Wednesday 13/ 05/ 2026 

Bharat Najariya
आर्ट ऑफ लिविंग की स्थानीय इकाई ने संस्था के संस्थापक श्री श्री रविशंकर जी के अवतरण दिवस के पूर्व दिवस पर राजकीय संयुक्त उपजिला चिकित्सालय में रक्तदान किया गया व रोगियों को फल वितरण किया गया।इस अवसर पर उपस्थित साधकों ने सेवा,समर्पण और सत्संग का संकल्प लिया गया।श्री श्री रविशंकर जी द्वारा मानवता के लिए किए जा रहे प्रयासों में स्वयं को आत्मसात करने की बात कही गई।रक्त दान में शामिल सुदर्शन बिष्ट,मंजू,वीना नेगी,मनीष पांडे,उर्मिला पांडे,आशीष पंवार,उषा चौधरी आदि का संस्था के सदस्यों का अस्पताल प्रबंधन ने सराहना की।संस्था ने इस अवसर पर रोगियों को फल वितरण भी किया गया। इस अवसर पर संस्था के कई स्वयं सेवी उपस्थित रहे।उत्तराखंड में फॉरेंसिक सेवाओं की डिजिटल क्रांति,मेडिकल कॉलेज श्रीनगर ने शुरू की हाईटेक एमएलसी व्यवस्थाजिला गंगा समिति की बैठक कलेक्ट्रेट सभागार में लेते हुए मुख्य विकास अधिकारी दिवेश शाशनी ने नगर निकायों को निर्देश दिये कि जनपद में शतप्रतिशत सरकारी व निजी सीवर टैंक वाहनों में जीपीएस अवश्य लगवाये व उनकी निगरानी भी करें। उन्होने कहा कि जो निजी सीवर टैंक वाहन पंजीकरण न कराकर कार्य कर रहे है उनके खिलाफ कड़ी कार्यवाही करते हुए उन्हे सीज किया जाये। उन्होने कहा कि सीवर टैंक वाहन एसटीपी प्लांट में ही सीवर डालें, अन्य जगह सीवर डालने वालों के खिलाफ कड़ी कार्यवाही की जाये। उन्होने नगर आयुक्त नगर निगम काशीपुर व अधिशासी अधिकारी नगर पालिका किच्छा को एक माह के भीतर कूड़ा निस्तारण कराने फोटोग्राफ भी उपलब्ध कराने के निर्देश दिये। उन्होने कहा कि लिगेसी वेस्ट को नियमित निस्तारण कराते रहे, कही भी कूड़ा डम्प न किया जाये। उन्होने खटीमा में एफएसटीपी प्लांट लगाने हेतु अधिशासी अभियंता पेयजल निगम स्टीमेट बनाकर शासन को पत्र भेजने के निर्देश दिये।मुख्य विकास अधिकारी ने जिला पंचायतराज अधिकारी को सख्त निर्देश दिये कि ग्राम पंचायतो में कूड़ा निस्तारण हेतु 15 दिन के भीतर नगर निकायों से ओएमयू कराकर अवगत कराना सुनिश्चित करें। उन्होने कहा कि ग्राम पंचायतो से निकलने वाले कूड़े को नजदीकी निकायो में भेजने के निर्देश डीपीआरओ को दिये। उन्होनेे क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड अधिकारी को निर्देश दिये कि औद्योगिक संस्थानों में नियमित निरीक्षण करें व बिना ट्रीट किये पानी यदि कोई नदी, नालों में पानी डालता है तो उसके खिलाफ कार्यवाही करना सुनिश्चित करें। उन्होने प्राइवेट व सकारी चिकित्सालयों से प्रतिदिन निकलने वाला बायोमेडिकल वेस्ट का मानकों के अनुसार निस्तारण कराने के निर्देश मुख्य चिकित्साधिकारी को दिये। उन्होने सभी विभागीय अधिकारियों को नमामि गंगे व एनजीटी के गाइड लाइनों का अनुपालन करने के निर्देश दिये।विज्ञान नवाचार और युवा सोच का महाकुंभ-एचएनबी गढ़वाल विश्वविद्यालय में राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस पर गूंजा आत्मनिर्भर भारत का संकल्पपैठाणी महाविद्यालय का प्रथम वार्षिकोत्सव बना ऐतिहासिक-उच्च शिक्षा मंत्री डॉ.धन सिंह रावत ने की विकास योजनाओं की झड़ीपौड़ी की वादियों से मिला अपनापन कभी नहीं भूलूंगा-भावुक विदाई में छलका मुख्य विकास अधिकारी गिरीश गुणवंत का आत्मीय जुड़ावश्रीनगर विधानसभा में हिमालय क्रांति पार्टी की बड़ी राजनीतिक दस्तक-पोखरी से उठी बदलाव की हुंकार,2027 में राष्ट्रीय दलों को चुनौतीगांव-गांव पहुंच रहा उच्च शिक्षा का संदेश-हिमवंत चन्द्र कुंवर बर्तवाल महाविद्यालय ने शुरू किया व्यापक प्रवेश जागरूकता अभियानअब विकास की रफ्तार से जुड़ेगा संगलाकोटी-73 लाख की लागत से मोटर मार्ग के द्वितीय चरण का शिलान्यासडीपीएस में आयोजित हुआ जापानी भाषा पर विशेष सांस्कृतिक कार्यक्रम “द मैजिक ऑफ जापान”दिल्ली पब्लिक स्कूल रुद्रपुर में जापानी भाषा पर आधारित एक विशेष सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। सभा का उद्देश्य विद्यार्थियों को जापान की भाषा, संस्कृति और अनुशासन से परिचित कराना था। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि श्री भगत सिंह कोश्यारी जी, पूर्व मुख्यमंत्री उत्तराखंड सरकार एवं पूर्व राज्यपाल महाराष्ट्र, थे। विशिष्ट अतिथि श्री विकास शर्मा जी, मेयर नगर निगम रुद्रपुर तथा श्री कोजी सतो जी, अध्यक्ष जापान फाउंडेशन, नई दिल्ली, उपस्थित रहे। सभी अतिथियों का विद्यालय द्वारा उत्तराखंड की पहचान पारंपरिक पिछौड़ा भेंट कर स्वागत किया गया। इसके पश्चात कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्वलन, सरस्वती वंदना एवं प्रसिद्ध जापानी संगीत के साथ की गई।इसके बाद विद्यार्थियों ने जापानी भाषा एवं संस्कृति पर आधारित विशेष सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ दीं, जिनमें जापानी गीत-संगीत, प्रसिद्ध जापानी थिएटर तथा पारंपरिक प्रस्तुतियाँ शामिल रहीं। इसके साथ ही जापान की संस्कृति, तकनीकी प्रगति और वहाँ के अनुशासन पर रोचक जानकारी भी साझा की गई। कुछ विद्यार्थियों ने पारंपरिक जापानी परिधान एवं कला शैली का सुंदर प्रदर्शन किया।विद्यार्थियों ने जापानी प्रतिनिधियों एवं अन्य अतिथियों के मार्गदर्शन में ओरिगामी, कैलिग्राफी तथा जापानी व्यंजन बनाने जैसी गतिविधियों में भी भाग लिया। विद्यार्थियों द्वारा तैयार किए गए जापानी व्यंजनों और सांस्कृतिक गतिविधियों ने विद्यालय में जापानी संस्कृति की सुंदर झलक प्रस्तुत की। इन गतिविधियों ने विद्यार्थियों को जापान की परंपराओं, कला एवं संस्कृति को निकट से समझने का अवसर प्रदान किया।मुख्य अतिथि श्री भगत सिंह कोश्यारी जी ने अपने भाषण में कहा कि नई भाषाएँ सीखने से ज्ञान बढ़ता है और विभिन्न देशों की संस्कृति को समझने का अवसर मिलता है। उन्होंने दिल्ली पब्लिक स्कूल रुद्रपुर के छात्रों द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम की प्रशंसा की तथा आमंत्रण के लिए विद्यालय का धन्यवाद किया।कार्यक्रम के अंत में विद्यालय के चेयरमैन श्री सुरजीत सिंह ग्रोवर जी ने विद्यार्थियों के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि ऐसी गतिविधियाँ बच्चों के आत्मविश्वास और वैश्विक दृष्टिकोण को विकसित करती हैं तथा छात्रों को सीखने के लिए नए अवसर प्रदान करती हैं। उन्होंने बताया कि छात्रों को और बेहतर तरीके से सीखने हेतु विद्यालय में स्किल लैब का भी उद्घाटन किया जा चुका है।पूरा कार्यक्रम उत्साह, अनुशासन और सीखने की भावना से भरपूर रहा। विद्यार्थियों ने इस अनोखी प्रस्तुति का आनंद लिया और जापानी भाषा एवं संस्कृति के प्रति अपनी रुचि व्यक्त की।
राज्य

उत्तराखंड में फॉरेंसिक सेवाओं की डिजिटल क्रांति,मेडिकल कॉलेज श्रीनगर ने शुरू की हाईटेक एमएलसी व्यवस्था


श्रीनगर गढ़वाल। स्वास्थ्य सेवाओं को आधुनिक तकनीक से जोड़ते हुए राजकीय मेडिकल कॉलेज श्रीनगर ने उत्तराखंड में फॉरेंसिक और मेडिको-लीगल सेवाओं के क्षेत्र में एक बड़ा कदम उठाया है। बेस अस्पताल श्रीनगर में अब मेडिको-लीगल केस (एमएलसी) से संबंधित रिपोर्टें डिजिटल माध्यम से तैयार कर ऑनलाइन उपलब्ध कराई जाएंगी। चिकित्सा-कानूनी परीक्षा एवं पोस्टमार्टम रिपोर्टिंग प्रणाली MedLEaPR-Uttarakhan के तहत शुरू की गई यह व्यवस्था प्रदेश की स्वास्थ्य और न्यायिक प्रणाली के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है। विशेष बात यह है कि बेस अस्पताल श्रीनगर प्रदेश का पहला राजकीय अस्पताल बन गया है,जहां आमजन की सुविधा और पारदर्शिता को ध्यान में रखते हुए एमएलसी प्रक्रिया को पूर्ण रूप से डिजिटल स्वरूप दिया जा रहा है। अब तक डॉक्टरों को सड़क दुर्घटना,मारपीट,विषाक्त पदार्थ सेवन,जानवरों के हमले,डूबने तथा अन्य आपराधिक घटनाओं से जुड़े मामलों की रिपोर्ट रजिस्टर में हाथ से दर्ज करनी पड़ती थी,जिससे कई बार रिपोर्ट पढ़ने में कठिनाई,दस्तावेजों के सुरक्षित रखरखाव तथा समयबद्ध उपलब्धता जैसी समस्याएं सामने आती थीं। नई डिजिटल व्यवस्था लागू होने के बाद अब एमएलसी रिपोर्ट कंप्यूटरीकृत प्रारूप में तैयार होगी,जिससे रिपोर्ट स्पष्ट,सुरक्षित और आसानी से उपलब्ध हो सकेगी। इससे न केवल मरीजों और उनके परिजनों को राहत मिलेगी बल्कि पुलिस,प्रशासन और न्यायालयों को भी समय पर सटीक दस्तावेज प्राप्त हो सकेंगे। गौरतलब है कि एमएलसी रिपोर्ट किसी भी सड़क हादसे,आपराधिक घटना या संदिग्ध परिस्थितियों में घायल अथवा मृत व्यक्ति के मामले में अत्यंत महत्वपूर्ण साक्ष्य मानी जाती है। न्यायिक प्रक्रिया में यह दस्तावेज कई बार निर्णायक भूमिका निभाता है। ऐसे में रिपोर्टिंग प्रणाली का डिजिटल होना पारदर्शिता और विश्वसनीयता की दिशा में बड़ा सुधार माना जा रहा है। नई व्यवस्था को प्रभावी रूप से लागू करने के लिए फॉरेंसिक मेडिसिन विभाग द्वारा पीजी कर रहे जूनियर रेजिडेंट डॉक्टरों को विशेष प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है। प्रशिक्षण के दौरान डॉक्टरों को डिजिटल प्लेटफॉर्म पर एमएलसी रिपोर्ट तैयार करने,ऑनलाइन अपलोड करने,सुरक्षित रूप से साझा करने तथा रिकॉर्ड संरक्षित रखने की तकनीकी प्रक्रिया सिखाई जाएगी। प्रशासन का मानना है कि इससे कार्यप्रणाली अधिक व्यवस्थित,जवाबदेह और त्रुटिरहित बनेगी। फॉरेंसिक मेडिसिन विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ.वल्लियप्पन तथा सीनियर रेजिडेंट डॉ.पंकज शाहू ने बताया कि ऑनलाइन एमएलसी रिपोर्ट प्रणाली लागू होने से लोगों को स्पष्ट और पढ़ने में आसान दस्तावेज मिलेंगे। कंप्यूटरीकृत रिपोर्टों से न केवल मरीजों और उनके परिजनों को सुविधा होगी बल्कि न्यायिक एवं प्रशासनिक प्रक्रिया में भी तेजी आएगी। उन्होंने कहा कि विभाग इस व्यवस्था को पूरी दक्षता और सुरक्षा के साथ संचालित करने में जुटा हुआ है। उन्होंने यह भी जानकारी दी कि 1 मई से यह डिजिटल प्रणाली सुरक्षित एवं सुचारू रूप से संचालित की जा रही है। आने वाले समय में स्वास्थ्य सेवाओं को और अधिक आधुनिक,डिजिटल,पारदर्शी तथा जनहितकारी बनाने की दिशा में निरंतर प्रयास किए जाएंगे। राजकीय मेडिकल कॉलेज श्रीनगर द्वारा उठाया गया यह कदम न केवल स्वास्थ्य सेवाओं के डिजिटलीकरण की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा,बल्कि आमजन को त्वरित,सुरक्षित और विश्वसनीय चिकित्सा-कानूनी सेवाएं उपलब्ध कराने में भी अहम भूमिका निभाएगा।

Check Also
Close