एआई टूल्स से एजुकेशन, रिसर्चऔर इंडस्ट्रीज़ में नई संभावनाएं

एफओई और सीसीएसआईटी में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एवम् जनरेटिव एआई पर पांच दिनी एफ़डीपी में गुरुग्राम के एडुनेट फ़ाउंडेशन के एक्सपर्ट ट्रेनर्स श्री अमन श्रीवास्तव और सुश्री दृष्टि ने की शिरकत
एडुनेट फ़ाउंडेशन, गुरुग्राम के एक्सपर्ट ट्रेनर श्री अमन श्रीवास्तव कहा, कृत्रिम बुद्धिमत्ता केवल एक तकनीकी उपकरण नहीं है, बल्कि यह कार्य संस्कृति और ज्ञान व्यवस्था को पूरी तरह बदलने वाली भावी शक्ति है। उन्होंने बताया, एआई आधारित उपकरणों के माध्यम से शिक्षा, शोध और उद्योग के अनेक क्षेत्रों में नई संभावनाएं विकसित हो रही हैं। एक्सपर्ट ट्रेनर सुश्री दृष्टि ने कहा, जनरेटिव एआई, बड़े भाषा मॉडल तथा एआई एजेंट जैसी तकनीकों के माध्यम से शिक्षण और अधिगम की प्रक्रिया को अधिक प्रभावी और रचनात्मक बनाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि यदि शिक्षक इन तकनीकों को समझकर उनका उपयोग करेंगे, तो वे स्टुडेंट्स के लिए अधिक रोचक और परिणामदायी शिक्षण वातावरण तैयार कर सकते हैं। ये एक्सपर्ट्स तीर्थंकर महावीर यूनिवर्सिटी, मुरादाबाद के फैकल्टी ऑफ इंजीनियरिंग- एफओई और कॉलेज ऑफ कम्प्यूटिंग साइंसेज़ एंड इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी- सीसीएसआईटी में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एवम् जनरेटिव एआई पर पांच दिनी एफ़डीपी में बोल रहे थे। इससे पूर्व मां सरस्वती के समक्ष दीप प्रज्जवलन के संग एफडीपी का शंखनाद हुआ। इस मौके पर गुरुग्राम के विशेषज्ञ प्रशिक्षक श्री अमन श्रीवास्तव और सुश्री दृष्टि, फैकल्टी ऑफ इंजीनियरिंग के डीन प्रो. राकेश कुमार द्विवेदी सीसीएसआईटी के एचओडी प्रो. शंभु भारद्वाज, डॉ. रूपल गुप्ता, श्री हरजिंदर सिंह, श्री अजय चक्रवर्ती आदि मौजूद रहे।
एफओई के डीन प्रो. राकेश कुमार द्विवेदी ने कहा, वर्तमान समय में एआई शिक्षा, अनुसंधान और उद्योग के क्षेत्र में तीव्र परिवर्तन ला रही है। शिक्षकों के लिए यह अत्यंत आवश्यक हो गया है कि वे नई डिजिटल तकनीकों को समझें और उन्हें अपनी शिक्षण प्रक्रिया में समाहित करें। टीएमयू का उद्देश्य केवल तकनीकी ज्ञान प्रदान करना नहीं है, बल्कि नवाचार, शोध तथा रचनात्मकता की संस्कृति को भी प्रोत्साहित करना है। एफ़डीपी में माइक्रोसॉफ्ट एलीवेट प्लेटफॉर्म के सहयोग से सभी फैकल्टीज़ को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, मशीन लर्निंग और जनरेटिव एआई जैसी उभरती हुई तकनीकों का सैद्धांतिक ज्ञान और व्यावहारिक कौशल प्रशिक्षण दिया गया। इस कार्यक्रम में प्रतिभागियों ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता, मशीन लर्निंग, जनरेटिव एआई, कंप्यूटर विज़न और स्वचालन जैसी अत्याधुनिक तकनीकों के बारे में व्यावहारिक ज्ञान प्राप्त किया। प्रशिक्षकों ने क्लाउड तकनीक की उपयोगिता, उसके विभिन्न मॉडल और आधुनिक डिजिटल प्रणालियों में उसकी भूमिका को विस्तार से स्पष्ट किया। जुपिटर नोटबुक के माध्यम से डेटा विश्लेषण और प्रयोगात्मक कार्यों की विधि भी समझाई गई। प्रशिक्षकों ने बताया कि मशीन लर्निंग में कंप्यूटर प्रणालियां डेटा के आधार पर स्वयं सीखने की क्षमता विकसित करती हैं। इसके बाद प्रतिभागियों को ईमेल प्रबंधन, एक्सेल विश्लेषण तथा प्रोग्रामिंग सहायता के लिए कोपायलट जैसे एआई उपकरणों के उपयोग का अभ्यास कराया गया। संचालन डॉ. रूपल गुप्ता ने किया।
