स्वकर वसूली पर फिलहाल रोक-व्यापारियों के हितों की रक्षा के लिए महापौर आरती भण्डारी का बड़ा फैसला

श्रीनगर गढ़वाल। नगर निगम श्रीनगर में व्यावसायिक प्रतिष्ठानों पर स्वकर निर्धारण को लेकर चल रहे असंतोष के बीच महापौर आरती भण्डारी ने व्यापारियों को बड़ी राहत देते हुए महत्वपूर्ण घोषणा की है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जब तक व्यापारियों की सभी आपत्तियों,शंकाओं और व्यावहारिक समस्याओं का समाधान नहीं हो जाता,तब तक बढ़े हुए कमर्शियल स्वकर (सेल्फ असेसमेंट टैक्स) की वसूली नहीं की जाएगी। महापौर की इस घोषणा का नगर निगम सभागार में उपस्थित व्यापारियों ने जोरदार तालियों के साथ स्वागत किया। व्यापार सभा के महासचिव छवि अग्रवाल एवं कोषाध्यक्ष पंकज नेगी के आह्वान पर नगर निगम सभागार में आयोजित बैठक में नगर निगम अधिकारियों,व्यापार सभा पदाधिकारियों एवं शहर के वरिष्ठ व्यापारियों ने स्वकर निर्धारण,बाजार की यातायात व्यवस्था और अन्य जनसरोकारों से जुड़े विषयों पर गंभीरता से विचार-विमर्श किया। बैठक के दौरान व्यापार सभा ने महापौर एवं नगर आयुक्त को ज्ञापन सौंपते हुए कहा कि श्रीनगर एक पर्वतीय नगर है,जहां का व्यापार मैदानी शहरों की तुलना में सीमित और चुनौतीपूर्ण है। अधिकांश व्यापारी लघु एवं मध्यम वर्ग से जुड़े हैं,इसलिए वर्तमान स्वकर निर्धारण स्थानीय आर्थिक परिस्थितियों के अनुरूप नहीं है। व्यापारियों ने मांग की कि स्वकर निर्धारण की पुनः समीक्षा की जाए,स्थानीय भौगोलिक एवं आर्थिक स्थिति को आधार बनाया जाए,संयुक्त बैठक के माध्यम से सभी आपत्तियों का समाधान किया जाए तथा समीक्षा पूरी होने तक बढ़े हुए कर की वसूली स्थगित रखी जाए। महापौर आरती भण्डारी ने कहा कि व्यावसायिक स्वकर लागू करना शासन का निर्णय है और यह सभी नगर निगमों,नगर पालिकाओं एवं नगर पंचायतों में लागू किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि श्रीनगर नगर निगम ने प्रदेश में सबसे कम स्वकर दर निर्धारित की है,ताकि स्थानीय व्यापारियों पर न्यूनतम आर्थिक बोझ पड़े। उन्होंने कहा कि वह लगातार शासन और सरकार के समक्ष श्रीनगर के व्यापारियों के हितों की प्रभावी पैरवी कर रही हैं। महापौर ने कहा मैं श्रीनगर के प्रत्येक व्यापारी के साथ खड़ी हूं। हमारा उद्देश्य किसी पर अतिरिक्त बोझ डालना नहीं,बल्कि ऐसा समाधान निकालना है जो शासन के नियमों और व्यापारियों के हित-दोनों के अनुरूप हो। जब तक सभी आपत्तियों का समाधान नहीं हो जाता,तब तक बढ़े हुए कमर्शियल स्वकर की वसूली नहीं की जाएगी। उन्होंने यह भी घोषणा की कि शीघ्र ही व्यापार सभा के प्रतिनिधियों,नगर निगम अधिकारियों एवं जनप्रतिनिधियों की एक संयुक्त समिति गठित की जाएगी,जो स्वकर निर्धारण के प्रत्येक पहलू की समीक्षा कर व्यवहारिक एवं सर्वसम्मत समाधान प्रस्तुत करेगी। बैठक में बाजार की यातायात व्यवस्था पर भी विस्तार से चर्चा हुई। महापौर ने कहा कि नगर निगम,पुलिस प्रशासन और व्यापारियों के संयुक्त सहयोग से ऐसी कार्ययोजना तैयार की जाएगी,जिससे बाजार क्षेत्र में यातायात व्यवस्था सुचारु हो और व्यापारिक गतिविधियां भी प्रभावित न हों। नगर आयुक्त नुपुर वर्मा ने बताया कि बाजार क्षेत्र में मानसिक रूप से अस्वस्थ एवं निराश्रित व्यक्तियों की समस्या के समाधान के लिए पुलिस एवं समाज कल्याण विभाग के साथ समन्वय स्थापित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि अधिकांश निराश्रित गौवंशों को गौशाला भेजा जा चुका है तथा शेष समस्या के समाधान के लिए अभियान जारी रहेगा। यातायात व्यवस्था को लेकर भी पुलिस विभाग के साथ समन्वित कार्रवाई की जाएगी। कर निरीक्षक नवीन ने व्यापारियों को स्वकर प्रणाली की विस्तृत जानकारी देते हुए बताया कि यह व्यवस्था शासन के निर्देशों के अनुरूप लागू की जा रही है तथा सभी शंकाओं का समाधान पारदर्शिता के साथ किया जाएगा। बैठक के दौरान वरिष्ठ व्यापारी ओम प्रकाश गोदियाल ने नगर निगम की स्वच्छता व्यवस्था की खुले मंच से सराहना करते हुए कहा कि पिछले कुछ समय में श्रीनगर नगर की सफाई व्यवस्था में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। उन्होंने महापौर आरती भण्डारी एवं नगर निगम की पूरी टीम को इसके लिए बधाई दी। उनके संबोधन के बाद सभागार तालियों की गूंज से भर उठा और उपस्थित व्यापारियों ने भी महापौर के कार्यों की सराहना करते हुए उनका आभार व्यक्त किया। बैठक में नगर आयुक्त नुपुर वर्मा,व्यापार सभा महासचिव छवि अग्रवाल,कोषाध्यक्ष पंकज नेगी,निवर्तमान अध्यक्ष दिनेश असवाल,प्रवीण अग्रवाल,ओम प्रकाश गोदियाल,सुजीत अग्रवाल,बृजेश भट्ट,नवनीत जैन,सुरेंद्र चौहान,आशीष पंवार,जगमोहन कालरा,अनिल पंवार सहित नगर के अनेक वरिष्ठ व्यापारी,जनप्रतिनिधि,नगर निगम के अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे। बैठक का सबसे महत्वपूर्ण निष्कर्ष यही रहा कि नगर निगम और व्यापारियों के बीच टकराव नहीं,बल्कि संवाद,पारदर्शिता और आपसी विश्वास के आधार पर स्वकर विवाद का समाधान निकालते हुए श्रीनगर के व्यापारिक हितों की रक्षा सुनिश्चित की जाएगी।
