Monday 10/ 08/ 2026 

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राज्य

वित्तीय साक्षरता से आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ते कदम-खिर्सू में ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक सशक्तिकरण का मिला मूलमंत्र


पौड़ी/श्रीनगर गढ़वाल। ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने और उन्हें आधुनिक बैंकिंग एवं वित्तीय सेवाओं से जोड़ने की दिशा में विकासखंड खिर्सू में एक महत्वपूर्ण पहल की गई। मुख्य विकास अधिकारी के निर्देशन में राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम) के अंतर्गत विकासखंड एवं सामुदायिक स्तरीय संघ (सीएलएफ) स्तर पर एक दिवसीय वित्तीय समावेशन अभिमुखीकरण कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला का उद्देश्य स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं को वित्तीय रूप से सशक्त बनाना,बैंकिंग सेवाओं के प्रति जागरूक करना तथा डिजिटल युग में बढ़ते वित्तीय एवं साइबर अपराधों से सुरक्षित रहने के उपायों की जानकारी देना रहा। कार्यशाला की अध्यक्षता खंड विकास अधिकारी शिव सिंह भंडारी ने की। उन्होंने कहा कि आर्थिक रूप से सशक्त महिला ही परिवार और समाज के विकास की मजबूत आधारशिला होती है। स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से महिलाओं में आत्मविश्वास,नेतृत्व क्षमता और आर्थिक आत्मनिर्भरता का निरंतर विकास हो रहा है। कार्यशाला में सामुदायिक स्तरीय संघ के पदाधिकारी,स्वयं सहायता समूहों की महिलाएं,बैंक सखी,बीमा सखी,वित्तीय सखी,बैंक मित्र सखी,वित्तीय साक्षरता एवं ऋण परामर्शदाता,वित्तीय साक्षरता केंद्र के प्रतिनिधि,विभिन्न बैंकों के अधिकारी,भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी) के प्रतिनिधि तथा एनआरएलएम के अधिकारी एवं कर्मचारी बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। कार्यशाला को संबोधित करते हुए वित्त समन्वयक धनंजय भट्ट ने राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के अंतर्गत संचालित वित्तीय समावेशन कार्यक्रम,सक्षम केंद्र तथा लखपति दीदी योजना की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने कहा कि वित्तीय समावेशन का उद्देश्य ग्रामीण परिवारों,विशेषकर महिलाओं को बैंकिंग,बचत,ऋण,बीमा और अन्य वित्तीय सेवाओं से जोड़कर उन्हें आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाना है। उन्होंने स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं से नियमित बचत करने,बैंक खातों का सक्रिय उपयोग करने,सरकारी योजनाओं का लाभ लेने तथा बीमा योजनाओं से जुड़ने का आह्वान किया। साथ ही उन्होंने डिजिटल लेनदेन के दौरान सतर्क रहने,ओटीपी,बैंक पासवर्ड और व्यक्तिगत जानकारी किसी से साझा न करने तथा साइबर एवं वित्तीय धोखाधड़ी से बचने के लिए विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी। धनंजय भट्ट ने कहा कि लखपति दीदी योजना महिलाओं की आय बढ़ाने और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। उन्होंने प्रतिभागियों से आग्रह किया कि कार्यशाला में प्राप्त जानकारी को अपने-अपने स्वयं सहायता समूहों एवं गांवों की अन्य महिलाओं तक भी पहुंचाएं,ताकि अधिक से अधिक परिवार इस अभियान से लाभान्वित हो सकें। भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी) के शाखा प्रबंधक ने बीमा सखी की भूमिका,जीवन बीमा योजनाओं के महत्व तथा सामाजिक सुरक्षा की आवश्यकता पर विस्तार से प्रकाश डाला। वहीं भारतीय स्टेट बैंक के प्रतिनिधि ने बैंकिंग सेवाओं,बैंक मित्र सखी की भूमिका,स्वयं सहायता समूहों की बैंक से संबद्धता,गैर-निष्पादित परिसंपत्तियों (एनपीए),डिजिटल बैंकिंग सेवाओं तथा वित्तीय धोखाधड़ी से बचाव के प्रभावी उपायों की जानकारी दी। कार्यशाला में महिलाओं को सुरक्षित डिजिटल भुगतान,ऑनलाइन बैंकिंग,मोबाइल बैंकिंग,यूपीआई लेनदेन और वित्तीय अनुशासन के महत्व से भी अवगत कराया गया। विशेषज्ञों ने कहा कि वित्तीय साक्षरता केवल बैंक खाता खोलने तक सीमित नहीं है,बल्कि सही वित्तीय निर्णय लेने,बचत बढ़ाने और परिवार की आर्थिक सुरक्षा सुनिश्चित करने का महत्वपूर्ण माध्यम भी है। कार्यशाला के अंत में प्रतिभागियों ने इस प्रकार के जागरूकता कार्यक्रमों को ग्रामीण क्षेत्रों में नियमित रूप से आयोजित किए जाने की आवश्यकता पर बल दिया। कार्यक्रम में उपस्थित महिलाओं ने वित्तीय समावेशन संबंधी विभिन्न जानकारियों को उपयोगी बताते हुए इन्हें अपने गांवों और स्वयं सहायता समूहों तक पहुंचाने का संकल्प लिया। यह कार्यशाला ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने,उन्हें स्वरोजगार और आत्मनिर्भरता की दिशा में प्रेरित करने तथा वित्तीय रूप से सुरक्षित समाज के निर्माण की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल साबित हुई।

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