप्रिय दरबार में न्याय की उम्मीद लेकर आए हैं। हम कोई खैरात नहीं मांग रहे,बल्कि जीवनभर की सेवा के बाद सम्मानपूर्वक जीवन जीने का अधिकार और बुढ़ापे की सामाजिक सुरक्षा मांग रहे हैं। हमारी फरियाद है कि पुरानी पेंशन बहाल की जाए,ताकि कर्मचारियों और उनके परिवारों का भविष्य सुरक्षित हो सके। सीताराम पोखरियाल ने कहा कि राष्ट्रीय पुरानी पेंशन बहाली संयुक्त मोर्चा पिछले कई वर्षों से पुरानी पेंशन बहाली की मांग को लेकर निरंतर संघर्ष कर रहा है। संगठन ने धरना-प्रदर्शन,रैलियों,ज्ञापन अभियानों और जनजागरण कार्यक्रमों के माध्यम से इस मुद्दे को प्रदेशभर में उठाया है। उन्होंने कहा कि संगठन का उद्देश्य केवल विरोध दर्ज कराना नहीं है,बल्कि कार्मिकों को उनके भविष्य से जुड़े विषय पर जागरूक करना,विभिन्न विभागों के कर्मचारियों को एकजुट करना और समाज के बीच पुरानी पेंशन के महत्व को पहुंचाना भी है। संगठन का मानना है कि सेवानिवृत्ति के बाद आर्थिक स्थिरता और सामाजिक सुरक्षा का प्रश्न प्रत्येक कर्मचारी तथा उसके परिवार के जीवन से सीधे जुड़ा हुआ है। पुरानी पेंशन बहाली की मांग को लेकर राष्ट्रीय पुरानी पेंशन बहाली संयुक्त मोर्चा ने वर्ष 2026 में विभिन्न जनपदों में कई कार्यक्रम आयोजित किए। संगठन की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार 12 अप्रैल को देहरादून में बाइक रैली,1 मई को पौड़ी में आयुक्त कार्यालय घेराव,24 मई को कर्णप्रयाग में रैली तथा 12 जून को अल्मोड़ा में गोल्ज्यू देवता यात्रा के साथ पुरानी पेंशन जनजागरण पदयात्रा आयोजित की गई। इसके अतिरिक्त 22 जून को सचिवालय घेराव,12 जुलाई को पुरानी पेंशन के लिए एक पौधा नाम से रचनात्मक अभियान और 4 अगस्त को प्रदेशस्तरीय बैठक आयोजित की गई। आंदोलन को व्यापक स्वरूप देने के उद्देश्य से 7 से 19 सितंबर तक काली पट्टी धारण कर जनजागरण और विभागवार द्वार सभाओं का अभियान चलाया गया। 21 से 24 सितंबर तक प्रदेश सरकार के मंत्रियों तक ज्ञापन पहुंचाने का प्रयास किया गया। वहीं 25 सितंबर को जिला एवं तहसील स्तर पर धरना-प्रदर्शन और ज्ञापन कार्यक्रम का आह्वान किया गया। इसके बाद 1 अक्टूबर को रुद्रप्रयाग में भी पुरानी पेंशन बहाली की मांग को लेकर कार्यक्रम आयोजित किया गया। संगठन के अनुसार इन सभी कार्यक्रमों का उद्देश्य सरकार का ध्यान कार्मिकों की मांग की ओर आकर्षित करना और पुरानी पेंशन बहाली के आंदोलन को प्रदेशव्यापी स्वरूप देना रहा है। सीताराम पोखरियाल ने कहा कि लंबे समय से आंदोलन और जनजागरण अभियान चलाए जाने के बावजूद पुरानी पेंशन बहाली को लेकर ठोस निर्णय नहीं होने से कार्मिकों में निराशा बनी हुई है। उन्होंने कहा कि शिक्षक,कर्मचारी और अधिकारी अपने सेवाकाल के दौरान विभिन्न विभागों में जिम्मेदारियों का निर्वहन करते हुए जनहित और सरकारी व्यवस्थाओं को सुचारु बनाए रखने में योगदान देते हैं। ऐसे में सेवानिवृत्ति के बाद उनकी आर्थिक सुरक्षा और सम्मानजनक जीवन का प्रश्न भी गंभीरता से लिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि पुरानी पेंशन बहाली की मांग को केवल कर्मचारी संगठन के आंदोलन के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए,बल्कि इसे कार्मिकों और उनके परिवारों के भविष्य तथा सामाजिक सुरक्षा से जुड़े महत्वपूर्ण विषय के रूप में समझने की आवश्यकता है। उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि कार्मिकों की मांग पर सकारात्मक पहल करते हुए ऐसा समाधान निकाला जाए,जिससे उनके मन में भविष्य को लेकर बनी अनिश्चितता दूर हो सके। लगातार प्रयासों के बावजूद मांग पूरी नहीं होने पर राष्ट्रीय पुरानी पेंशन बहाली संयुक्त मोर्चा ने आंदोलन को और तेज करने का निर्णय लिया है। इसी क्रम में 2 नवंबर 2026 को मुख्यमंत्री आवास घेराव कार्यक्रम प्रस्तावित है। प्रदेश महासचिव सीताराम पोखरियाल ने उत्तराखंड के समस्त शिक्षक,कर्मचारी,अधिकारी और विभिन्न विभागों में कार्यरत कार्मिकों से इस कार्यक्रम में एकजुट होकर भाग लेने की अपील की है। उन्होंने कहा कि पुरानी पेंशन बहाली का मुद्दा कार्मिकों के भविष्य और सामाजिक सुरक्षा से जुड़ा है,इसलिए इस मांग को मजबूती से सरकार के समक्ष रखने के लिए व्यापक भागीदारी आवश्यक है। संगठन ने चेतावनी दी है कि यदि मुख्यमंत्री आवास घेराव के बाद भी मांग पर कोई ठोस निर्णय नहीं लिया जाता है,तो आंदोलन के अगले चरण में भूख हड़ताल शुरू की जाएगी। आगामी आंदोलन की रूपरेखा संगठन के निर्णय के अनुसार तय की जाएगी। सभी 13 जनपदों में प्रचार-प्रसार तेज 2 नवंबर के प्रस्तावित कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए संगठन की ओर से उत्तराखंड के सभी 13 जनपदों में व्यापक प्रचार-प्रसार और जनजागरण अभियान चलाया जा रहा है। संगठन के पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता विभिन्न विभागों और कार्यालयों में पहुंचकर कार्मिकों से संपर्क कर रहे हैं तथा अधिक से अधिक भागीदारी सुनिश्चित करने का प्रयास कर रहे हैं। सीताराम पोखरियाल ने कहा कि यह समय आपसी मतभेदों से ऊपर उठकर अपने भविष्य और सामाजिक सुरक्षा से जुड़े विषय पर एकजुट होने का है। उन्होंने सभी कार्मिकों से अपील की कि वे 2 नवंबर को मुख्यमंत्री आवास घेराव कार्यक्रम में भाग लेकर अपनी मांग को लोकतांत्रिक और शांतिपूर्ण तरीके से मजबूती से उठाएं। उन्होंने स्पष्ट किया कि पुरानी पेंशन बहाली की मांग पर ठोस निर्णय होने तक संगठन जनजागरण,रचनात्मक गतिविधियों और लोकतांत्रिक आंदोलन के माध्यम से अपनी आवाज उठाता रहेगा। संगठन का आह्वान-पुरानी पेंशन बहाल करो-कार्मिकों का भविष्य सुरक्षित करो। 2 नवंबर 2026 को मुख्यमंत्री आवास घेराव। एकजुट कार्मिक,बुलंद आवाज-पुरानी पेंशन हमारा अधिकार।