Sunday 26/ 07/ 2026 

Bharat Najariya
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एमबीबीएस छात्रों के ज्ञानवर्धन और बेहतर चिकित्सक बनने की दिशा में प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिताएं हैं महत्वपूर्ण–डॉ.आशुतोष सयाना


श्रीनगर गढ़वाल। चिकित्सा शिक्षा केवल पुस्तकीय ज्ञान तक सीमित नहीं होती,बल्कि त्वरित निर्णय क्षमता,वैज्ञानिक सोच,तार्किक विश्लेषण और आत्मविश्वास ही एक विद्यार्थी को उत्कृष्ट चिकित्सक बनाते हैं। इसी उद्देश्य को साकार करने की दिशा में राजकीय मेडिकल कॉलेज श्रीनगर के हेमवती नन्दन बहुगुणा बेस चिकित्सालय में 39 वीं भारतीय शिशु रोग अकादमी (आईएपी) बाल रोग प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता का भव्य एवं सफल आयोजन किया गया। प्रतियोगिता में एमबीबीएस के स्नातक छात्र-छात्राओं ने बाल रोग विज्ञान सहित चिकित्सा विज्ञान के विभिन्न विषयों से जुड़े चुनौतीपूर्ण प्रश्नों का प्रभावशाली उत्तर देकर अपनी प्रतिभा,ज्ञान और तर्कशक्ति का उत्कृष्ट प्रदर्शन किया। प्रतियोगिता का शुभारम्भ मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ.आशुतोष सयाना ने किया। उन्होंने कहा कि इस प्रकार की शैक्षणिक प्रतियोगिताएं विद्यार्थियों के ज्ञान को व्यापक बनाने के साथ-साथ उनमें आत्मविश्वास,त्वरित निर्णय क्षमता तथा वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित करती हैं। उन्होंने कहा कि चिकित्सा के क्षेत्र में उत्कृष्टता प्राप्त करने के लिए केवल परीक्षा उत्तीर्ण करना पर्याप्त नहीं है,बल्कि रोगों की प्रकृति,कारणों और उपचार की वैज्ञानिक समझ विकसित करना भी उतना ही आवश्यक है। डॉ.सयाना ने कहा कि ऐसी प्रतियोगिताएं विद्यार्थियों को स्नातकोत्तर प्रवेश परीक्षाओं की तैयारी में भी महत्वपूर्ण सहयोग प्रदान करती हैं। उन्होंने सुझाव दिया कि भारतीय शिशु रोग अकादमी की तर्ज पर मेडिकल कॉलेज के अन्य विभागों में भी समय-समय पर विषय आधारित प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिताओं का आयोजन किया जाना चाहिए,जिससे विद्यार्थियों को बहुआयामी ज्ञान प्राप्त हो सके। उन्होंने बताया कि इस संबंध में सभी विभागों को आवश्यक निर्देश दिए जाएंगे। उन्होंने प्रतियोगिता में बाल रोग विज्ञान के साथ-साथ शल्य चिकित्सा से जुड़े प्रश्न शामिल किए जाने की सराहना करते हुए कहा कि एक कुशल चिकित्सक वही बन सकता है जो रोग के लक्षणों के साथ-साथ उसके मूल कारणों और वैज्ञानिक आधार को गहराई से समझे। उन्होंने विद्यार्थियों से आह्वान किया कि वे केवल उत्तर याद करने की बजाय चिकित्सा विज्ञान की मूल अवधारणाओं को समझने का प्रयास करें,क्योंकि यही समझ भविष्य में उन्हें संवेदनशील,दक्ष और सफल चिकित्सक बनाएगी। प्राचार्य ने सभी विद्यार्थियों को हृदय-फेफड़ा पुनर्जीवन (सीपीआर) का प्रशिक्षण अनिवार्य रूप से प्राप्त करने की सलाह देते हुए कहा कि आपातकालीन परिस्थितियों में यह प्रशिक्षण किसी भी व्यक्ति का जीवन बचाने में अत्यंत महत्वपूर्ण सिद्ध हो सकता है। उन्होंने बाल रोग विभाग द्वारा प्रतियोगिता के उत्कृष्ट आयोजन की मुक्तकंठ से सराहना की। प्रतियोगिता में डी टीम की कामनी बिष्ट एवं शिवानी नेगी ने शानदार प्रदर्शन करते हुए 80 अंक प्राप्त कर प्रथम स्थान हासिल किया। वहीं बी टीम की स्तुति उनियाल एवं वारा जोशी ने 59.5 अंक अर्जित कर द्वितीय स्थान प्राप्त किया। प्रथम स्थान प्राप्त करने वाली टीम अब देहरादून में आयोजित राज्य स्तरीय भारतीय शिशु रोग अकादमी बाल रोग प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता में राजकीय मेडिकल कॉलेज श्रीनगर का प्रतिनिधित्व करेगी। बाल रोग विभागाध्यक्ष प्रोफेसर सी.एम.शर्मा ने प्रतियोगिता की सफलता पर सभी प्रतिभागियों,शिक्षकों एवं आयोजन समिति का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इस प्रकार की शैक्षणिक प्रतियोगिताएं विद्यार्थियों को राज्य एवं राष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने का सशक्त मंच उपलब्ध कराती हैं। उन्होंने विद्यार्थियों से भविष्य में भी उत्साहपूर्वक ऐसी प्रतियोगिताओं में भाग लेने का आह्वान किया। कार्यक्रम का संचालन प्रश्नोत्तरी समन्वयक एसोसिएट प्रोफेसर डॉ.अंकिता गिरी ने किया। प्रतियोगिता में प्रश्नोत्तरी संचालक डॉ.अजय गोस्वामी तथा अंक निर्धारण की जिम्मेदारी आकाश एवं आशीष ने सफलतापूर्वक निभाई। समापन अवसर पर प्राचार्य डॉ.आशुतोष सयाना एवं चिकित्सा अधीक्षक डॉ.राकेश रावत ने विजेता टीमों को ट्रॉफी एवं सम्मान प्रदान कर उनके उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दीं। इस अवसर पर बाल रोग विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ.अशोक शर्मा,डॉ.किंगसुंग लौहान,डॉ.सर्वजीत,डॉ.मोहित सैनी सहित विभाग के चिकित्सक,शिक्षक एवं बड़ी संख्या में एमबीबीएस के छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे। यह आयोजन न केवल विद्यार्थियों की शैक्षणिक क्षमता को परखने का माध्यम बना,बल्कि चिकित्सा शिक्षा में गुणवत्तापूर्ण अध्ययन,स्वस्थ प्रतिस्पर्धा और उत्कृष्ट चिकित्सक तैयार करने की दिशा में राजकीय मेडिकल कॉलेज श्रीनगर की प्रतिबद्धता का भी सशक्त उदाहरण बनकर सामने आया।

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