Friday 03/ 04/ 2026 

Bharat Najariya
बच्चों का खान-पान, चाल-चलन शुद्ध रखना जरूरी है और अगर वे भजन-भाव-भक्ति में लग जाएंगे तो खराब साथ मिलने पर भी नहीं बदलेंगे – बाबा उमाकान्त जी महाराजउत्तराखंड सरकार द्वारा गेहूं के मूल्य में मात्र 6.6% की वृद्धि करना, जबकि घरेलू सिलेंडर में 6.9% और व्यावसायिक सिलेंडर में 17.5% की वृद्धि मात्र एक महीने के दौरान करना, यह साफ दर्शाता है कि सरकार की प्राथमिकताएं असंतुलित हैं। दूसरी ओर, उत्तराखंड सरकार ने विधानसभा सत्र में पूर्व विधायकों की पेंशन में 33% की वृद्धि कर दी, जबकि किसानों की फसल की लागत बढ़ गई है और उनकी आय घट गई है। डॉ. गणेश उपाध्याय, प्रवक्ता उत्तराखंड कांग्रेस ने कहा कि सरकार को कम से कम ₹3200 प्रति क्विंटल गेहूं का समर्थन मूल्य देना चाहिए, ताकि किसानों को उनकी मेहनत का उचित मूल्य मिल सके और वे अपने परिवार का पालन-पोषण कर सकें। अभी हाल ही में बेमौसम की बरसात ने एवं तेज हवाओं की वजह से गेहूं की फसल को काफी नुकसान पहुंचा है । यह समय है कि सरकार किसानों की समस्याओं को समझे और उनके लिए ठोस कदम उठाए।सितारगंज के कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय में आज विदाई समारोह बड़े ही हर्षोल्लास और उत्साह के साथ मनाया गया।विधायक शिव अरोरा ने रुद्रपुरवासियो को दी 3.83 करोड़ की लागत से 9 किलोमीटर सड़को की सौगात! जिसमे बहुचर्चित भूरारानी – शांति बिहार- छतरपुर सड़क की बदलेगी सूरतकेंद्रीय विद्यालय पौड़ी में एंटी ड्रग यूनिट का गठन,नशा उन्मूलन के लिए चलाया जाएगा जागरुकता अभियानजिलाधिकारी नितिन सिंह भदौरिया ने जिला सभागार में गैस एजेन्सी प्रबन्धकों के साथ बैठक कर आवश्यक दिशा निर्देश दिये। उन्होने सख्त निर्देश दिये कि किसी भी गैस एजेन्सी द्वारा गैस डिलिवरी में लापरवाही या गलत तरीके से गैस डिलिवरी करायी गयी तो सम्बन्धित के खिलाफ सख्त कार्यवाही की जायेगी। उन्होने कहा कि यदि किसी भी गैस एजेन्सी के आपरेटर द्वारा किसी भी गैस उपभोक्ता के मोबाईल पर बिना गैस सिलेंडर डिलिवर हुए गलत तरीके से गैस डिलिवरी का मैसेज भेजा गया तो सम्बन्धित के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराया जायेगा। उन्होने जिला पूर्ति अधिकारी को निर्देश दिये कि पूर्ति निरीक्षको के माध्यम से गैस गोदामो स्टाक की नियमित जांच कराना सुनिश्चित करें। उन्होने गैस एजेन्सी प्रबंधको को निर्देश दिये कि गैस बुकिंग होने के उपरांत निर्धारित समय पर होम डिलिवरी किया जाये। उन्होने कहा कि गैस गोदाम/एजेन्सी से किसी भी उपभोक्ता को गैस सिलेण्डर न दिया जाये। उन्होने कहा कि पुरी पारदर्शिता के साथ गैस उपभोक्ताओं को गैस सिलेंडर की होम डिलिवरी किया जाये। उन्होने लोगों से कहा है कि किसी भी प्रकार के अफवाहो पर ध्यान दे। गलत अफवाह फैलाने वालों के खिलाफ सख्त कार्यवाही की जायेगी। उन्होने कहा कि कोई भी घरेलू अथव व्यवसायिक गैस की कालाबजारी में संलिप्त व्यक्तियों पर आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत कार्यवाही की जायेगी।जिला पूर्ति अधिकारी विनोद चन्द्र तिवारी ने बताया कि घरेलू एवं व्यवसायिक गैस उपलब्धता पर रखी जा रही है। उन्होने बताया कि सभी गैस एजेन्सियो को केवल होम डिलिवरी के माध्यम से ही गैस वितरित करने के निर्देश दिये गये है। उन्होने बताया कि जनपद में 31 मार्च तक घरेलू गैस दैनिक वितरण 11616 अवशेष 9392 व व्यवसायिक गैस वितरण 404 अवशेष 1366 है।बैठक में अपर जिलाधिकारी पंकज उपाध्याय, गैस एजेन्सी प्रबंधक रीतु नेगी, वर्तिका सिंह, प्रमोद पाण्डे, लाल कृष्ण, विनोद कुमार, आशा पाण्डे, रिंकी, करन कुमार आदि मौजूद थे व इण्डियन गैस आयल के प्रतिनिधि हरीश पंत, भारत पेट्रोलियम के मनीष कुमार व हिन्दुस्तान पेट्रोलियम के महेश मीणा वर्चुल माध्यम से जुड़े थे।निःशुल्क पाठ्य पुस्तकों से वंचित नहीं रहेगा कोई भी छात्र–डाॅ.धन सिंह रावतस्वास्थ्य सेवाओं को नई उड़ान-टकोली ट्रॉमा सेंटर के भवन निर्माण का शिलान्यास,क्षेत्र को मिलेगा सशक्त चिकित्सा आधारस्वास्थ्य सेवाओं को नई उड़ान-टकोली ट्रॉमा सेंटर के भवन निर्माण का शिलान्यास,क्षेत्र को मिलेगा सशक्त चिकित्सा आधारदेवभूमि की थाली का अनमोल स्वाद गिवीराल-पहाड़ की आत्मा,परंपरा और सेहत का अद्भुत संगम
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देवभूमि की थाली का अनमोल स्वाद गिवीराल-पहाड़ की आत्मा,परंपरा और सेहत का अद्भुत संगम


श्रीनगर गढ़वाल/उत्तराखण्ड।
देवभूमि उत्तराखण्ड की पवित्र वादियों में प्रकृति ने जहां हरियाली,जल और जैव विविधता का अद्भुत खजाना दिया है,वहीं यहां की धरती पर ऐसे अनेक पारंपरिक वनस्पति खजाने भी मौजूद हैं,जो न केवल पहाड़ के स्वाद को जीवित रखते हैं,बल्कि स्वास्थ्य और संस्कृति के संवाहक भी हैं। इन्हीं में से एक है स्थानीय रूप से गिवीराल के नाम से प्रसिद्ध पेड़,जो आज भी ग्रामीण जीवन की थाली,परंपरा और लोकज्ञान का अभिन्न हिस्सा बना हुआ है। कोपल में छुपा स्वाद,परंपरा की पहचान जब बसंत ऋतु में पहाड़ों की ढलानों पर गिवीराल के पेड़ में नई-नई कोमल कोपलें फूटती हैं,तो यह केवल एक प्राकृतिक परिवर्तन नहीं होता,बल्कि गांवों में खुशियों का संकेत बन जाता है। गांव की महिलाएं और बुजुर्ग बड़े स्नेह के साथ इन कोपलों को एकत्रित करते हैं-इनसे बनती है विशेष पहाड़ी सब्जी,जिसमें अद्भुत स्वाद होता है,साथ ही बनाया जाता है-पारंपरिक अचार,जो लंबे समय तक भोजन का स्वाद बढ़ाता है यह स्वाद केवल जीभ तक सीमित नहीं रहता,बल्कि बचपन की यादों,परिवार के साथ बिताए पलों और गांव की मिट्टी की खुशबू को भी जीवित कर देता है। फूलों से थाली तक-ठंडक और ताजगी का एहसास गिवीराल के फूल जब खिलते हैं,दही के साथ तैयार यह रायता-शरीर को ठंडक देता है। गर्मियों में संतुलन बनाए रखता है। वरिष्ठ कृषि विशेषज्ञों और आयुर्वेदाचार्यों की राय कृषि विशेषज्ञों और पारंपरिक ज्ञान रखने वाले बुजुर्गों के अनुसार गिवीराल केवल स्वाद तक सीमित नहीं है,बल्कि यह स्वास्थ्य का भी खजाना है। पाचन शक्ति का प्राकृतिक सहायक-इसकी कोपल में मौजूद प्राकृतिक कड़वे तत्व पाचन क्रिया को मजबूत बनाते हैं और अपच,गैस जैसी समस्याओं में राहत देते हैं। रोग प्रतिरोधक क्षमता में वृद्धि-गिवीराल में पाए जाने वाले एंटीऑक्सीडेंट शरीर की इम्युनिटी को बढ़ाते हैं और मौसमी बीमारियों से बचाव करते हैं। रक्त शुद्धिकरण में सहायक आयुर्वेदाचार्यों के अनुसार यह शरीर के विषैले तत्वों को बाहर निकालने में मदद करता है और त्वचा को स्वस्थ बनाए रखता है। हृदय स्वास्थ्य के लिए लाभकारी-नियमित और संतुलित मात्रा में सेवन करने से यह हृदय को स्वस्थ रखने में सहायक माना जाता है। प्राकृतिक शीतलता प्रदान करने वाला-फूल से बना रायता शरीर को अंदर से ठंडा रखता है और गर्मी के प्रभाव को कम करता है। गिवीराल केवल एक खाद्य पदार्थ नहीं,बल्कि पहाड़ की जीवनशैली और संस्कृति का प्रतीक है। जब गांवों में इसकी कोपलें तोड़ी जाती हैं,तो यह एक सामाजिक परंपरा बन जाती है-महिलाएं समूह में जंगल जाती हैं हंसी-मजाक और लोकगीतों के बीच यह कार्य होता है और फिर घरों में वही कोपल स्वादिष्ट व्यंजन का रूप ले लेती है। वरिष्ठ साहित्यकारों के अनुसार गिवीराल पहाड़ की उस आत्मा का प्रतीक है,जो प्रकृति और मानव के बीच संतुलन बनाए रखती है। आज के बदलते दौर में जहां पारंपरिक खाद्य पदार्थ धीरे-धीरे विलुप्त होते जा रहे हैं,वहीं गिवीराल जैसे पेड़ों का संरक्षण अत्यंत आवश्यक हो गया है। विशेषज्ञों का मानना है-इसका सेवन सीमित मात्रा में ही करें,सही पहचान के बाद ही उपयोग करें,पारंपरिक विधियों से ही पकाए,परंपरा को बचाना,भविष्य को संवारना गिवीराल केवल एक पेड़ नहीं,बल्कि उत्तराखण्ड की सांस्कृतिक विरासत,लोकज्ञान और प्राकृतिक चिकित्सा का जीवंत उदाहरण है। आज जरूरत है कि नई पीढ़ी इस अनमोल धरोहर को पहचाने,अपनाए और संरक्षित करे, ताकि आने वाली पीढ़ियां भी इस स्वाद,इस संस्कृति और इस प्रकृति से जुड़ी रह सकें। देवभूमि का यह उपहार हमें यह सिखाता है कि असली समृद्धि प्रकृति के साथ जुड़ाव में ही छुपी है।

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