गुरु हरदेव सिंह महाराज का समर्पण दिवस श्रद्धा,भक्ति और मानवता के संदेश के साथ मनाया गया

श्रीनगर गढ़वाल। संत निरंकारी सत्संग भवन श्रीनगर में बुधवार को बाबा हरदेव सिंह महाराज का समर्पण दिवस श्रद्धा,भक्ति और आध्यात्मिक भावनाओं के साथ मनाया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने सहभागिता करते हुए बाबा हरदेव सिंह महाराज के मानवता,प्रेम,सेवा और भाईचारे के संदेशों को स्मरण किया। पूरा वातावरण आध्यात्मिक चेतना,भक्ति रस और सामाजिक सद्भाव से ओतप्रोत दिखाई दिया। इस अवसर पर वक्ताओं ने कहा कि बाबा हरदेव सिंह महाराज ने अपने जीवन के 36 वर्षों तक संत निरंकारी मिशन के सत्गुरु के रूप में मानवता की सेवा करते हुए विश्वभर में प्रेम,शांति,सद्भाव और निराकार प्रभु की भक्ति का संदेश फैलाया। उन्होंने समाज को जाति,धर्म,ऊंच-नीच और भेदभाव से ऊपर उठकर मानव मात्र को एक परिवार मानने की प्रेरणा दी। उनके द्वारा दिखाया गया प्रेम,विनम्रता और सेवा का मार्ग आज भी करोड़ों लोगों के लिए प्रेरणास्रोत बना हुआ है। समर्पण दिवस के अवसर पर आयोजित सत्संग कार्यक्रम में सांस्कृतिक,धार्मिक एवं आध्यात्मिक प्रस्तुतियों ने सभी श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया। विशेष रूप से गढ़वाली भाषा में प्रस्तुत किए गए भजनों ने कार्यक्रम को लोक संस्कृति और भक्ति भाव से जोड़ते हुए एक अनूठा आध्यात्मिक रंग प्रदान किया। भजन मंडली द्वारा प्रस्तुत मधुर भजनों पर श्रद्धालु भाव-विभोर होकर गुरु महिमा का गुणगान करते दिखाई दिए। कार्यक्रम में मिशन प्रचारक दिनेश प्रसाद उनियाल,ज्ञान प्रचारक कुलानन्द पोखरियाल,श्रीनगर निरंकारी भवन के ब्रांच संयोजक हरिलाल शाह,मीडिया प्रभारी गम्मा सिंह,महिला इंचार्ज रूपा रावत तथा सेवादल इंचार्ज नरेंद्र सिंह नेगी,सेवादल से उर्मिला देवी सहित अनेक गणमान्य लोग उपस्थित रहे। सभी वक्ताओं ने बाबा हरदेव सिंह महाराज के व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर प्रकाश डालते हुए उनके आदर्शों को समाज के लिए अमूल्य धरोहर बताया। उन्होंने कहा कि समर्पण दिवस केवल एक स्मरण दिवस नहीं,बल्कि सेवा,त्याग,प्रेम और मानव कल्याण की भावना को आत्मसात करने का अवसर है। आज के समय में जब समाज विभिन्न प्रकार की सामाजिक और मानसिक चुनौतियों से गुजर रहा है,तब बाबा हरदेव सिंह महाराज के विचार मानवता को नई दिशा देने का कार्य कर रहे हैं। कार्यक्रम के अंत में सामूहिक लंगर एवं प्रीतिभोज का आयोजन किया गया,जिसमें सभी श्रद्धालुओं ने प्रेमपूर्वक प्रसाद ग्रहण किया। पूरे आयोजन में अनुशासन,सेवा भावना और आध्यात्मिक ऊर्जा का अद्भुत समन्वय देखने को मिला।
