Thursday 14/ 05/ 2026 

Bharat Najariya
जनपद में विकास और स्वरोजगार को मिलेगी नई रफ्तार-सीडीओ अशोक जोशी ने बैंकर्स को दिए सख्त निर्देशहिमालयी कृषि को नई उड़ान-हैप्रेक की वैज्ञानिक तकनीक से बच की खेती में क्रांतिगुरु हरदेव सिंह महाराज का समर्पण दिवस श्रद्धा,भक्ति और मानवता के संदेश के साथ मनाया गयाबेस अस्पताल में पूर्व सैनिकों का अनुशासन-शराबियों पर सख्ती,मरीजों की सुरक्षा सर्वोपरिजेसीज का 12वीं बोर्ड परीक्षा में ह्यूमिनिटीज एवं विज्ञान वर्ग में जिले में उत्कृष्ट परिणामभारतीय मजदूर संघ के कम्पनी गेट के बाहर लगे यूनियन के झंडे को सिडकुल प्रशासन द्वारा हटाने के विषय पर विधायक शिव अरोरा के नेतृत्व मे जिला अधिकारी को सौपा ज्ञापनविधायक बोले श्रमिकों के मन सम्मान से खिलाफ बर्दाश्त नहीं होगाजिला अधिकारी ने एडीएम के नेतृत्व मे कमेटी गठन के दिये निर्देश, जल्द होगा समधानदिल्ली पब्लिक स्कूल, रुद्रपुर के छात्रों ने फिर रचा इतिहास – कक्षा 12 बोर्ड परीक्षा में भी शानदार प्रदर्शनरुद्रपुर। दिल्ली पब्लिक स्कूल, रुद्रपुर के विद्यार्थियों ने CBSE कक्षा 12 बोर्ड परीक्षा 2026 में इतिहास दोहराते हुए विद्यालय को गौरवान्वित किया है। इस वर्ष का परीक्षा परिणाम शत-प्रतिशत सफलता के साथ-साथ उच्च उपलब्धियों का प्रतीक बनकर उभरा है, जिसने विद्यालय की शैक्षणिक गुणवत्ता और अनुशासन को एक बार फिर सिद्ध किया है।विद्यालय की मेधावी छात्रा सुनंदा खंडेलवाल ने ह्यूमैनिटीज वर्ग में 98.6% अंक प्राप्त कर शहर में सर्वोच्च स्थान हासिल किया। उनकी यह सफलता उनके अथक परिश्रम, दृढ़ संकल्प, समयबद्ध अध्ययन और उत्कृष्टता के प्रति समर्पण का प्रत्यक्ष उदाहरण है। उन्होंने न केवल विद्यालय, बल्कि पूरे क्षेत्र का नाम रोशन किया है।कॉमर्स वर्ग में लावेन्या गर्ग (97%) तथा नमन धौंडियाल (97%) ने भी उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए विद्यालय का गौरव बढ़ाया।विद्यालय के इन शानदार परिणामों से पूरे विद्यालय परिवार, अभिभावकों तथा क्षेत्र में अत्यंत गर्व और हर्ष का वातावरण व्याप्त है। यह उपलब्धि इस बात का प्रमाण है कि सही मार्गदर्शन, अनुशासन और निरंतर प्रयास से विद्यार्थी उच्चतम सफलता प्राप्त कर सकते हैं।इस अवसर पर विद्यालय के चेयरमैन श्री सुरजीत सिंह ग्रोवर जी, वाइस चेयरमैन श्री हरमन सिंह ग्रोवर जी एवं प्राचार्य श्री चेतन चौहान जी ने सभी विद्यार्थियों को हार्दिक बधाई देते हुए कहा कि यह सफलता विद्यार्थियों की कड़ी मेहनत, शिक्षकों के समर्पित मार्गदर्शन तथा विद्यालय के उत्कृष्ट एवं प्रेरणादायक शैक्षणिक वातावरण का परिणाम है।उन्होंने विशेष रूप से सुनंदा खंडेलवाल की उपलब्धि की सराहना करते हुए कहा कि इस प्रकार के परिणाम न केवल विद्यालय की प्रतिष्ठा को नई ऊँचाइयों तक पहुँचाते हैं, बल्कि अन्य विद्यार्थियों को भी बड़े लक्ष्य निर्धारित करने और उन्हें प्राप्त करने के लिए प्रेरित करते हैं। उन्होंने सभी विद्यार्थियों, शिक्षकों एवं अभिभावकों का आभार व्यक्त करते हुए उन्हें इस गौरवपूर्ण उपलब्धि के लिए धन्यवाद भी दिया। उन्होंने यह भी कहा कि दसवीं के ऐतिहासिक परिणाम के बाद बारहवीं का परिणाम भी विद्यालय के लिए अत्यंत गौरव का विषय है।विद्यालय प्रशासन एवं समस्त शिक्षकों ने विद्यार्थियों के उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए विश्वास व्यक्त किया कि वे भविष्य में भी इसी प्रकार उत्कृष्ट प्रदर्शन कर विद्यालय का नाम रोशन करते रहेंगे।यह सफलता इस तथ्य को पुनः स्थापित करती है कि दृढ़ निश्चय, अनुशासन, सकारात्मक सोच और निरंतर प्रयास से किसी भी लक्ष्य को प्राप्त किया जा सकता है।आर्ट ऑफ लिविंग की स्थानीय इकाई ने संस्था के संस्थापक श्री श्री रविशंकर जी के अवतरण दिवस के पूर्व दिवस पर राजकीय संयुक्त उपजिला चिकित्सालय में रक्तदान किया गया व रोगियों को फल वितरण किया गया।इस अवसर पर उपस्थित साधकों ने सेवा,समर्पण और सत्संग का संकल्प लिया गया।श्री श्री रविशंकर जी द्वारा मानवता के लिए किए जा रहे प्रयासों में स्वयं को आत्मसात करने की बात कही गई।रक्त दान में शामिल सुदर्शन बिष्ट,मंजू,वीना नेगी,मनीष पांडे,उर्मिला पांडे,आशीष पंवार,उषा चौधरी आदि का संस्था के सदस्यों का अस्पताल प्रबंधन ने सराहना की।संस्था ने इस अवसर पर रोगियों को फल वितरण भी किया गया। इस अवसर पर संस्था के कई स्वयं सेवी उपस्थित रहे।उत्तराखंड में फॉरेंसिक सेवाओं की डिजिटल क्रांति,मेडिकल कॉलेज श्रीनगर ने शुरू की हाईटेक एमएलसी व्यवस्थाजिला गंगा समिति की बैठक कलेक्ट्रेट सभागार में लेते हुए मुख्य विकास अधिकारी दिवेश शाशनी ने नगर निकायों को निर्देश दिये कि जनपद में शतप्रतिशत सरकारी व निजी सीवर टैंक वाहनों में जीपीएस अवश्य लगवाये व उनकी निगरानी भी करें। उन्होने कहा कि जो निजी सीवर टैंक वाहन पंजीकरण न कराकर कार्य कर रहे है उनके खिलाफ कड़ी कार्यवाही करते हुए उन्हे सीज किया जाये। उन्होने कहा कि सीवर टैंक वाहन एसटीपी प्लांट में ही सीवर डालें, अन्य जगह सीवर डालने वालों के खिलाफ कड़ी कार्यवाही की जाये। उन्होने नगर आयुक्त नगर निगम काशीपुर व अधिशासी अधिकारी नगर पालिका किच्छा को एक माह के भीतर कूड़ा निस्तारण कराने फोटोग्राफ भी उपलब्ध कराने के निर्देश दिये। उन्होने कहा कि लिगेसी वेस्ट को नियमित निस्तारण कराते रहे, कही भी कूड़ा डम्प न किया जाये। उन्होने खटीमा में एफएसटीपी प्लांट लगाने हेतु अधिशासी अभियंता पेयजल निगम स्टीमेट बनाकर शासन को पत्र भेजने के निर्देश दिये।मुख्य विकास अधिकारी ने जिला पंचायतराज अधिकारी को सख्त निर्देश दिये कि ग्राम पंचायतो में कूड़ा निस्तारण हेतु 15 दिन के भीतर नगर निकायों से ओएमयू कराकर अवगत कराना सुनिश्चित करें। उन्होने कहा कि ग्राम पंचायतो से निकलने वाले कूड़े को नजदीकी निकायो में भेजने के निर्देश डीपीआरओ को दिये। उन्होनेे क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड अधिकारी को निर्देश दिये कि औद्योगिक संस्थानों में नियमित निरीक्षण करें व बिना ट्रीट किये पानी यदि कोई नदी, नालों में पानी डालता है तो उसके खिलाफ कार्यवाही करना सुनिश्चित करें। उन्होने प्राइवेट व सकारी चिकित्सालयों से प्रतिदिन निकलने वाला बायोमेडिकल वेस्ट का मानकों के अनुसार निस्तारण कराने के निर्देश मुख्य चिकित्साधिकारी को दिये। उन्होने सभी विभागीय अधिकारियों को नमामि गंगे व एनजीटी के गाइड लाइनों का अनुपालन करने के निर्देश दिये।
राज्य

हिमालयी कृषि को नई उड़ान-हैप्रेक की वैज्ञानिक तकनीक से बच की खेती में क्रांति


श्रीनगर गढ़वाल। उत्तराखंड के हिमालयी क्षेत्रों में औषधीय एवं सुगंधित पौधों की खेती को नई दिशा देने वाला एक महत्वपूर्ण वैज्ञानिक शोध सामने आया है। हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय के उच्च शिखरीय पादप कार्यिकी शोध केंद्र (हैप्रेक) के वैज्ञानिकों ने औषधीय पौधा बच की खेती के लिए ऐसी आधुनिक तकनीक विकसित की है,जो उत्पादन,गुणवत्ता,लाभ और पर्यावरणीय संतुलन के लिहाज से बेहद प्रभावशाली साबित हुई है। हैप्रेक के वैज्ञानिकों द्वारा किए गए इस शोध में हाइड्रोपोनिक्स,एरोपोनिक्स और पारंपरिक भू-आधारित खेती प्रणाली (जियोपोनिक्स) का तुलनात्मक अध्ययन किया गया,जिसमें हाइड्रोपोनिक्स प्रणाली सर्वाधिक लाभकारी और टिकाऊ खेती प्रणाली के रूप में उभरकर सामने आई। इस महत्वपूर्ण शोध को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बड़ी मान्यता मिली है और इसके निष्कर्ष विश्व प्रसिद्ध शोध पत्रिका जर्नल ऑफ क्लीनर प्रोडक्शन में प्रकाशित हुए हैं। यह उपलब्धि केवल गढ़वाल विश्वविद्यालय ही नहीं,बल्कि पूरे उत्तराखंड और हिमालयी क्षेत्र के लिए गर्व का विषय मानी जा रही है। पर्यावरण विज्ञान,सतत विकास,स्वच्छ उत्पादन तकनीकों और जलवायु परिवर्तन जैसे विषयों पर आधारित यह जर्नल विश्व की प्रतिष्ठित शोध पत्रिकाओं में गिना जाता है,जिसे एल्सेवियर प्रकाशन समूह प्रकाशित करता है। वैज्ञानिक जगत में इस जर्नल में शोध प्रकाशित होना गुणवत्ता और उत्कृष्टता का प्रतीक माना जाता है। शोध में यह तथ्य सामने आया कि हाइड्रोपोनिक्स प्रणाली में बच के पौधों की वृद्धि अन्य प्रणालियों की तुलना में कहीं अधिक तेज और बेहतर रही। पौधों में पत्तियों की संख्या,पत्तियों की लंबाई तथा भूमिगत तने यानी राइजोम का उत्पादन सबसे अधिक दर्ज किया गया। साथ ही पौधों से प्राप्त आवश्यक औषधीय तेलों की गुणवत्ता और मात्रा भी श्रेष्ठ पाई गई। आर्थिक दृष्टि से भी यह प्रणाली अत्यंत लाभकारी साबित हुई। शोध के अनुसार हाइड्रोपोनिक्स प्रणाली में प्रति उत्पादन चक्र लगभग 592.47 हजार अमेरिकी डॉलर का सकल लाभ और 490.26 हजार अमेरिकी डॉलर का शुद्ध लाभ दर्ज किया गया,जो एरोपोनिक्स और पारंपरिक खेती दोनों से काफी अधिक है। हैप्रेक संस्थान के निदेशक डॉ.विजयकांत पुरोहित ने बताया कि हाइड्रोपोनिक्स प्रणाली में पोषक तत्वों का उपयोग अत्यंत दक्षता के साथ होता है,जिससे पौधों की वृद्धि और उत्पादन क्षमता दोनों में उल्लेखनीय वृद्धि होती है। उन्होंने कहा कि भविष्य में यह तकनीक हिमालयी क्षेत्रों में किसानों की आय बढ़ाने और टिकाऊ कृषि मॉडल विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। वैज्ञानिकों ने बताया कि एरोपोनिक्स प्रणाली ने जल उपयोग दक्षता के मामले में उत्कृष्ट प्रदर्शन किया। इस तकनीक में पानी की खपत काफी कम रही तथा पौधों की जड़ों का विकास बेहतर पाया गया। हालांकि इसमें ऊर्जा की मांग और कार्बन उत्सर्जन अपेक्षाकृत अधिक दर्ज किए गए। दूसरी ओर पारंपरिक जियोपोनिक्स प्रणाली में ऊर्जा की आवश्यकता कम रही,लेकिन उत्पादन क्षमता और पोषक तत्व उपयोग दक्षता सीमित पाई गई। शोध छात्रा डॉ.पल्लवी नौटियाल तथा वैज्ञानिक डॉ.विजयलक्ष्मी त्रिवेदी ने बताया कि जलवायु परिवर्तन,घटती कृषि भूमि और बढ़ती औषधीय पौधों की मांग के बीच मिट्टी रहित खेती प्रणालियां भविष्य की कृषि के लिए बेहद उपयोगी साबित हो सकती हैं। इन तकनीकों से जल संरक्षण,नियंत्रित पोषण प्रबंधन और पर्यावरणीय प्रभावों में कमी लाई जा सकती है। उन्होंने बताया कि शोध के दौरान पौधों की वृद्धि,जैवभार,पोषक तत्व अवशोषण तथा आवश्यक तेलों की संरचना का विस्तृत विश्लेषण किया गया।क्षइसमें बीटा-असारोन और अल्फा-असारोन जैसे महत्वपूर्ण औषधीय यौगिकों की मात्रा हाइड्रोपोनिक्स प्रणाली में सबसे अधिक दर्ज की गई। ये यौगिक एंटीऑक्सीडेंट,सूक्ष्मजीवरोधी तथा औषधीय गुणों के लिए प्रसिद्ध हैं और आयुर्वेदिक एवं फार्मास्यूटिकल उद्योगों में इनकी भारी मांग रहती है। वैज्ञानिकों का मानना है कि नियंत्रित वातावरण आधारित खेती प्रणालियां विशेष रूप से हिमालयी क्षेत्रों में औषधीय पौधों की व्यावसायिक खेती को नई गति दे सकती हैं। सीमित कृषि भूमि,जल संकट और बदलते मौसम के बीच यह तकनीक किसानों के लिए अधिक आय,कम जोखिम और टिकाऊ खेती का प्रभावी विकल्प बनकर उभर सकती है। हैप्रेक के पूर्व निदेशक प्रो.एम.सी.नौटियाल ने कहा कि यह शोध आधुनिक कृषि प्रणालियों को अधिक संसाधन-कुशल,पर्यावरण अनुकूल और टिकाऊ बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण योगदान देगा। उन्होंने कहा कि जल संरक्षण,ऊर्जा दक्षता और सतत विकास जैसे वैश्विक लक्ष्यों की प्राप्ति में इस प्रकार के वैज्ञानिक शोध भविष्य में निर्णायक भूमिका निभाएंगे। जर्नल ऑफ क्लीनर प्रोडक्शन एक प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय सहकर्मी-समीक्षित शोध पत्रिका है,जिसे एल्सेवियर प्रकाशन समूह द्वारा प्रकाशित किया जाता है। यह पत्रिका सतत विकास,पर्यावरण विज्ञान,स्वच्छ उत्पादन तकनीक,चक्रीय अर्थव्यवस्था,पर्यावरणीय मूल्यांकन और कॉर्पोरेट सामाजिक जिम्मेदारी जैसे विषयों पर शोध प्रकाशित करती है। क्यू-1 रैंकिंग और उच्च इंपैक्ट फैक्टर के कारण इसे पर्यावरण विज्ञान की अग्रणी पत्रिकाओं में शामिल किया जाता है।

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