देवलगढ़ में गूंजेगी आस्था की दिव्य ध्वनि-छठवीं बार अखण्ड महायज्ञ से सजेगा सिद्धपीठ राजराजेश्वरी धाम

श्रीनगर गढ़वाल। देवभूमि उत्तराखंड की पावन धरा में मां भगवती राजराजेश्वरी की असीम कृपा और दिव्य प्रेरणा से जनपद पौड़ी गढ़वाल स्थित प्राचीन सिद्धपीठ देवलगढ़ एक बार फिर भक्ति,साधना और सनातन परंपराओं के विराट उत्सव का साक्षी बनने जा रहा है। आगामी 27 मई से 31 मई 2026 तक यहां छठवीं बार पांच दिवसीय एवं चार रात्रिकालीन श्री राजराजेश्वरी अखण्ड महायज्ञ का भव्य आयोजन किया जाएगा। यह आयोजन न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है,बल्कि सामाजिक एकता,आध्यात्मिक चेतना और सांस्कृतिक संरक्षण का भी सशक्त माध्यम बनता जा रहा है। कार्यक्रम का शुभारंभ 27 मई की प्रातः ध्वजारोहण एवं श्री गणेश पूजन के साथ होगा,जिसमें श्री बटुक भैरव,श्री नागराजा,श्री नृसिंह महाराज तथा कुलदेवताओं के साथ श्रीयंत्र,श्री महाकाली यंत्र और श्री बगलामुखी यंत्र की विशेष पूजा संपन्न की जाएगी। इसके उपरांत अखण्ड महायज्ञ की पवित्र अग्नि प्रज्ज्वलित होगी,जो दिन-रात निरंतर पांच दिनों तक संचालित रहेगी। इस दौरान प्रतिदिन प्रातः मां राजराजेश्वरी का विशेष पूजन,अर्चन और दर्शन श्रद्धालुओं के लिए खुले रहेंगे। इस आध्यात्मिक महोत्सव में देश के विभिन्न क्षेत्रों से प्रतिष्ठित विद्वान,संत और धर्माचार्य अपने ज्ञान और अनुभव से श्रद्धालुओं को आलोकित करेंगे। प्रथम दिवस पर बद्रीनाथ धाम के सेवानिवृत्त धर्माधिकारी भुवनचन्द्र उनियाल भगवत भक्ति पर प्रवचन देंगे। द्वितीय दिवस पर पंडित तुलसीराम गैरोला द्वारा भगवती कुंजिका उपासना और उसके महात्म्य पर प्रकाश डाला जाएगा। तृतीय दिवस विशेष रूप से प्रेरणादायी रहेगा,जहां विश्वविख्यात पर्वतारोही और पूर्व आईपीएस अधिकारी संतोष यादव सनातन संस्कृति के मूल्यों पर अपने विचार रखेंगी। वहीं देवप्रयाग के ज्योतिषाचार्य पंडित भास्करानन्द जोशी देवलगढ़ की ऐतिहासिक और आध्यात्मिक महत्ता पर विस्तार से प्रकाश डालेंगे। चतुर्थ दिवस पर महाभारत के गूढ़ प्रसंगों के विशेषज्ञ डॉ.कृष्णानन्द नौटियाल चक्रव्यूह निर्माण,अभिमन्यु की वीरता और युद्ध कौशल पर रोचक एवं ज्ञानवर्धक व्याख्यान प्रस्तुत करेंगे। इसी दिन रात्रि में भक्ति और श्रद्धा से ओतप्रोत जागरण का आयोजन भी होगा। पंचम दिवस 31 मई को आचार्य महेशदत्त उनियाल मां राजराजेश्वरी की भक्ति,महात्म्य और साधना के फल पर प्रकाश डालेंगे। इसके पश्चात आचार्य श्रीत सुंद्रियाल भैरव बाबा,श्री हनुमान और नृसिंह परंपराओं से जुड़े प्रतीकों के आध्यात्मिक महत्व को स्पष्ट करेंगे। अंततः दोपहर एक बजे पूर्णाहुति के साथ महायज्ञ का समापन होगा और विशाल भंडारे में प्रसाद वितरण किया जाएगा। कार्यक्रम के संयोजन की जिम्मेदारी देवप्रयाग के आचार्य पंडित अनूप थपलियाल (राजा पंडित) को सौंपी गई है,जबकि कलश यात्रा का दायित्व समाजसेवी प्रिय कमलेश उनियाल निभाएंगे। कुलगुरु के रूप में पंडित रवीन्द्र बहुगुणा मार्गदर्शन देंगे और पंडित शक्ति प्रसाद उनियाल आंतरिक पूजा की व्यवस्था संभालेंगे। साथ ही नीलकंठ गिरि महाराज के शिष्यों से भी यज्ञ संचालन में सहयोग का आग्रह किया गया है। देवलगढ़ का यह आयोजन अपनी भौगोलिक विषमता और साधना की कठिनता के लिए भी जाना जाता है। आयोजकों ने श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे यहां केवल दर्शन के लिए नहीं बल्कि तप,साधना और आत्मिक शांति की अनुभूति के लिए आएं। यह महायज्ञ भौतिक जीवन की आपाधापी से दूर आध्यात्मिक ऊर्जा प्राप्त करने का दुर्लभ अवसर प्रदान करता है। विश्वास है कि मां महामाया पराम्बा महात्रिपुरसुंदरी श्री राजराजेश्वरी की कृपा और भक्तों के सहयोग से यह महायज्ञ निर्विघ्न एवं सफलतापूर्वक संपन्न होगा,जो समस्त क्षेत्र में सुख,शांति और समृद्धि का संदेश फैलाएगा। सिद्धपीठ मां भगवती राजराजेश्वरी के मुख्य पुजारी कुंजिका प्रसाद उनियाल की ओर से संदेश-यह महायज्ञ केवल अनुष्ठान नहीं,बल्कि आत्मा के जागरण का माध्यम है। मां राजराजेश्वरी की कृपा से सभी भक्तों को आध्यात्मिक शक्ति,शांति और मार्गदर्शन प्राप्त हो-यही हमारी कामना है। आप सभी श्रद्धालु सादर आमंत्रित हैं,मां के दरबार में आकर अपने जीवन को धन्य बनाएं।
