हिमालय की रक्षा का संकल्प लेकर गूंजा सौडू क्वीसू विद्यालय-नौनिहालों ने पढ़ी हिमालय प्रतिज्ञा

श्रीनगर गढ़वाल। हिमालय केवल पर्वतों की श्रृंखला नहीं,बल्कि देश की जीवनरेखा,जलवायु संतुलन और करोड़ों लोगों के जीवन का आधार है। इसी भावना को जन-जन तक पहुंचाने और भावी पीढ़ी में हिमालय एवं पर्यावरण संरक्षण की चेतना जागृत करने के उद्देश्य से 1 सितंबर 2026 को जनपद पौड़ी गढ़वाल के विकासखंड खिर्सू के अंतर्गत राजकीय पूर्व माध्यमिक विद्यालय सौडू क्वीसू में हिमालय प्रतिज्ञा का वाचन किया गया। विद्यालय में आयोजित कार्यक्रम के दौरान अध्यापिका सुबोध चमोली द्वारा हिमालय प्रतिज्ञा का वाचन कराया गया। छात्र-छात्राओं एवं विद्यालय परिवार ने हिमालय की गरिमा,प्राकृतिक संपदा और पर्यावरण की रक्षा के प्रति जिम्मेदारी निभाने का संकल्प लिया। हिमालय प्रतिज्ञा के माध्यम से विद्यार्थियों को बताया गया कि हिमालय देश का मस्तक होने के साथ-साथ दुनिया के बड़े भूभाग के लिए जलवायु,जल-जीवन और पर्यावरण का महत्वपूर्ण आधार है। इसके गगनचुंबी शिखर हमें निरंतर नई ऊंचाइयां छूने की प्रेरणा देते हैं। प्रतिज्ञा के दौरान विद्यालय परिवार ने संकल्प लिया कि हिमालय की रक्षा के लिए हरसंभव प्रयास किया जाएगा तथा ऐसा कोई कार्य नहीं किया जाएगा,जिससे हिमालय को किसी प्रकार का नुकसान पहुंचे। इस अवसर पर पर्यावरण संरक्षण,स्वच्छता,प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण तथा आने वाली पीढ़ियों के लिए हिमालय को सुरक्षित रखने की आवश्यकता पर भी जोर दिया गया। कार्यक्रम ने यह संदेश दिया कि पर्यावरण संरक्षण की वास्तविक शुरुआत बचपन से ही संस्कारों के रूप में होनी चाहिए। विद्यालयों में विद्यार्थियों को हिमालय,जलस्रोतों,जंगलों और जैव विविधता के संरक्षण के प्रति जागरूक करना आने वाले समय में समाज के लिए बेहद महत्वपूर्ण साबित होगा। विद्यालय की अभिभावक संघ की अध्यक्षा सुनीता देवी सहित प्रधानाध्यापक शकरमणी थपलियाल,माधुरी गैरोला,सुबोध चमोली,शैफाली कुवंर,अनुज नौडियाल,भोजनमाता गीता देवी एवं समस्त छात्र-छात्राओं में राधिका,अमन,अनमोल,आयुष,अनुष्का,परिधि,भाष्कर और निधि मौजूद रहे। सौडू क्वीसू विद्यालय में पढ़ी गई हिमालय प्रतिज्ञा ने यह संदेश दिया कि हिमालय की सुरक्षा केवल सरकार या किसी एक संस्था की जिम्मेदारी नहीं,बल्कि प्रत्येक नागरिक का नैतिक दायित्व है। बच्चों द्वारा लिया गया यह संकल्प समाज में पर्यावरण संरक्षण की चेतना को मजबूत करने की दिशा में एक सार्थक पहल के रूप में देखा जा रहा है।
