बेस अस्पताल की डायलिसिस यूनिट अब हंस फाउंडेशन के हवाले-सितंबर से नई व्यवस्था

श्रीनगर गढ़वाल। राजकीय मेडिकल कॉलेज श्रीनगर के बेस चिकित्सालय में डायलिसिस करा रहे मरीजों के लिए बड़ी राहत की खबर है। अस्पताल की डायलिसिस यूनिट के संचालन की जिम्मेदारी अब हंस फाउंडेशन को सौंपी जाएगी। इस संबंध में राजकीय मेडिकल कॉलेज प्रशासन और हंस फाउंडेशन के बीच तीन वर्ष की अवधि के लिए समझौता (एमओयू) हो चुका है। आवश्यक औपचारिकताएं पूरी होने के बाद सितंबर के प्रथम सप्ताह के बाद हंस फाउंडेशन यूनिट का पूर्ण संचालन अपने अधीन लेगा। नई व्यवस्था का उद्देश्य डायलिसिस मरीजों को नियमित,निर्बाध,सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण उपचार सुविधा उपलब्ध कराना है। खास बात यह है कि व्यवस्था बदलने के बावजूद मरीजों से लिए जाने वाले शुल्क में कोई बदलाव नहीं होगा। आयुष्मान कार्ड से पात्र मरीजों को पूर्व की भांति निशुल्क डायलिसिस सुविधा मिलती रहेगी। बेस चिकित्सालय की डायलिसिस यूनिट वर्तमान में 10 बेड की क्षमता के साथ संचालित हो रही है। यहां श्रीनगर समेत गढ़वाल के विभिन्न पर्वतीय क्षेत्रों से आने वाले करीब 62 मरीज नियमित रूप से डायलिसिस करा रहे हैं। यूनिट में प्रत्येक माह 513 से अधिक डायलिसिस सत्र किए जा रहे हैं। ऐसे में यूनिट के संचालन की जिम्मेदारी हंस फाउंडेशन को मिलने को मरीजों के हित में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। डायलिसिस जैसी नियमित और जीवनरक्षक चिकित्सा सुविधा के लिए मरीजों को दूर-दराज के बड़े शहरों का रुख न करना पड़े,इसके लिए बेस अस्पताल की यह यूनिट गढ़वाल क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। नई व्यवस्था के बाद भी इस सेवा को लगातार और बेहतर तरीके से संचालित करने पर विशेष जोर रहेगा। एमओयू के तहत हंस फाउंडेशन केवल डायलिसिस यूनिट के संचालन तक सीमित नहीं रहेगा,बल्कि यूनिट की तकनीकी और मानव संसाधन संबंधी व्यवस्थाओं की जिम्मेदारी भी संभालेगा। डायलिसिस मशीनों के नियमित रखरखाव,कंज्यूमेबल सामग्री की उपलब्धता,तकनीकी जांच,फिटनेस परीक्षण और आवश्यक उपकरणों की कार्यक्षमता बनाए रखने का दायित्व फाउंडेशन का होगा। इसके साथ ही यूनिट के लिए नेफ्रोलॉजिस्ट,मेडिकल ऑफिसर,डायलिसिस टेक्नीशियन,नर्सिंग स्टाफ,वार्ड असिस्टेंट,हाउसकीपिंग स्टाफ और एडमिनिस्ट्रेटर सहित आवश्यक मानव संसाधन उपलब्ध कराया जाएगा। इससे मशीनों के रखरखाव के साथ-साथ मरीजों को समय पर डायलिसिस सुविधा उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी। एमओयू से पूर्व हंस फाउंडेशन की दो सदस्यीय टीम ने बेस चिकित्सालय की डायलिसिस यूनिट का निरीक्षण किया। फाउंडेशन के वरिष्ठ परियोजना प्रबंधक अमर सिंह और सहायक कार्यक्रम प्रबंधक वरुना सिंह ने यूनिट में उपलब्ध चिकित्सा सुविधाओं,मशीनों,मरीजों के लिए की गई व्यवस्थाओं और संचालन से जुड़े विभिन्न पहलुओं की जानकारी ली। इस दौरान टीम ने राजकीय मेडिकल कॉलेज श्रीनगर के प्राचार्य डॉ.सीएमएस रावत और चिकित्सा अधीक्षक डॉ.ए.एन.पांडेय के साथ यूनिट का निरीक्षण किया। टीम ने यूनिट की व्यवस्थाओं का जायजा लेने के साथ ही भविष्य में संचालन को लेकर आवश्यक बिंदुओं पर चर्चा की। उपलब्ध व्यवस्थाओं को देखकर टीम ने संतोष भी व्यक्त किया। अस्पताल प्रशासन के अनुसार हंस फाउंडेशन के अधीन संचालन शुरू होने के बाद मरीजों को मिलने वाली डायलिसिस सुविधा के शुल्क में किसी प्रकार का बदलाव नहीं किया जाएगा। आयुष्मान कार्ड से पात्र मरीजों को डायलिसिस की सुविधा निशुल्क मिलती रहेगी। अस्पताल प्रशासन का कहना है कि नई व्यवस्था का मूल उद्देश्य मरीजों को किसी प्रकार की असुविधा दिए बिना डायलिसिस सेवा को और अधिक व्यवस्थित करना है। मशीनों के नियमित रखरखाव और पर्याप्त मेडिकल एवं नर्सिंग स्टाफ की उपलब्धता से सेवा की निरंतरता बनाए रखने में मदद मिलेगी। बेस अस्पताल की डायलिसिस यूनिट को हंस फाउंडेशन के अधीन संचालित किए जाने की कवायद पूर्व चिकित्सा शिक्षा मंत्री डॉ.धन सिंह रावत के कार्यकाल में शुरू हुई थी। इसके बाद विभागीय स्तर पर प्रक्रिया को लगातार आगे बढ़ाया गया। वर्तमान में चिकित्सा शिक्षा एवं चिकित्सा स्वास्थ्य मंत्री सुबोध उनियाल के कार्यकाल में यह प्रक्रिया एमओयू तक पहुंची है। चिकित्सा शिक्षा निदेशक डॉ.आशुतोष सयाना की ओर से विभागीय स्तर पर आवश्यक पहल और विभिन्न औपचारिकताओं को आगे बढ़ाया गया,जिसके बाद अस्पताल प्रशासन और हंस फाउंडेशन के बीच समझौता संभव हो पाया। राजकीय मेडिकल कॉलेज श्रीनगर के प्राचार्य डॉ.सीएमएस रावत ने कहा कि राजकीय आयुर्विज्ञान शोध संस्थान के अधीन बेस चिकित्सालय की डायलिसिस यूनिट के संचालन के संबंध में हंस फाउंडेशन के साथ तीन वर्ष का एमओयू किया गया है। इसका उद्देश्य मरीजों को पूर्व की भांति नियमित और बेहतर डायलिसिस सुविधा उपलब्ध कराना है। हंस फाउंडेशन के अधीन संचालन होने के बाद भी मरीजों के शुल्क में कोई अंतर नहीं आएगा और आयुष्मान कार्ड के माध्यम से पात्र मरीजों को निशुल्क डायलिसिस सुविधा मिलती रहेगी। मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराना अस्पताल प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है। सरकार की ओर से कहा गया है कि बेस अस्पताल श्रीनगर की डायलिसिस यूनिट का संचालन हंस फाउंडेशन को सौंपना मरीजों के हित में महत्वपूर्ण कदम है। इससे गढ़वाल के पर्वतीय क्षेत्रों के मरीजों को स्थानीय स्तर पर ही बेहतर डायलिसिस सुविधा उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी और उन्हें उपचार के लिए दूर-दराज के शहरों की दौड़ नहीं लगानी पड़ेगी। सरकार का लक्ष्य प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं को लगातार मजबूत करना है। हंस फाउंडेशन के सहयोग से डायलिसिस यूनिट के संचालन में व्यवस्थागत सुधार के साथ मरीजों को अधिक गुणवत्तापूर्ण एवं निर्बाध सेवा उपलब्ध कराने की उम्मीद है। निरीक्षण के दौरान डायलिसिस यूनिट के नर्सिंग इंचार्ज मोहर सिंह,नर्सिंग अधिकारी जितेंद्र सिंह,रेनूका,नीलम,नैन्सी,अनिता,नरेश भट्ट सहित अन्य कर्मचारी मौजूद रहे।
