Saturday 04/ 04/ 2026 

Bharat Najariya
नन्हे कदमों की बड़ी उड़ान: डीपीएस में आयोजित हुआ प्री-प्राइमरी ग्रेजुएशन डे और फाउंडेशन डे का भव्य आयोजनरूद्रपुर दिल्ली पब्लिक स्कूल के सभागार में प्री-प्राइमरी कक्षा के नन्हे-मुन्ने छात्रों के लिए ग्रेजुएशन डे का भव्य आयोजन किया गया। इस अवसर पर पूरा विद्यालय परिसर खुशी, उत्साह और गर्व के माहौल से गूंज उठा। कार्यक्रम की शुरुआत मुख्य अतिथि और विशिष्ट अतिथियों के द्वारा दीप प्रज्वलन के साथ हुई, जिसने वातावरण को आध्यात्मिक और गरिमामय बना दिया। इसके बाद विद्यालय के प्रधानाचार्य ने सभी अतिथियों का स्वागत किया और विद्यालय के उपलब्धियों के बारे में बताया। रंग-बिरंगे परिधानों में सजे छोटे-छोटे बच्चों ने अपनी मनमोहक प्रस्तुतियों से सभी का दिल जीत लिया। विशेष रूप से गुजराती मैशअप, रोबोट डांस और मैजिक डांस ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। बच्चों का आत्मविश्वास, ऊर्जा और मंच पर उनकी प्रस्तुति देखकर उपस्थित अभिभावक और अतिथि भावुक हो उठे।कार्यक्रम में अनेक विशिष्ट अतिथियों की गरिमामयी उपस्थिति रही। जिनमें मुख्य अतिथि के रूप में जनरल दलबीर सिंह सुहाग – मुख्य अतिथि, सेशेल्स के पूर्व भारतीय उच्चायुक्त और भारतीय सेना के पूर्व प्रमुख उपस्थित रहे।उनके साथ ही विशिष्ट अतिथियों में डॉ. रश्मी सलूजा (अध्यक्ष, ग्लोबल ट्रेड एंड टेक्नोलॉजी काउंसिल), श्री कौस्तुभ मिश्रा (अतिरिक्त जिला मजिस्ट्रेट वित्त, उधम सिंह नगर), डॉ. अमृता शर्मा, एसडीएम बाजपुर, डॉ. गौरव गुप्ता -, संस्थापक अध्यक्ष, ग्लोबल ट्रेड एंड टेक्नोलॉजी काउंसिल (भारत), श्री विवेक राणा, जिला न्यायाधीश, श्री शुभम गुप्ता – निदेशक, ग्लोबल ट्रेड एंड टेक्नोलॉजी काउंसिल (भारत), श्री पवन अग्रवाल, एमडी, एसपी सॉल्वेंट, श्री संजय सिंघल – टाइटन के पूर्व प्लांट हेड भी मौजूद रहे। अपने उद्बोधन में डॉ. रश्मि सलूजा ने विद्यालय की शिक्षा प्रणाली और गतिविधियों की तारीफ की साथ ही उन्होंने अभिभावकों और शिक्षकों को भी अभिप्रेरित किया । उसके पश्चात मुख्य अतिथि जनरल दलबीर सिंह सुहाग जी ने विद्यालय के चेयरमैन श्री सुरजीत सिंह ग्रोवर जी और उनकी दूरदर्शी सोच की तारीफ की उन्होंने कहा कि डीपीएस रुद्रपुर आज शिक्षा के क्षेत्र में नए मुकाम छू रहा है और आने वाले समय में यह विद्यालय शिक्षा के क्षेत्र में कई ऊंचाइयों को प्राप्त करेगा।अंत में इस खास अवसर पर नन्हे विद्यार्थियों को ग्रेजुएशन कैप पहनाकर प्रमाण-पत्र प्रदान किए गए। यह क्षण बच्चों के जीवन का एक महत्वपूर्ण और यादगार पड़ाव बन गया, जिसे वे हमेशा संजोकर रखेंगे।विद्यालय के चेयरमैन श्री सुरजीत सिंह ग्रोवर ने अपने संबोधन में कहा कि आधुनिक युग में शिक्षा का स्वरूप तेजी से बदल रहा है। अब शिक्षा केवल पुस्तकों तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि यह गतिविधि-आधारित और अनुभवात्मक हो गई है। क्योंकि वर्तमान समय किताबी ज्ञान का नहीं है अब समय रोबोट प्रणाली पर तेजी से भाग रहा है। उन्होंने विद्यालय की योजनाओं पर प्रकाश डालते हुए कहा कि हमने बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए एक खुला और रचनात्मक शैक्षिक वातावरण तैयार किया है। जिसमें बच्चे अपने अपने अनुभव के आधार पर शिक्षकों के मार्गदर्शन में अपने भविष्य की नींव को और मजबूत कर रहे हैं। अंत में उन्होंने सभी बच्चों को आशीर्वाद देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की और अभिभावकों को बधाई दीविधायक तिलक राज बेहड़ ने ₹9.40 लाख की लागत के विकास कार्य का किया लोकार्पण, इंदरपुर कालोनी में अंबेडकर द्वार का उद्घाटननीलकंठ धाम में हनुमान जन्मोत्सव की रही धूमसमयपालन नहीं तो कार्रवाई तय-महापौर आरती भण्डारी का निगम में औचक निरीक्षण मचा हड़कंप,अनुशासन पर कसा शिकंजासंगठन शक्ति और सेवा संस्कारों का संगम-पंडित दीनदयाल उपाध्याय प्रशिक्षण महाअभियान 2026 में कार्यकर्ताओं को मिला नई ऊर्जा का संचारसेवा,संवेदना और समर्पण की मिसाल खिलेन्द्र चौधरी-श्रीनगर के जनमानस का सच्चा सहाराहजार ग्राम,हजार धाम का जीवंत रैबार-एकेश्वर-दंगलेश्वर अष्ट पजल यात्रा ने जगाई भाषा,संस्कृति और आस्था की अलख
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हजार ग्राम,हजार धाम का जीवंत रैबार-एकेश्वर-दंगलेश्वर अष्ट पजल यात्रा ने जगाई भाषा,संस्कृति और आस्था की अलख


पौड़ी/श्रीनगर गढ़वाल। गढ़वाल की लोक-संस्कृति,भाषा और परंपराओं को जन-जन तक पहुंचाने के संकल्प के साथ आयोजित दो दिवसीय (28-29 मार्च 2026) एकेश्वर-दंगलेश्वर अष्ट पजल यात्रा केवल एक सांस्कृतिक यात्रा नहीं,बल्कि अपनी जड़ों से जुड़ने का एक जीवंत आंदोलन बनकर उभरी। हजार ग्राम,हजार धाम-हमरी भाषा,हमरी पछ्याण के संदेश को आत्मसात करते हुए पजल सम्राट जगमोहन सिंह रावत जगमोरा के नेतृत्व में यह 8 वीं द्योभूमि अष्ट पजल धाम यात्रा सफलतापूर्वक संपन्न हुई। इस अनूठी यात्रा में सुशील बुड़ाकोटी शैलांचली,जयपाल सिंह रावत,दीवान सिंह नेगी,नागेंद्र सिंह रावत और भूपेंद्र सिंह बिष्ट जैसे साहित्य,संस्कृति और समाज से जुड़े लोग सहभागी बने,जबकि विनोद गौड़ ने सारथी की भूमिका निभाते हुए यात्रा को निरंतर गति दी। यह यात्रा केवल स्थानों का भ्रमण नहीं,बल्कि लोकजीवन,परंपराओं,लोकगीतों और पजल (पहेलियों) के माध्यम से सांस्कृतिक चेतना का विस्तार थी। यात्रा का शुभारंभ एकेश्वर स्थित इगासर महादेव मंदिर से हुआ,जहां विधिवत पूजा-अर्चना के साथ पजल पाठ कर यात्रा को आध्यात्मिक ऊर्जा मिली। इसके बाद यात्रा का कारवां श्री गुरु राम राय पब्लिक स्कूल एकेश्वर पहुंचा,जहां विद्यार्थियों और शिक्षकों ने पारंपरिक अंदाज में भव्य स्वागत किया। छात्र-छात्राओं द्वारा गढ़वाली सरस्वती वंदना,कविता,गीत और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने वातावरण को लोकमय बना दिया। यहां वक्ताओं ने स्पष्ट किया कि यह यात्रा केवल परंपरा का प्रदर्शन नहीं,बल्कि अपनी मातृभाषा,लोकसंस्कृति और साहित्य के संरक्षण का सशक्त प्रयास है। पजल के माध्यम से ज्ञान,हास्य और जीवन दर्शन को जोड़ने की यह परंपरा आज भी उतनी ही प्रासंगिक है। यात्रा के प्रमुख पड़ावों में इगासर महादेव,जण्दा देवी,क्वीई गांव (चौबट्टाखाल),पाली पोखरखाल (देवराजखाल),ज्वाल्पा देवी मंदिर,ग्रीन पब्लिक स्कूल सतपुली और दंगलेश्वर महादेव शामिल रहे। प्रत्येक स्थल पर पजल पाठ,लोकगीत,सांस्कृतिक संवाद और परंपरागत प्रसाद वितरण के माध्यम से एक अद्भुत सांस्कृतिक वातावरण बना। जण्दा देवी धाम में आस्था और इतिहास का संगम देखने को मिला,जहां तीलू रौतेली और लोकदेवियों की गाथाओं ने श्रद्धा का भाव और गहरा कर दिया। वहीं क्वीई गांव में ग्रामीणों की आत्मीयता और फूलदेई परंपरा के साथ हुआ स्वागत इस यात्रा की आत्मा बन गया। यात्रा के दौरान चौबट्टाखाल और देवराजखाल क्षेत्र में लोकसंस्कृति,पलायन,जल-जंगल-जमीन के संरक्षण और ग्रामीण अर्थव्यवस्था जैसे ज्वलंत मुद्दों पर भी गंभीर चर्चा हुई। यह यात्रा केवल सांस्कृतिक आयोजन नहीं,बल्कि सामाजिक जागरूकता का मंच भी साबित हुई। पाली पोखरखाल स्थित आनंदवर्षा रिजॉर्ट में आयोजित सांस्कृतिक संध्या में लोकगीत,मांगल,थड़िया और चौंफला ने माहौल को जीवंत कर दिया। यहां स्थानीय जनप्रतिनिधियों,समाजसेवियों और ग्रामीणों की सक्रिय भागीदारी ने इस आयोजन को जनआंदोलन का रूप दे दिया। यात्रा का समापन सतपुली स्थित ग्रीन पब्लिक स्कूल में हुआ,जहां विद्यार्थियों ने रंगारंग कार्यक्रम प्रस्तुत कर संस्कृति के प्रति अपनी जागरूकता का परिचय दिया। इस अवसर पर छात्रों को प्रोत्साहन स्वरूप प्रशस्ति पत्र और पॉकेट डिक्शनरी भेंट की गई जो इस यात्रा के शैक्षिक पक्ष को भी उजागर करता है। यह अष्ट पजल यात्रा केवल दो दिनों तक सीमित नहीं रही,बल्कि यह एक निरंतर चलने वाला सांस्कृतिक अभियान है जो आने वाले समय में और भी व्यापक रूप लेगा। जगमोरा और उनके साथियों का यह प्रयास यह संदेश देता है कि यदि अपनी भाषा,संस्कृति और परंपराओं को जीवित रखना है तो उन्हें केवल पुस्तकों में नहीं बल्कि जनजीवन में उतारना होगा। निस्संदेह एकेश्वर-दंगलेश्वर अष्ट पजल यात्रा गढ़वाल की सांस्कृतिक धरोहर को संजोने और नई पीढ़ी तक पहुंचाने की दिशा में एक ऐतिहासिक और प्रेरणादायक पहल बनकर सामने आई है।

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