मुख्यमंत्री घस्यारी कल्याण योजना से बदलेगी पहाड़ की तस्वीर,घर-घर पहुंचेगा पौष्टिक चारा,बढ़ेगी पशुपालकों की आय

श्रीनगर गढ़वाल। उत्तराखंड सरकार की महत्वाकांक्षी मुख्यमंत्री घस्यारी कल्याण योजना पर्वतीय क्षेत्रों की महिला पशुपालकों के लिए आर्थिक सशक्तिकरण का मजबूत आधार बन रही है। आधुनिक तकनीक से तैयार पौष्टिक चारे (साइलेज) की उपलब्धता से जहां पशुओं को वर्षभर संतुलित एवं गुणवत्तापूर्ण आहार मिल रहा है,वहीं दुग्ध उत्पादन में भी उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की जा रही है। योजना का उद्देश्य पर्वतीय क्षेत्रों में चारे के संकट को समाप्त कर पशुपालन को लाभकारी एवं आत्मनिर्भर व्यवसाय के रूप में स्थापित करना है। उत्तराखंड साइलेज उत्पादन एवं विपणन सहकारी संघ लिमिटेड के निदेशक कुशलानाथ ने बताया कि राज्य समेकित सहकारी विकास परियोजना के अंतर्गत प्रदेशभर में बहुउद्देशीय सहकारी समितियों के माध्यम से समूह आधारित मक्का की खेती कर आधुनिक तकनीक से साइलेज तैयार किया जा रहा है। इसके बाद विशेष निर्वात पैकिंग के माध्यम से इसे सुरक्षित रखकर प्रदेश के विभिन्न जनपदों तक पहुंचाया जा रहा है। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री घस्यारी कल्याण योजना के अंतर्गत वर्तमान में गढ़वाल मंडल के 96 तथा कुमाऊं मंडल के 85 वितरण केंद्रों के माध्यम से कुल 181 बहुउद्देशीय सहकारी समितियों तक साइलेज उपलब्ध कराया जा रहा है। इन केंद्रों से पर्वतीय क्षेत्रों के दस जनपदों के दूरस्थ गांवों तक भी पौष्टिक चारा पहुंचाया जा रहा है। आने वाले समय में शेष समितियों को भी इस योजना से जोड़कर पूरे प्रदेश में इसका व्यापक विस्तार किया जाएगा। कुशलानाथ ने बताया कि ऊधम सिंह नगर जनपद में कुमाऊं मंडल की पहली वृहद साइलेज निर्माण इकाई स्थापित की गई है। इसके शुरू होने से तराई-भावर और कुमाऊं क्षेत्र के पशुपालकों को स्थानीय स्तर पर गुणवत्तापूर्ण एवं ताजा साइलेज उपलब्ध हो रहा है। इससे परिवहन लागत में कमी आने के साथ-साथ समय पर चारे की उपलब्धता भी सुनिश्चित हो रही है। उन्होंने कहा कि आधुनिक तकनीक से तैयार यह साइलेज निर्वात पैकिंग के कारण लगभग एक वर्ष तक सुरक्षित रहता है तथा इसकी गुणवत्ता भी बनी रहती है। वर्षभर पौष्टिक चारा मिलने से गाय एवं भैंस के दूध उत्पादन में 15 से 20 प्रतिशत तक वृद्धि देखी जा रही है। इससे विशेष रूप से महिला पशुपालकों की आय में बढ़ोतरी हो रही है और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिल रही है। उन्होंने बताया कि प्रदेश सरकार तथा सहकारिता विभाग द्वारा अनुदान के माध्यम से साइलेज पशुपालकों को रियायती दरों पर उपलब्ध कराया जा रहा है। अब पहाड़ हो या मैदान,पशुपालकों को चारे की कमी की चिंता नहीं रहेगी। सहकारी समितियों के माध्यम से घर-घर तक पौष्टिक चारा पहुंचाने की व्यवस्था विकसित की जा रही है। निदेशक कुशलानाथ ने कहा कि जो पशुपालक इस योजना का लाभ लेना चाहते हैं,वे अपनी निकटतम बहुउद्देशीय सहकारी समिति से संपर्क कर सकते हैं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि मुख्यमंत्री घस्यारी कल्याण योजना आने वाले वर्षों में उत्तराखंड में दुग्ध उत्पादन बढ़ाने,पशुपालकों की आय में वृद्धि करने तथा ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने में मील का पत्थर साबित होगी। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी एवं सहकारिता विभाग के प्रयासों से संचालित यह योजना राज्य में पशुपालन के क्षेत्र में नई संभावनाओं के द्वार खोल रही है। सरकार का लक्ष्य है कि प्रदेश का कोई भी पशुपालक चारे के अभाव से प्रभावित न हो और प्रत्येक गांव तक गुणवत्तापूर्ण पौष्टिक चारा समय पर उपलब्ध कराया जा सके।
