सावन के तीसरे सोमवार एवं नाग पंचमी पर श्रीक्षेत्र श्रीनगर शिवमय-21 प्रकार के फलों के रस से भगवान भोलेनाथ का दिव्य महाभिषेक

श्रीनगर गढ़वाल। देवभूमि उत्तराखंड की आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक नगरी श्रीनगर में सावन माह के तृतीय सोमवार एवं नाग पंचमी का पावन संयोग इस वर्ष भी पिछले वर्ष की भांति अत्यंत श्रद्धा,उल्लास और भव्यता के साथ मनाया गया। अलकनंदा तट के निकट तिवारी मोहल्ले में स्थित प्राचीन भगवान बद्रीविशाल लक्ष्मीनारायण मंदिर में श्रद्धा,भक्ति और सनातन संस्कृति का अनुपम संगम देखने को मिला। प्रातःकाल से ही मंदिर परिसर ॐ नमः शिवाय,हर-हर महादेव के गगनभेदी जयघोष,शंखनाद,घंटियों की मधुर ध्वनि एवं वैदिक ऋचाओं से गुंजायमान रहा,जिससे संपूर्ण वातावरण शिवमय एवं आध्यात्मिक ऊर्जा से आलोकित हो उठा। प्रातः ब्रह्ममुहूर्त से विद्वान आचार्यों एवं पंडितों द्वारा वैदिक विधि-विधान के अनुसार रुद्रपाठ,महामृत्युंजय मंत्रोच्चार,पूजा-अर्चना एवं विशेष अभिषेक अनुष्ठान प्रारंभ हुआ। मंदिर के प्रमुख श्रद्धालु मुनीन्द्र ज्ञानी एवं अन्य भक्तों के नेतृत्व में भगवान भोलेनाथ का 21 प्रकार के फलों के रस से दिव्य महाभिषेक किया गया। इसके उपरांत दुग्धाभिषेक,पंचामृताभिषेक एवं पवित्र जलाभिषेक के साथ बेलपत्र,धतूरा,भांग,पुष्प,चंदन एवं विभिन्न पूजन सामग्रियों से भगवान शिव का भव्य श्रृंगार किया गया। दिनभर मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा। दूर-दूर से पहुंचे भक्तों ने भगवान भोलेनाथ के दर्शन कर परिवार की सुख-समृद्धि,उत्तम स्वास्थ्य,प्रदेश की खुशहाली,अच्छी वर्षा,कृषि समृद्धि तथा समस्त विश्व के कल्याण की प्रार्थना की। महिलाओं द्वारा प्रस्तुत शिव भजन, संकीर्तन एवं मंगल गीतों ने पूरे वातावरण को भक्तिरस से सराबोर कर दिया। श्रद्धालु भक्ति में लीन होकर देर तक भजन-कीर्तन में सहभागी बने रहे। सावन का तीसरा सोमवार एवं नाग पंचमी का यह पावन संयोग सनातन धर्म में अत्यंत पुण्यदायी माना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन भगवान शिव का रुद्राभिषेक एवं नागदेवता का पूजन करने से जीवन के समस्त कष्ट दूर होते हैं,परिवार में सुख-शांति एवं समृद्धि का वास होता है तथा मनुष्य को आध्यात्मिक उन्नति का आशीर्वाद प्राप्त होता है। अलकनंदा नदी के पावन तट पर स्थित भगवान बद्रीविशाल लक्ष्मीनारायण मंदिर वर्षों से श्रीनगर की धार्मिक,सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक परंपराओं का प्रमुख केंद्र रहा है। यहां समय-समय पर आयोजित होने वाले वैदिक अनुष्ठान,भजन-कीर्तन एवं धार्मिक आयोजन समाज को संस्कृति,संस्कार और आध्यात्मिक मूल्यों से जोड़ने का कार्य करते हैं। मुनीन्द्र ज्ञानी ने कहा सावन भगवान भोलेनाथ की आराधना का सबसे पवित्र महीना है। यह आयोजन केवल पूजा-अर्चना तक सीमित नहीं,बल्कि हमारी सनातन संस्कृति,सामाजिक समरसता और आध्यात्मिक चेतना का जीवंत उत्सव है। भगवान शिव की कृपा से प्रत्येक परिवार में सुख,शांति,समृद्धि और आपसी प्रेम बना रहे, यही हमारी प्रार्थना है। आचार्य केदार पोखरियाल ने कहा सावन के सोमवार और नाग पंचमी का यह दिव्य संयोग अत्यंत फलदायी माना गया है। श्रद्धा एवं विश्वास के साथ भगवान शिव का अभिषेक करने वाले भक्तों पर महादेव की विशेष कृपा बनी रहती है। धर्म,सेवा और संस्कार की यह परंपरा निरंतर आगे बढ़ती रहे,यही हम सभी की कामना है। कार्यक्रम के समापन पर श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरित किया गया। संपूर्ण आयोजन श्रद्धा,अनुशासन और भक्तिभाव के साथ संपन्न हुआ। मंदिर परिसर में दिनभर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ रही और पूरा वातावरण शिवभक्ति,आध्यात्मिक चेतना और धार्मिक उल्लास से सराबोर रहा। इस अवसर पर पार्षद रमेश रमोला,सुरेश तिवारी,निशांत तिवारी,राकेश तिवारी,सुशील डोभाल,अर्जित काला,सतीश बहुगुणा,दीपक रावत,नीलम सिंह रावत,रितेश तिवारी,हनी तिवारी,जी.एस.भण्डारी सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। देवभूमि उत्तराखंड की सनातन संस्कृति,धार्मिक आस्था,सामाजिक समरसता और आध्यात्मिक परंपराओं को सशक्त बनाने वाला यह भव्य आयोजन श्रीनगर की सांस्कृतिक पहचान को एक बार फिर नई गरिमा प्रदान कर गया।
