विज्ञान नवाचार और युवा सोच का महाकुंभ-एचएनबी गढ़वाल विश्वविद्यालय में राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस पर गूंजा आत्मनिर्भर भारत का संकल्प

श्रीनगर गढ़वाल। हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय में राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस के अवसर पर विज्ञान,नवाचार और तकनीकी चेतना का प्रेरणादायी वातावरण देखने को मिला। संस्थान नवाचार परिषद (IIC) द्वारा विज्ञान भारती (विभा) उत्तराखंड के सहयोग से आयोजित इस भव्य कार्यक्रम में शिक्षाविदों,वैज्ञानिक चिंतकों,शोधार्थियों,विद्यार्थियों एवं नवाचारकर्ताओं ने एक मंच पर एकत्र होकर राष्ट्र निर्माण में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी की भूमिका पर गंभीर मंथन किया। कार्यक्रम केवल एक औपचारिक आयोजन नहीं,बल्कि युवा प्रतिभाओं को वैज्ञानिक सोच,नवाचार और आत्मनिर्भर भारत की अवधारणा से जोड़ने का सशक्त प्रयास बनकर उभरा। विश्वविद्यालय परिसर पूरे दिन तकनीकी ऊर्जा,शोधपरक संवाद और रचनात्मक विचारों से जीवंत दिखाई दिया। कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथियों द्वारा दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ। ज्ञान,अनुसंधान और प्रबोधन के प्रतीक इस शुभारंभ ने पूरे आयोजन को गरिमामयी स्वरूप प्रदान किया। स्वागत संबोधन देते हुए प्रो.टी.सी.उपाध्याय ने कहा कि वर्तमान युग विज्ञान और तकनीक का युग है,जहां नवाचार ही विकास की सबसे बड़ी शक्ति बन चुका है। उन्होंने उपस्थित अतिथियों,शोधार्थियों एवं विद्यार्थियों का स्वागत करते हुए कार्यक्रम को ज्ञानवर्धक एवं प्रेरणादायक बताया। इसके पश्चात प्रो.हेमवती नंदन ने राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि भारत की तकनीकी उपलब्धियां आज विश्व मंच पर देश की नई पहचान बन रही हैं। उन्होंने कहा कि विज्ञान और अनुसंधान केवल प्रयोगशालाओं तक सीमित न रहकर समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचने चाहिए,तभी उनका वास्तविक उद्देश्य पूर्ण होगा। संस्थान नवाचार परिषद (IIC) की कार्यप्रणाली एवं उद्देश्यों को प्रस्तुत करते हुए प्रो.नटनम गोविंदम ने विद्यार्थियों में नवाचार,उद्यमिता और रचनात्मक सोच को विकसित करने के लिए परिषद द्वारा किए जा रहे प्रयासों की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालयों की भूमिका अब केवल डिग्री प्रदान करने तक सीमित नहीं रह गई है,बल्कि उन्हें नवाचार आधारित नेतृत्व तैयार करना होगा। डॉ.वरुण बड़थ्वाल ने कार्यक्रम की गतिविधियों एवं समकालीन तकनीकी चुनौतियों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि आधुनिक समस्याओं का समाधान विज्ञान एवं तकनीकी उन्नति के माध्यम से ही संभव है। उन्होंने युवाओं से शोध और तकनीकी प्रयोगों में सक्रिय भागीदारी की अपील की। विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो.श्रीप्रकाश सिंह ने अपने प्रेरणादायक संबोधन में कहा कि उच्च शिक्षण संस्थान राष्ट्र की वैज्ञानिक चेतना के केंद्र होते हैं। उन्होंने विद्यार्थियों को अनुसंधान,नवाचार और तकनीकी दक्षता के माध्यम से समाज एवं राष्ट्र के विकास में योगदान देने के लिए प्रेरित किया। मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित श्री रामा हिमालयन विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो.राजेंद्र डोभाल ने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति के भीतर कोई न कोई विशेष प्रतिभा अवश्य होती है। आवश्यकता केवल उस प्रतिभा को पहचानने और समर्पण के साथ उसे विकसित करने की है। उन्होंने युवाओं को आत्मविश्वास,निरंतर सीखने की प्रवृत्ति और नवाचार की दिशा में आगे बढ़ने का संदेश दिया। जी.बी.पंत इंजीनियरिंग एवं प्रौद्योगिकी संस्थान पौड़ी के निदेशक प्रो.वी.के.बांगा ने आधुनिक जीवन में तकनीक के बढ़ते प्रभाव पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता,डिजिटल तकनीक और आधुनिक अनुसंधान पद्धतियां समाज की कार्यप्रणाली को तेजी से बदल रही हैं और आने वाला समय तकनीकी नवाचारों का होगा। कार्यक्रम में डॉ.शुभ्रा काला ने राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस के ऐतिहासिक महत्व तथा भारत की परमाणु ऊर्जा यात्रा पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि तकनीकी आत्मनिर्भरता किसी भी राष्ट्र की प्रगति का मूल आधार होती है। कार्यक्रम का प्रमुख आकर्षण विद्यार्थियों द्वारा आयोजित पोस्टर प्रस्तुति प्रतियोगिता रही,जिसमें विभिन्न विभागों के छात्र-छात्राओं ने विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी से जुड़े नवाचारी विचारों और शोध आधारित अवधारणाओं को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया। प्रतिभागियों की रचनात्मकता और वैज्ञानिक दृष्टिकोण ने उपस्थित विशेषज्ञों एवं शिक्षकों को प्रभावित किया। विजेताओं को पुरस्कार एवं प्रमाण पत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया। इसके उपरांत डॉ.वरुण बड़थ्वाल के संचालन में आयोजित खुले परिचर्चा सत्र में प्रतिभागियों ने उभरती तकनीकों,नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र,स्टार्टअप संस्कृति और भविष्य की संभावनाओं पर अपने विचार साझा किए। संवाद आधारित इस सत्र ने विद्यार्थियों में नई ऊर्जा और शोध के प्रति उत्साह का संचार किया। समापन अवसर पर प्रो.हेमवती नंदन ने विद्यार्थियों से सामाजिक उत्तरदायित्व के साथ अनुसंधान एवं नवाचार के क्षेत्र में कार्य करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि विज्ञान तभी सार्थक है जब उसका लाभ समाज और मानवता तक पहुंचे। अंत में डॉ.भास्करन ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत करते हुए सभी अतिथियों,आयोजकों,प्रतिभागियों एवं विद्यार्थियों का आभार व्यक्त किया।
