गढ़वाल विश्वविद्यालय में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल-प्रो.वाई.पी.रैवानी बने कुलसचिव और प्रो.अशोक पोखरियाल को वाणिज्य विभाग की कमान

श्रीनगर गढ़वाल। हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय में शैक्षणिक एवं प्रशासनिक सुदृढ़ीकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए वरिष्ठ शिक्षाविद् प्रो.वाई.पी.रैवानी को विश्वविद्यालय का नया कुलसचिव नियुक्त किया गया है। इस नियुक्ति को विश्वविद्यालय प्रशासन में एक बड़े बदलाव के रूप में देखा जा रहा है,जिससे प्रशासनिक कार्यों में गति और पारदर्शिता आने की उम्मीद जताई जा रही है। मंगलवार को विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो.श्रीप्रकाश सिंह द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार कम्प्यूटर साइंस एवं इंजीनियरिंग विभाग के प्रख्यात प्रोफेसर प्रो.वाई.पी.रैवानी को कुलसचिव का दायित्व सौंपा गया है। उल्लेखनीय है कि इससे पूर्व अनीस-उज-जमाल इस पद का दायित्व संभाल रहे थे। प्रो.रैवानी अपनी नई जिम्मेदारी के साथ-साथ विभागीय दायित्वों का भी निर्वहन करेंगे। प्रो.रैवानी की नियुक्ति को विश्वविद्यालय प्रशासन में नई ऊर्जा और तकनीकी दृष्टिकोण के समावेश के रूप में देखा जा रहा है। उनके अनुभव और नेतृत्व क्षमता से विश्वविद्यालय के प्रशासनिक ढांचे को और अधिक सुदृढ़ बनाने की उम्मीद है। इसी क्रम में विश्वविद्यालय में एक और महत्वपूर्ण शैक्षणिक नियुक्ति करते हुए वरिष्ठ शिक्षाविद् प्रो.अशोक पोखरियाल को वाणिज्य विभाग का नया विभागाध्यक्ष नियुक्त किया गया है। कुलसचिव कार्यालय द्वारा जारी अधिसूचना में बताया गया कि सक्षम प्राधिकारी के अनुमोदन के उपरांत उन्हें यह जिम्मेदारी सौंपी गई है। वे आगामी तीन वर्षों अथवा अपनी सेवानिवृत्ति तक इस पद पर कार्यभार संभालेंगे। प्रो.अशोक पोखरियाल लंबे समय से वाणिज्य विषय में अध्यापन एवं शोध से जुड़े रहे हैं। उनकी शैक्षणिक दक्षता,प्रशासनिक अनुभव और विषय पर मजबूत पकड़ को देखते हुए यह जिम्मेदारी उन्हें सौंपी गई है। उनकी नियुक्ति से विश्वविद्यालय में वाणिज्य शिक्षा और शोध गतिविधियों को नई दिशा और गति मिलने की संभावना है। विश्वविद्यालय में एक साथ हुई इन दोनों महत्वपूर्ण नियुक्तियों को शैक्षणिक गुणवत्ता और प्रशासनिक मजबूती की दिशा में सकारात्मक पहल माना जा रहा है। जहां एक ओर प्रो.रैवानी प्रशासनिक कार्यों को नई दिशा देंगे,वहीं प्रो.पोखरियाल वाणिज्य विभाग में शिक्षा और शोध को नई ऊंचाइयों तक ले जाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। गढ़वाल विश्वविद्यालय में हुए ये अहम बदलाव यह संकेत देते हैं कि संस्थान अब शैक्षणिक उत्कृष्टता और प्रशासनिक दक्षता को और मजबूत करने की दिशा में अग्रसर है। आने वाले समय में इन नियुक्तियों के सकारात्मक परिणाम देखने को मिल सकते हैं।
