Wednesday 06/ 05/ 2026 

Bharat Najariya
तीन राज्यों की जीत पर भाजपाईयों ने भगत सिंह चौक पर मनाया जश्नपुरानी पेंशन बहाली पर आर-पार का ऐलान-2027 बनेगा निर्णायक रण,कर्मचारियों की हुंकार से गूंजा उत्तराखंडगढ़वाली अस्मिता का उत्सव-इन्कलाब आणु चा के विमोचन से श्रीनगर में गूंजे शब्दों के स्वरमसूरी में जाम से बेहाल लोग, सड़क किनारे खड़े वाहनों ने रोकी रफ्तार, पुलिस व्यवस्था पर उठे सवाल पर्यटन सीजन के बीच मसूरी में रविवार को भी लोगों को जाम से राहत नहीं मिल सकी। शहर की यातायात व्यवस्था पूरी तरह चरमराई नजर आई और प्रशासन के तमाम दावे धरातल पर फेल होते दिखाई दिए। रात करीब नौ बजे मसूरी-देहरादून मार्ग पर लाइब्रेरी बस स्टैंड के नीचे सड़क किनारे खड़े वाहनों के कारण लंबा जाम लग गया, जिससे रोडवेज बस समेत कई वाहन घंटों फंसे रहे।स्थिति इतनी खराब हो गई कि दोनों ओर वाहनों की लंबी कतार लग गई और लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा। स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रशासन एक ओर सड़क किनारे वाहन खड़े करने वालों के खिलाफ कार्रवाई का दावा कर रहा है, वहीं दूसरी ओर राष्ट्रीय राजमार्ग पर खुलेआम वाहन खड़े किए जा रहे हैं और कोई रोक-टोक नहीं दिखाई दे रही।प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार सड़क किनारे खड़ी कई गाड़ियां बाहरी राज्यों, खासकर हरियाणा नंबर की थीं। लोगों का आरोप है कि इन वाहनों को घंटों सड़क किनारे खड़ा रहने दिया जाता है, जिससे हर दिन जाम की स्थिति पैदा होती है। लोगों ने सवाल उठाया कि आखिर पुलिस और प्रशासन की मौजूदगी के बावजूद राष्ट्रीय राजमार्ग पर इस तरह अवैध पार्किंग कैसे हो रही है।स्थानीय नागरिकों ने पुलिस व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े किए। लोगों का आरोप है कि कुछ स्थानों पर कथित मिलीभगत और लापरवाही के कारण वाहन चालक बेखौफ होकर सड़क किनारे गाड़ियां खड़ी कर देते हैं। उनका कहना है कि यदि समय रहते सख्ती नहीं की गई तो पर्यटन सीजन में हालात और बिगड़ सकते हैं।व्यापारियों और स्थानीय लोगों ने कहा कि लगातार लग रहे जाम का सीधा असर मसूरी के पर्यटन कारोबार पर पड़ रहा है। पर्यटक घंटों जाम में फंसकर परेशान हो रहे हैं, जिससे शहर की छवि खराब हो रही है। लोगों ने मांग की कि राष्ट्रीय राजमार्ग और प्रमुख मार्गों पर सड़क किनारे पार्किंग पूरी तरह प्रतिबंधित की जाए और नियम तोड़ने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।स्थानीय लोगों का कहना है कि मसूरी में हर साल पर्यटन सीजन के दौरान जाम की यही स्थिति बनती है, लेकिन प्रशासन केवल कागजी योजनाओं तक सीमित रहता है। उन्होंने मांग की कि ट्रैफिक प्रबंधन के लिए स्थायी योजना बनाई जाए, ताकि लोगों और पर्यटकों को राहत मिल सके।नो एंट्री’ पर बवाल: मसूरी माल रोड बैरियर पर पर्यटक दंपती और स्थानीय लोगों में मारपीट, चप्पल-घूंसे चले, देर रात तक कोतवाली में हंगामाएक घंटे तक सड़क पर खड़ी रही कार, लगा लंबा जाम; दोनों पक्षों पर कार्रवाई की तैयारी पर्यटन नगरी मसूरी में रविवार देर शाम माल रोड बैरियर पर उस समय भारी हंगामा खड़ा हो गया, जब दिल्ली से आए एक पर्यटक ने प्रतिबंधित समय में माल रोड के अंदर वाहन ले जाने की जिद पकड़ ली। मामूली कहासुनी देखते ही देखते सड़क पर खुलेआम मारपीट में बदल गई। पर्यटक दंपती और स्थानीय लोगों के बीच जमकर चप्पल, लात-घूंसे चले, जिससे मौके पर अफरा-तफरी मच गई। घटना के बाद क्षेत्र में भारी भीड़ जमा हो गई और पुलिस को हालात संभालने के लिए काफी मशक्कत करनी पड़ी।बंगाल-असम में भाजपा की जीत पर मसूरी में जश्न, मंत्री गणेश जोशी बोले— “मोदी मैजिक बरकरार”में पश्चिम बंगाल और असम में भाजपा की ऐतिहासिक जीत की खुशी मसूरी में भी देखने को मिली। सोमवार को मसूरी के माल रोड पर प्रदेश के कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी के नेतृत्व में भाजपा कार्यकर्ताओं और स्थानीय लोगों ने मिठाई बांटकर तथा आतिशबाजी कर जोरदार जश्न मनाया। इस दौरान कार्यकर्ताओं ने एक-दूसरे को मिठाई खिलाकर जीत की बधाई दी और भाजपा के समर्थन में नारेबाजी भी की।डीपीएस रुद्रपुर में कक्षा दसवीं के टॉपर्स का भव्य सम्मान समारोह, मेधावी विद्यार्थियों व शिक्षकों को चेक से किया गया सम्मानितडीपीएस रुद्रपुर में कक्षा दसवीं के टॉपर्स का भव्य सम्मान समारोह, मेधावी विद्यार्थियों व शिक्षकों को चेक से किया गया सम्मानितमसूरी में पार्किंग के नाम पर ‘लूट’! पर्यटकों से वसूले जा रहे मनमाने पैसे, प्रशासन पर उठे सवालमसूरी, 3 मई  पहाड़ों की रानी मसूरी में पर्यटन को बढ़ावा देने के बड़े-बड़े दावे किए जा रहे हैं, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही तस्वीर बयां कर रही है। पर्यटन सीजन शुरू होते ही शहर की पार्किंग व्यवस्था पूरी तरह सवालों के घेरे में आ गई है। सरकारी और निजी पार्किंग संचालकों पर पर्यटकों से मनमाने तरीके से वसूली करने के आरोप लग रहे हैं। हालत यह है कि एक रात की पार्किंग के नाम पर पर्यटकों से एक हजार से पद्रहा सौ रुपये तक वसूले जा रहे हैं, जबकि सुविधाओं के नाम पर अधिकांश पार्किंग स्थलों पर कुछ भी उपलब्ध नहीं है।शनिवार को भारी भीड़ के चलते मसूरी की लगभग सभी पार्किंग फुल रहीं। इसी का फायदा उठाकर कई पार्किंग संचालकों ने खुलेआम मनमानी शुरू कर दी। सबसे बड़ी बात यह रही कि मसूरी के किसी भी पार्किंग स्थलों पर न तो रेट लिस्ट चस्पा मिली और न ही किसी प्रकार की सरकारी गाइडलाइन दिखाई दी। ऐसे में पर्यटक मजबूरी में मनमाना शुल्क देने को विवश नजर आए।दिल्ली से आए पर्यटक संतोश यादव ने बताया कि माल रोड के पास पार्किग में वाहन खड़ा करने के लिए उनसे एक रात के एक हजार रुपये लिए गए। वहीं अन्य पर्यटकों ने आरोप लगाया कि कुछ निजी पार्किंग संचालकों ने बारह सौ रुपये तक वसूले और विरोध करने पर अभद्रता की गई। पर्यटकों का कहना है कि उनसे साफ कहा गया कि “अगर पैसे नहीं देने तो गाड़ी बाहर ले जाओ।”पर्यटकों ने सवाल उठाया कि जब मसूरी में पर्यटन को बढ़ावा देने की बात की जा रही है, तो पार्किंग जैसी मूलभूत सुविधा को लेकर कोई स्पष्ट व्यवस्था क्यों नहीं है। उनका कहना है कि हर पार्किंग स्थल के बाहर बड़े बोर्ड पर निर्धारित शुल्क, समय सीमा और शिकायत नंबर अनिवार्य रूप से प्रदर्शित होने चाहिए ताकि कोई भी संचालक मनमानी न कर सके।जांच में यह भी सामने आया कि कई पार्किंग स्थलों पर सीसीटीवी कैमरे तक नहीं लगे हैं। वहीं शौचालय, सुरक्षा व्यवस्था और आपातकालीन सुविधाओं का भी अभाव है। ऐसे में यदि किसी वाहन के साथ चोरी, दुर्घटना या अन्य घटना होती है तो पर्यटकों को मदद मिलना मुश्किल हो सकता है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि प्रशासन और पुलिस इस पूरे मामले को नजरअंदाज कर रहे हैं।मामले पर मसूरी के एसडीएम राहुल आनंद ने कहा कि प्रशासन ने पूरे मामले का संज्ञान लिया है। जल्द ही सभी सरकारी और निजी पार्किंग स्थलों का निरीक्षण किया जाएगा और वहां निर्धारित रेट लिस्ट अनिवार्य रूप से लगवाई जाएगी। साथ ही पार्किंग स्थलों पर एसडीएम, पुलिस और अन्य अधिकारियों के संपर्क नंबर भी प्रदर्शित किए जाएंगे ताकि पर्यटक सीधे शिकायत दर्ज करा सकें। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि कोई पार्किंग संचालक पर्यटकों से अभद्रता करता या निर्धारित शुल्क से अधिक वसूली करते पाया गया तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। जरूरत पड़ने पर पार्किंग निरस्त करने की कार्रवाई भी की जा सकती है।पर्यटन कारोबार से जुड़े लोगों का कहना है कि यदि समय रहते पार्किंग व्यवस्था में सुधार नहीं हुआ तो इसका सीधा असर मसूरी की छवि और पर्यटन व्यवसाय पर पड़ेगा। लगातार बढ़ती शिकायतें साफ संकेत दे रही हैं कि पर्यटन सीजन में मसूरी की पार्किंग व्यवस्था अब बड़े “खेल” का रूप ले चुकी है, जिस पर प्रशासन को तत्काल सख्त कदम उठाने होंगे।
राज्य

गढ़वाली अस्मिता का उत्सव-इन्कलाब आणु चा के विमोचन से श्रीनगर में गूंजे शब्दों के स्वर


श्रीनगर गढ़वाल। देवभूमि उत्तराखंड की सांस्कृतिक नगरी श्रीनगर में गढ़वाली भाषा और साहित्य का एक ऐतिहासिक क्षण उस समय साकार हुआ,जब नगर निगम सभागार में गढ़वाली भाषा की चर्चित कृति इन्कलाब आणु चा का भव्य विमोचन समारोह गरिमामय वातावरण में संपन्न हुआ। गढ़वाली भाषा के सशक्त हस्ताक्षर एवं राजकीय इंटर कॉलेज स्वीत के प्रवक्ता राकेश मोहन कंडारी द्वारा रचित इस पुस्तक का विमोचन नगर निगम श्रीनगर की महापौर आरती भण्डारी द्वारा किया गया। कार्यक्रम में साहित्यकारों,बुद्धिजीवियों,शिक्षकों,समाजसेवियों,मातृशक्ति एवं साहित्य प्रेमियों की उल्लेखनीय उपस्थिति रही,जिसने आयोजन को एक भव्य लोक-साहित्यिक उत्सव का स्वरूप प्रदान किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ रंगकर्मी डॉ.डी.आर.पुरोहित ने की,जबकि संचालन लोकप्रिय कवि ओम प्रकाश सेमवाल द्वारा किया गया। इस अवसर पर राजकीय इंटर कॉलेज स्वीत के प्रधानाचार्य महेंद्र सिंह नेगी,सम्मानित पार्षद दिनेश पटवाल,प्रवेश चमोली,शिक्षक प्रकाश चमोली,एस.एस.रावत,शिक्षक अखिलेश चन्द्र चमोला,समाजसेवी लखपत सिंह भण्डारी सहित विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े अनेक प्रबुद्धजन,रंगकर्मी एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने गढ़वाली भाषा के संरक्षण और संवर्धन की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि ऐसी साहित्यिक कृतियां हमारी सांस्कृतिक पहचान को मजबूत करती हैं और नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ने का कार्य करती हैं। इन्कलाब आणु चा को गढ़वाली समाज की संवेदनाओं,संघर्षों और उम्मीदों का सशक्त प्रतिबिंब बताया गया। लेखक राकेश मोहन कंडारी के विचार-इन्कलाब आणु चा मेरे लिए केवल एक पुस्तक नहीं बल्कि गढ़वाली समाज की आत्मा की अभिव्यक्ति है। इसमें हमारी भाषा,संस्कृति,संघर्ष और उम्मीदों को शब्दों में पिरोने का प्रयास किया गया है। मैं सभी साहित्य प्रेमियों का आभार व्यक्त करता हूं,जिन्होंने इस कृति को अपनाया और मुझे प्रोत्साहित किया। महापौर आरती भण्डारी के विचार-गढ़वाली भाषा और संस्कृति का संरक्षण हम सभी की जिम्मेदारी है। इस प्रकार के साहित्यिक प्रयास समाज में जागरूकता और सांस्कृतिक चेतना को सुदृढ़ करते हैं। इन्कलाब आणु चा निश्चित रूप से नई पीढ़ी को अपनी विरासत से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। मैं लेखक को इस उत्कृष्ट कृति के लिए हार्दिक बधाई देती हूं। अंततः यह आयोजन केवल एक पुस्तक विमोचन नहीं,बल्कि गढ़वाली भाषा,संस्कृति और सामाजिक चेतना का उत्सव बनकर सामने आया,जिसने यह संदेश दिया कि अपनी जड़ों से जुड़कर ही समाज सशक्त और समृद्ध बनता है।

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