Thursday 30/ 04/ 2026 

Bharat Najariya
रुद्रपुर में स्पा सेंटर पर छापा, देह व्यापार का भंडाफोड़ ‘खबर पड़ताल’ के नाम पर चल रहे फर्जी फेसबुक पेज पर भी उठे सवालरूद्रपुर में पैथोलॉजी कलेक्शन सेंटरों की बढ़ती संख्या पर सवाल, जांच व्यवस्था मजबूत करने की मांगरुद्रपुर शहर में तेजी से बढ़ते पैथोलॉजी लैब और कलेक्शन सेंटर अब जनस्वास्थ्य के दृष्टिकोण से चिंता का विषय बनते जा रहे हैं। हाल के दिनों में सामने आए एक मामले ने जांच की गुणवत्ता और विश्वसनीयता को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।प्राप्त जानकारी के अनुसार आवास विकास क्षेत्र में रहने वाले एक व्यक्ति ने पास के एक कलेक्शन सेंटर से ब्लड सैंपल की जांच कराई। रिपोर्ट मिलने के बाद जब उन्होंने डॉक्टर को दिखाया तो रिपोर्ट की विश्वसनीयता पर संदेह जताया गया और पुनः जांच कराने की सलाह दी गई। इसके बाद व्यक्ति ने दूसरे मान्यता प्राप्त लैब, Dr. Lal PathLabs में परीक्षण कराया, जहां दोनों रिपोर्टों में स्पष्ट अंतर सामने आया।इस अनुभव ने न केवल संबंधित व्यक्ति को मानसिक रूप से परेशान किया बल्कि यह भी संकेत दिया कि जांच की गुणवत्ता और मानकों का पालन हर जगह समान रूप से नहीं हो रहा है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि पैथोलॉजी जांच उपचार की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है, ऐसे में रिपोर्ट की शुद्धता अत्यंत आवश्यक है।शहर में बड़ी संख्या में कलेक्शन सेंटर खुलने से सुविधा तो बढ़ी है, लेकिन साथ ही प्रशिक्षित स्टाफ, मानक उपकरण और गुणवत्ता नियंत्रण जैसे पहलुओं पर भी बराबर ध्यान देना जरूरी हो गया है। स्वास्थ्य से जुड़े कार्यों में किसी भी प्रकार की लापरवाही गंभीर परिणाम ला सकती है, इसलिए नियामक संस्थाओं द्वारा समय-समय पर निरीक्षण और सत्यापन अत्यंत आवश्यक माना जा रहा है।इस प्रकार की घटनाएं यह संकेत देती हैं कि आमजन को भी जांच करवाते समय सावधानी बरतनी चाहिए और केवल प्रमाणित तथा विश्वसनीय संस्थानों का ही चयन करना चाहिए। साथ ही संबंधित विभागों से अपेक्षा की जा रही है कि वे मानकों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करें, ताकि लोगों का विश्वास और सुरक्षा दोनों कायम रह सकेजागरूकता ही सुरक्षा है सही जांच सही उपचार की पहली शर्त हैसस्ती सुविधा के बजाय प्रमाणित गुणवत्ता को प्राथमिकता दें।रिपोर्ट पर संदेह हो तो दोबारा जांच कराने में संकोच न करेंस्वास्थ्य के मामले में लापरवाही नहीं सतर्कता ही सबसे बड़ा बचाव है।जेसीज पब्लिक स्कूल में हिंदुस्तान ओलंपियाड 2025 का डीएम ने किया शुभारंभहोटल बन चुके होमस्टे पर डीएम का डंडा, 17 पंजीकरण निरस्तपर्यटन वेबसाइट से हटाने की प्रक्रिया शुरू, अवैध संचालन पर सख्त कार्रवाई जारीदेहरादून, 29 अप्रैल। जनपद में कानून व्यवस्था सुदृढ़ करने और आमजन की सुरक्षा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से जिला प्रशासन ने होमस्टे संचालन पर बड़ा एक्शन लिया है। जिलाधिकारी सविन बंसल के निर्देश पर हुई गहन जांच में मानकों का उल्लंघन पाए जाने पर प्रथम चरण में 17 होमस्टे के पंजीकरण निरस्त कर दिए गए हैं। साथ ही इन्हें पर्यटन विभाग की वेबसाइट से विलोपित करने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है।जिला प्रशासन ने “ऑपरेशन सफाई” चलाते हुए महज सात दिनों में मजिस्ट्रेट स्तर की पांच टीमें गठित कर जांच अभियान चलाया। जांच में सामने आया कि कई होमस्टे होटल की तरह संचालित किए जा रहे थे, जहां नियम विरुद्ध बार संचालन, तेज आवाज में डीजे और देर रात तक पार्टियां आयोजित हो रही थीं। इन स्थानों पर नशे और अन्य गैरकानूनी गतिविधियों के अड्डे बनने की शिकायतें भी मिलीं, जिससे आमजन की सुरक्षा पर खतरा उत्पन्न हो रहा था।जिलाधिकारी ने स्पष्ट कहा कि कानून से ऊपर कोई नहीं है और आमजन की जान से खिलवाड़ किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि होमस्टे योजना का उद्देश्य स्थानीय संस्कृति को बढ़ावा देना और लोगों की आय में वृद्धि करना है, न कि इसे व्यावसायिक होटल में बदलना।जांच के दौरान कई गंभीर अनियमितताएं सामने आईं। कई होमस्टे में रसोई की व्यवस्था नहीं थी, अग्निशमन उपकरण या तो उपलब्ध नहीं थे या उनकी वैधता समाप्त हो चुकी थी। कई स्थानों पर फूड लाइसेंस नहीं पाया गया। निर्धारित क्षमता से अधिक कमरे संचालित किए जा रहे थे और कुछ इकाइयां लीज या किराये पर चलाई जा रही थीं, जो नियमों के विपरीत है। विदेशी नागरिकों के ठहराव की अनिवार्य सूचना भी कई जगह उपलब्ध नहीं कराई गई।प्रशासन ने पाया कि कुछ होमस्टे बारात घर और अन्य व्यावसायिक गतिविधियों के लिए उपयोग किए जा रहे थे, जबकि कई स्थानों पर स्वामी का निवास ही नहीं था। मसूरी और शहरी क्षेत्रों में स्वामित्व परिवर्तन और नवीनीकरण न कराने के मामले भी सामने आए हैं।जिलाधिकारी ने निर्देश दिए हैं कि सभी होमस्टे संचालक नियमावली का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करें। भविष्य में भी यह अभियान जारी रहेगा और किसी भी प्रकार की अनियमितता पाए जाने पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।————————————++++▢ सवालों के घेरे में रुद्रपुर की व्यवस्थाएंदेहरादून में कार्रवाई के बाद अब सवाल उठने लगे हैं कि रुद्रपुर में बिना मानकों के संचालित पेइंग गेस्ट हाउस, गेस्ट हाउस और होटल पर कब कार्रवाई होगी। शहर में लंबे समय से बिना पंजीकरण, बिना अग्निशमन व्यवस्था और बिना आवश्यक लाइसेंस के कई प्रतिष्ठान संचालित होने की शिकायतें मिलती रही हैं।स्थानीय लोगों का कहना है कि कई स्थानों पर नियमों को ताक पर रखकर बाहरी व्यक्तियों को ठहराया जा रहा है, जिससे कानून व्यवस्था और सुरक्षा दोनों पर खतरा बढ़ रहा है।अब देखना यह होगा कि क्या जिला प्रशासन रुद्रपुर में भी देहरादून जैसी सख्त कार्रवाई करते हुए अवैध संचालन पर लगाम लगाता है या फिर ये व्यवस्थाएं यूं ही चलती रहेंगी।सितारगंज में मानसिक गणना का महाकुंभ: 500+ प्रतिभागियों के बीच मुदित राठी बने “चैंपियन ऑफ चैंपियंस”।काशीपुर में शिक्षक गरिमा शिविर संपन्न, भारतीय संस्कृति ज्ञान परीक्षा पर हुआ मंथनकाशीपुर। अखिल विश्व गायत्री परिवार, शांतिकुंज हरिद्वार के तत्वावधान में संचालित भारतीय संस्कृति ज्ञान परीक्षा, जनपद उधम सिंह नगर का शिक्षक गरिमा शिविर काशीपुर स्थित ब्लॉक संसाधन केंद्र के सभागार में संपन्न हुआ। शिविर में काशीपुर, जसपुर एवं रुद्रपुर से गायत्री परिवार के सदस्य एवं शिक्षकगण उत्साहपूर्वक शामिल हुए।कार्यक्रम में जसपुर से दिग्विजय सिंह, रुद्रपुर से ओमवीर सिंह, नमो नारायण, सोमपाल तथा काशीपुर से राजीव झा, सर्वेश रस्तोगी, महिपाल जी सहित कात्यानी महिला मंडल की बहनों की सहभागिता रही। इसके अतिरिक्त हल्दुचौड़ से बसंत पांडे भी उपस्थित रहे।शांतिकुंज हरिद्वार से आई टोली ने कार्यक्रम का संचालन एवं मार्गदर्शन किया। मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित प्रोफेसर प्रमोद भटनागर ने शिक्षकों को भारतीय संस्कृति ज्ञान परीक्षा के महत्व एवं उद्देश्य पर विस्तार से प्रकाश डाला। वहीं, भारतीय संस्कृति ज्ञान परीक्षा प्रकोष्ठ शांतिकुंज के सी.डी. थपलियाल ने भी अपने विचार व्यक्त करते हुए परीक्षा की उपयोगिता पर जोर दिया।कार्यक्रम का संचालन प्रदेश सह-संयोजक पुष्पा जी ने किया, जबकि धन्यवाद प्रस्ताव जिला संयोजक यशवंत सिंह द्वारा प्रस्तुत किया गया। यह आयोजन जिला इकाई, भारतीय संस्कृति ज्ञान परीक्षा उधम सिंह नगर द्वारा संपन्न कराया गया।शिविर का आयोजन दिव्य एवं भव्य रहा, जिसकी उपस्थित सभी लोगों ने सराहना करते हुए आयोजकों की भूरी-भूरी प्रशंसा की।खानपुर न.1 मे आयोजित अखण्ड नाम सकीर्तन मे शामिल हुऐ विधायक शिव अरोरालोहाघाट में पेयजल के लिए मचा हाहाकार 4 से 5 दिन में मिल रहा है पानी।शिवनगर में सजेगा बाबा श्याम का भव्य दरबार, दो मई को होगा संकीर्तन महोत्सवएक मई को फुटबॉल ग्राउंड से निकलेगी भव्य निशान यात्रा

भारत में कैटरैक्ट दो तिहाई ब्लाइंडनेस मामलों का कारण, मिथकों के चलते लोग टालते हैं सर्जरी

जून 2025: भारत में कैटरैक्ट बुजुर्गों में रोके जा सकने वाले ब्लाइंडनेस का एक प्रमुख कारण बना हुआ है। जून माह में मनाए जा रहे कैटरैक्ट जागरूकता माह के अवसर पर सेंटर फॉर साइट ग्रुप ऑफ हॉस्पिटल्स ने समय पर कैटरैक्ट का निदान और इलाज करवाने की आवश्यकता पर ज़ोर दिया ताकि इस रोके जा सकने वाले ब्लाइंडनेस से बचा जा सके।

कैटरैक्ट एक ऐसी स्थिति है जिसमें आंख का प्राकृतिक लेंस धुंधला हो जाता है, जिससे दृष्टि धुंधली हो जाती है और पढ़ने, गाड़ी चलाने या चेहरों को पहचानने में कठिनाई होती है। यदि समय पर इलाज न हो तो यह पूरी तरह ब्लाइंडनेस का कारण बन सकता है। आमतौर पर यह उम्र बढ़ने के साथ जुड़ा होता है लेकिन यह मधुमेह, आंख में चोट, स्टेरॉयड का लंबे समय तक उपयोग या अत्यधिक यूवी किरणों के संपर्क में आने से भी हो सकता है। दुर्भाग्य से भारत में कई लोग कैटरैक्ट का इलाज मिथकों और जागरूकता की कमी के कारण देर से कराते हैं।

कैटरैक्ट से जुड़े भ्रमों को दूर करते हुए सेंटर फॉर साइट ग्रुप ऑफ आई हॉस्पिटल्स के चेयरमैन एवं मेडिकल डायरेक्टर डॉ. महिपाल सिंह सचदेव ने कहा, “कैटरैक्ट भारत में ब्लाइंडनेस का प्रमुख कारण है और यह 66% से अधिक मामलों के लिए जिम्मेदार है। इसके बावजूद कई लोग मिथकों और अनावश्यक डर की वजह से सर्जरी कराने में देरी करते हैं। यह ज़रूरी है कि लोग तथ्यों को जानें और सही समय पर निर्णय लें। एक आम भ्रम यह है कि कैटरैक्ट केवल बुजुर्गों को होता है, जबकि यह मधुमेह, स्टेरॉयड के उपयोग, यूवी किरणों के संपर्क, चोट और यहां तक कि बच्चों में भी हो सकता है। दूसरा भ्रम यह है कि कैटरैक्ट आंखों की दवा, खानपान या व्यायाम से ठीक हो सकता है, जबकि वैज्ञानिक साक्ष्य बताते हैं कि इसका एकमात्र प्रभावी इलाज सर्जरी है।”

डॉ. महिपाल ने यह भी कहा कि “दृष्टि के अत्यधिक बिगड़ने तक सर्जरी का इंतजार करना गलत है। जल्दी सर्जरी कराने से बेहतर नतीजे और जल्दी स्वस्थ होने में मदद मिलती है। आज की आधुनिक तकनीक से कैटरैक्ट की सर्जरी बेहद सुरक्षित है, यह स्थानीय एनेस्थीसिया के तहत होती है और दर्द रहित होने के साथ ही तेजी से ठीक होती है। आजकल की उन्नत इंट्राओक्युलर लेंस (IOL) तकनीक, जैसे एक्सटेंडेड डेप्थ-ऑफ-फोकस (EDOF) लेंस, दूर और पास दोनों की दृष्टि में सुधार करती है और चश्मे पर निर्भरता को काफी हद तक कम कर देती है।“

सेंटर फॉर साइट ने अत्याधुनिक फेमटो लेजर-असिस्टेड कैटरैक्ट सर्जरी (FLACS) शुरू की है, जो ब्लेडलेस, कंप्यूटर-गाइडेड सर्जरी है और असाधारण सटीकता प्रदान करती है। इससे सर्जरी में हाथ से किए जाने वाले काम को कम किया जाता है, इलाज के बाद जल्दी आराम मिलता है और परिणाम और बेहतर होते हैं। साथ ही, मल्टीफोकल, टोरिक और एक्सटेंडेड डेप्थ-ऑफ-फोकस जैसे नवीनतम प्रीमियम लेंस लगाए जाते हैं जिससे मरीजों को चश्मे की जरूरत नहीं पड़ती।

सेंटर फॉर साइट अत्याधुनिक डायग्नोस्टिक तकनीकों जैसे ऑप्टिकल बायोमेट्री और इमेज-गाइडेड सिस्टम का उपयोग करता है ताकि हर मरीज की आंख की प्रोफाइल के अनुसार व्यक्तिगत इलाज योजना बनाई जा सके और बेहतरीन देखभाल दी जा सके।
उन्नत उपचार के अलावा, यह अस्पताल समूह सामुदायिक जागरूकता कार्यक्रमों, मुफ्त नेत्र जांच शिविरों और एनजीओ के साथ मिलकर ग्रामीण व पिछड़े इलाकों में जरूरतमंद लोगों तक सेवाएं पहुंचा रहा है। हजारों मरीजों, विशेष रूप से ग्रामीण इलाकों के बुजुर्गों को समय पर जांच और किफायती अथवा मुफ्त सर्जरी का लाभ मिला है।

कैटरैक्ट मुक्त भारत के अपने दृष्टिकोण के साथ, सेंटर फॉर साइट चिकित्सा उत्कृष्टता और सामुदायिक सेवा के बीच की दूरी को भर रहा है। करुणामयी सेवा, नवाचार और जन-जागरूकता के मिश्रण से यह समूह देशभर में लाखों लोगों की दृष्टि लौटाने और जीवन की गुणवत्ता सुधारने में लगातार योगदान दे रहा है।