आस्था के धाम को मिलेगा नया वैभव-महाबगढ़ मंदिर के सौंदर्यीकरण को शासन की मंजूरी,धार्मिक पर्यटन को मिलेगी नई उड़ान

पौड़ी/श्रीनगर गढ़वाल। देवभूमि उत्तराखंड की पहचान केवल हिमालय की ऊंची चोटियां नहीं,बल्कि वे प्राचीन देवालय भी हैं जो सदियों से आस्था,संस्कृति और आध्यात्मिक चेतना के केंद्र रहे हैं। इन्हीं पावन धरोहरों को नई पहचान और आधुनिक सुविधाओं से जोड़ने की दिशा में राज्य सरकार ने एक और महत्वपूर्ण कदम बढ़ाया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की घोषणा के क्रम में जनपद पौड़ी गढ़वाल के यमकेश्वर विधानसभा क्षेत्र स्थित महाबगढ़ मंदिर के सौंदर्यीकरण एवं समग्र विकास कार्यों के लिए शासन स्तर से प्रशासनिक एवं श वित्तीय स्वीकृति प्रदान कर दी गई है। इस निर्णय से न केवल मंदिर परिसर के विकास का मार्ग प्रशस्त होगा,बल्कि पूरे क्षेत्र में धार्मिक पर्यटन को भी नई गति और नई पहचान मिलेगी। शासन से स्वीकृति मिलने के बाद अब जिलाधिकारी के निर्देशन में पर्यटन विभाग के माध्यम से इस महत्वाकांक्षी परियोजना का क्रियान्वयन गढ़वाल मंडल विकास निगम लिमिटेड द्वारा कराया जाएगा। परियोजना के अंतर्गत मंदिर परिसर का व्यापक सौंदर्यीकरण,श्रद्धालुओं के लिए आधुनिक एवं आवश्यक आधारभूत सुविधाओं का विकास,परिसर का व्यवस्थित निर्माण,सौंदर्य संवर्धन तथा श्रद्धालुओं की सुविधा से जुड़े विभिन्न कार्य निर्धारित गुणवत्ता मानकों के अनुरूप संपादित किए जाएंगे। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि निर्माण कार्य निर्धारित समय-सीमा के भीतर उच्च गुणवत्ता के साथ पूर्ण किया जाए तथा इसकी नियमित समीक्षा भी सुनिश्चित की जाए,ताकि विकास कार्यों में किसी प्रकार की शिथिलता न रहे। शासन की इस पहल का उद्देश्य धार्मिक स्थलों को केवल आस्था का केंद्र ही नहीं,बल्कि पर्यटन,संस्कृति और स्थानीय अर्थव्यवस्था के सशक्त आधार के रूप में विकसित करना भी है। परियोजना पूर्ण होने के उपरांत महाबगढ़ मंदिर आने वाले श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध होंगी,जिससे उनकी यात्रा अधिक सुगम,सुरक्षित और सुविधाजनक बनेगी। साथ ही मंदिर एक सुव्यवस्थित एवं आकर्षक धार्मिक पर्यटन स्थल के रूप में विकसित होगा,जिससे देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों की संख्या में वृद्धि होने की संभावना है। विशेषज्ञों का मानना है कि महाबगढ़ मंदिर के सौंदर्यीकरण से यमकेश्वर क्षेत्र की सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक पहचान को नई मजबूती मिलेगी। पर्यटन गतिविधियों के विस्तार से स्थानीय युवाओं के लिए स्वरोजगार एवं रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे। होटल,परिवहन,हस्तशिल्प,स्थानीय उत्पादों तथा अन्य पर्यटन आधारित गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलेगा, जिससे क्षेत्र की आर्थिक प्रगति को नई गति प्राप्त होगी। महाबगढ़ मंदिर के विकास की यह स्वीकृति प्रदेश सरकार की उस दूरदर्शी सोच का प्रमाण है,जिसके तहत उत्तराखंड के प्राचीन धार्मिक एवं सांस्कृतिक स्थलों को आधुनिक सुविधाओं से जोड़ते हुए उन्हें राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय पर्यटन मानचित्र पर सशक्त पहचान दिलाने का निरंतर प्रयास किया जा रहा है। श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों ने शासन के इस निर्णय का स्वागत करते हुए इसे क्षेत्र के सर्वांगीण विकास की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल बताया है।
