उत्तराखंड में फॉरेंसिक सेवाओं की डिजिटल क्रांति,मेडिकल कॉलेज श्रीनगर ने शुरू की हाईटेक एमएलसी व्यवस्था

श्रीनगर गढ़वाल। स्वास्थ्य सेवाओं को आधुनिक तकनीक से जोड़ते हुए राजकीय मेडिकल कॉलेज श्रीनगर ने उत्तराखंड में फॉरेंसिक और मेडिको-लीगल सेवाओं के क्षेत्र में एक बड़ा कदम उठाया है। बेस अस्पताल श्रीनगर में अब मेडिको-लीगल केस (एमएलसी) से संबंधित रिपोर्टें डिजिटल माध्यम से तैयार कर ऑनलाइन उपलब्ध कराई जाएंगी। चिकित्सा-कानूनी परीक्षा एवं पोस्टमार्टम रिपोर्टिंग प्रणाली MedLEaPR-Uttarakhan के तहत शुरू की गई यह व्यवस्था प्रदेश की स्वास्थ्य और न्यायिक प्रणाली के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है। विशेष बात यह है कि बेस अस्पताल श्रीनगर प्रदेश का पहला राजकीय अस्पताल बन गया है,जहां आमजन की सुविधा और पारदर्शिता को ध्यान में रखते हुए एमएलसी प्रक्रिया को पूर्ण रूप से डिजिटल स्वरूप दिया जा रहा है। अब तक डॉक्टरों को सड़क दुर्घटना,मारपीट,विषाक्त पदार्थ सेवन,जानवरों के हमले,डूबने तथा अन्य आपराधिक घटनाओं से जुड़े मामलों की रिपोर्ट रजिस्टर में हाथ से दर्ज करनी पड़ती थी,जिससे कई बार रिपोर्ट पढ़ने में कठिनाई,दस्तावेजों के सुरक्षित रखरखाव तथा समयबद्ध उपलब्धता जैसी समस्याएं सामने आती थीं। नई डिजिटल व्यवस्था लागू होने के बाद अब एमएलसी रिपोर्ट कंप्यूटरीकृत प्रारूप में तैयार होगी,जिससे रिपोर्ट स्पष्ट,सुरक्षित और आसानी से उपलब्ध हो सकेगी। इससे न केवल मरीजों और उनके परिजनों को राहत मिलेगी बल्कि पुलिस,प्रशासन और न्यायालयों को भी समय पर सटीक दस्तावेज प्राप्त हो सकेंगे। गौरतलब है कि एमएलसी रिपोर्ट किसी भी सड़क हादसे,आपराधिक घटना या संदिग्ध परिस्थितियों में घायल अथवा मृत व्यक्ति के मामले में अत्यंत महत्वपूर्ण साक्ष्य मानी जाती है। न्यायिक प्रक्रिया में यह दस्तावेज कई बार निर्णायक भूमिका निभाता है। ऐसे में रिपोर्टिंग प्रणाली का डिजिटल होना पारदर्शिता और विश्वसनीयता की दिशा में बड़ा सुधार माना जा रहा है। नई व्यवस्था को प्रभावी रूप से लागू करने के लिए फॉरेंसिक मेडिसिन विभाग द्वारा पीजी कर रहे जूनियर रेजिडेंट डॉक्टरों को विशेष प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है। प्रशिक्षण के दौरान डॉक्टरों को डिजिटल प्लेटफॉर्म पर एमएलसी रिपोर्ट तैयार करने,ऑनलाइन अपलोड करने,सुरक्षित रूप से साझा करने तथा रिकॉर्ड संरक्षित रखने की तकनीकी प्रक्रिया सिखाई जाएगी। प्रशासन का मानना है कि इससे कार्यप्रणाली अधिक व्यवस्थित,जवाबदेह और त्रुटिरहित बनेगी। फॉरेंसिक मेडिसिन विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ.वल्लियप्पन तथा सीनियर रेजिडेंट डॉ.पंकज शाहू ने बताया कि ऑनलाइन एमएलसी रिपोर्ट प्रणाली लागू होने से लोगों को स्पष्ट और पढ़ने में आसान दस्तावेज मिलेंगे। कंप्यूटरीकृत रिपोर्टों से न केवल मरीजों और उनके परिजनों को सुविधा होगी बल्कि न्यायिक एवं प्रशासनिक प्रक्रिया में भी तेजी आएगी। उन्होंने कहा कि विभाग इस व्यवस्था को पूरी दक्षता और सुरक्षा के साथ संचालित करने में जुटा हुआ है। उन्होंने यह भी जानकारी दी कि 1 मई से यह डिजिटल प्रणाली सुरक्षित एवं सुचारू रूप से संचालित की जा रही है। आने वाले समय में स्वास्थ्य सेवाओं को और अधिक आधुनिक,डिजिटल,पारदर्शी तथा जनहितकारी बनाने की दिशा में निरंतर प्रयास किए जाएंगे। राजकीय मेडिकल कॉलेज श्रीनगर द्वारा उठाया गया यह कदम न केवल स्वास्थ्य सेवाओं के डिजिटलीकरण की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा,बल्कि आमजन को त्वरित,सुरक्षित और विश्वसनीय चिकित्सा-कानूनी सेवाएं उपलब्ध कराने में भी अहम भूमिका निभाएगा।
