यज्ञ की पूर्णाहुति पर रोपा समलौण पौधा-नागराजा डोली पूजन के बाद ग्रामीणों ने लिया पर्यावरण संरक्षण का संकल्प

श्रीनगर गढ़वाल। धार्मिक आस्था के साथ पर्यावरण संरक्षण का संदेश देते हुए जनपद पौड़ी गढ़वाल के विकासखंड थलीसैंण की पट्टी कण्डारस्यूं के ग्राम सरणा में सात दिवसीय यज्ञ के समापन अवसर पर समलौण पौधारोपण किया गया। नागराजा डोली के पूजन के उपरांत ग्रामीणों ने अनार का समलौण पौधा रोपकर धार्मिक आयोजन की स्मृति को प्रकृति संरक्षण से जोड़ने की अनूठी पहल की। इस अवसर पर हरीश,उनकी पत्नी बीरा देवी,बालक संदीप,शुभम,उनकी पत्नी गंगा देवी तथा डोली उपासक केदार असवाल ने सामूहिक रूप से अनार का समलौण पौधा रोपा। पौधारोपण के माध्यम से ग्रामीणों ने जहां सात दिवसीय यज्ञ की पावन स्मृति को हमेशा के लिए जीवंत रखने का प्रयास किया,वहीं आने वाली पीढ़ियों को पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी दिया। पौधे के संरक्षण एवं उसके पालन-पोषण की जिम्मेदारी हरीश ने ली। उन्होंने संकल्प लिया कि पौधे की नियमित देखभाल कर उसे वृक्ष के रूप में विकसित किया जाएगा,ताकि आने वाले समय में यह पौधा धार्मिक आयोजन की स्मृति के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण की प्रेरणा का भी प्रतीक बने। कार्यक्रम का संचालन समलौण आंदोलन के संयोजक पंडित महावीर प्रसाद नौड़ियाल ने किया। उन्होंने कहा कि धार्मिक एवं सामाजिक आयोजनों के अवसर पर पौधारोपण की परंपरा को बढ़ावा देने से समाज में पर्यावरण के प्रति जागरूकता पैदा होगी। उन्होंने कहा कि पेड़-पौधे मानव जीवन का अभिन्न हिस्सा हैं और जन्म से लेकर मृत्यु तक मनुष्य के जीवन में वृक्षों की महत्वपूर्ण भूमिका रहती है। उन्होंने कहा कि वृक्ष हमें जीवन के लिए आवश्यक ऑक्सीजन प्रदान करते हैं,इसलिए इन्हें प्राणवायु का आधार कहा जाता है। इसके अलावा वृक्ष प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रूप से मानव जीवन को अनेक प्रकार के लाभ प्रदान करते हैं। जल संरक्षण,मिट्टी संरक्षण,जैव विविधता और पर्यावरण संतुलन बनाए रखने में भी वृक्षों की महत्वपूर्ण भूमिका है। पंडित नौड़ियाल ने कहा कि तेजी से बदलते पर्यावरणीय परिस्थितियों के बीच प्रत्येक व्यक्ति का दायित्व है कि वह कम से कम एक पौधा रोपे और उसके संरक्षण की जिम्मेदारी भी स्वयं उठाए। केवल पौधारोपण करना पर्याप्त नहीं है,बल्कि पौधे को वृक्ष बनने तक सुरक्षित रखना ही वास्तविक पर्यावरण सेवा है। समलौण पौधारोपण की पहल के माध्यम से धार्मिक संस्कारों और पर्यावरण संरक्षण को एक-दूसरे से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। आयोजन के दौरान ग्रामीणों ने कहा कि किसी धार्मिक अनुष्ठान,मांगलिक अवसर अथवा सामाजिक कार्यक्रम की स्मृति में पौधा रोपने से उस अवसर की याद प्रकृति के साथ लंबे समय तक जुड़ी रहती है। अनार का पौधा रोपकर ग्रामीणों ने यह संदेश भी दिया कि धार्मिक आस्था तभी सार्थक है,जब उसके साथ प्रकृति और पर्यावरण के संरक्षण की भावना भी जुड़ी हो। इस अवसर पर आचार्य गौरस उनियाल,वीरेंद्र रावत सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे। समलौण पौधारोपण के साथ सात दिवसीय यज्ञ का समापन धार्मिक आस्था,पर्यावरण चेतना और सामाजिक जिम्मेदारी के सुंदर संगम के रूप में हुआ।
