Friday 04/ 09/ 2026 

Bharat Najariya
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राज्य

आरएच असंगति से जूझ रहे नवजात को दो बार चढ़ाया गया नया खून-बेस अस्पताल श्रीनगर के डॉक्टरों ने बचाई नन्ही जान


श्रीनगर गढ़वाल। जन्म के बाद तेजी से बढ़ता पीलिया,शरीर में लाल रक्त कोशिकाओं का तेजी से टूटना और गंभीर रक्त संक्रमण,नवजात की हालत इतनी नाजुक हो गई थी कि हर पल उसके जीवन पर खतरा मंडरा रहा था। ऐसे बेहद चुनौतीपूर्ण समय में हेमवती नंदन बहुगुणा बेस अस्पताल श्रीनगर के बाल रोग विभाग की चिकित्सकीय टीम ने अपनी विशेषज्ञता,तत्परता और लगातार निगरानी के बल पर नवजात को नया जीवन देने में सफलता हासिल की। गंभीर स्थिति को देखते हुए नवजात का दो बार एक्सचेंज ट्रांसफ्यूजन यानी रक्त का आदान-प्रदान किया गया। इसके साथ ही उसे आईवीआईजी दवा की दो खुराक दी गईं। हालत अत्यधिक गंभीर होने पर दो बार कृत्रिम सांस देने वाली मशीन का सहारा भी लेना पड़ा। कई दिनों तक चले गहन उपचार और निरंतर निगरानी के बाद आखिरकार नवजात की हालत में लगातार सुधार हुआ और पूरी तरह स्वस्थ होने पर उसे अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। अपने बच्चे को स्वस्थ अवस्था में अस्पताल से घर ले जाते समय पिता गिरीश पुरोहित की आंखों में खुशी के आंसू छलक उठे। परिवार ने चिकित्सकों एवं अस्पताल के समस्त स्टाफ का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि मुश्किल समय में डॉक्टरों ने जिस तत्परता और समर्पण के साथ उपचार किया,वह उनके लिए जीवनभर यादगार रहेगा। श्रीकोट श्रीनगर निवासी गिरीश पुरोहित की पत्नी करिश्मा ने 16 अगस्त को बेस अस्पताल श्रीनगर में नवजात शिशु को जन्म दिया। प्रसव के बाद जांच में सामने आया कि मां का रक्त समूह आरएच निगेटिव,जबकि नवजात का रक्त समूह आरएच पॉजिटिव था। दोनों के रक्त समूह में इस असंगति के चलते नवजात के शरीर में लाल रक्त कोशिकाएं तेजी से टूटने लगीं। इसके परिणामस्वरूप रक्त में बिलीरुबिन का स्तर तेजी से बढ़ा और नवजात को गंभीर पीलिया की स्थिति का सामना करना पड़ा। चिकित्सकों के अनुसार मां और बच्चे के रक्त समूह में इस प्रकार की असंगति को आरएच असंगति कहा जाता है। गंभीर स्थिति में इसका समय पर उपचार और लगातार चिकित्सकीय निगरानी बेहद जरूरी होती है। नवजात की गंभीर स्थिति को देखते हुए उसे बेस अस्पताल के बाल रोग विभाग की नवजात गहन चिकित्सा इकाई (एनआईसीयू/नीक्कू वार्ड) में भर्ती कराया गया। बाल रोग विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ.सीएम शर्मा एवं एसोसिएट प्रोफेसर डॉ.अंकिता गिरी की देखरेख में उपचार शुरू किया गया। चिकित्सकों ने बच्चे की स्थिति पर लगातार नजर रखी। जांच के दौरान नवजात में गंभीर रक्त संक्रमण की समस्या भी सामने आई,जिससे उपचार और अधिक चुनौतीपूर्ण हो गया। एसोसिएट प्रोफेसर डॉ.अंकिता गिरी ने बताया कि बच्चे में पीलिया लगातार बढ़ रहा था और रक्त की लाल कोशिकाएं तेजी से टूट रही थीं। गंभीर स्थिति को देखते हुए दो बार एक्सचेंज ट्रांसफ्यूजन किया गया। इसके साथ ही आईवीआईजी की दो खुराक भी दी गईं। हालत बिगड़ने पर नवजात को दो बार कृत्रिम सांस देने वाली मशीन पर रखा गया। चिकित्सकों की सतत निगरानी, समय पर लिए गए उपचारात्मक निर्णय और लगातार उपचार के बाद धीरे-धीरे नवजात की स्थिति में सुधार आने लगा। डॉ.अंकिता गिरी ने बताया कि नवजात में गंभीर पीलिया का समय पर उपचार अत्यंत आवश्यक है। यदि रक्त में बिलीरुबिन की मात्रा बहुत अधिक बढ़ जाए और उसे समय रहते नियंत्रित न किया जाए तो बिलीरुबिन मस्तिष्क तक पहुंचकर उसे नुकसान पहुंचा सकता है। इससे बच्चे में गंभीर न्यूरोलॉजिकल समस्याएं उत्पन्न होने के साथ ही जीवन पर भी खतरा पैदा हो सकता है। उन्होंने कहा कि इस नवजात को समय पर अस्पताल लाकर उपचार मिलने से गंभीर स्थिति को नियंत्रित करने में मदद मिली। लगातार उपचार एवं निगरानी के बाद अब बच्चा पूरी तरह स्वस्थ है। मां का दूध पीना शुरू किया,बढ़ने लगा वजन कई दिनों तक चले उपचार के बाद नवजात की हालत में लगातार सुधार हुआ। बच्चे का वजन बढ़ने लगा और उसने मां का दूध भी पीना शुरू कर दिया। स्वास्थ्य में संतोषजनक सुधार होने के बाद चिकित्सकों ने उसे अस्पताल से छुट्टी दे दी। बच्चे को स्वस्थ देखकर परिवार में खुशी का माहौल है। परिजनों ने बाल रोग विभाग के चिकित्सकों,नर्सिंग अधिकारियों और अस्पताल के अन्य कर्मचारियों के प्रति आभार जताया। इस जटिल उपचार में बाल रोग विभाग के एसआर डॉ.अजय गोस्वामी,जेआर डॉ.महेश,डॉ.धीरज,डॉ.अंजलि एवं डॉ.दानिश सहित नर्सिंग अधिकारियों ने महत्वपूर्ण सहयोग दिया। अस्पताल प्रशासन की ओर से डिप्टी एमएस डॉ.दीपा हटवाल सहित पूरी टीम ने उपचार एवं अस्पताल की व्यवस्थाओं में आवश्यक सहयोग प्रदान किया। बाल रोग विभाग की एसोसिएट प्रोफेसर डॉ.अंकिता गिरी ने आरएच निगेटिव रक्त समूह वाली महिलाओं को गर्भावस्था के दौरान विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी है। उन्होंने कहा कि ऐसी महिलाओं को स्त्री रोग विशेषज्ञ की सलाह के अनुसार एंटी-डी टीका जरूर लगवाना चाहिए। उन्होंने बताया कि एंटी-डी टीका आरएच असंगति के कारण भविष्य में होने वाली जटिलताओं के जोखिम को कम करने में मदद करता है और नवजात को जन्म के बाद होने वाली गंभीर बीमारी से बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इसलिए आरएच निगेटिव रक्त समूह वाली गर्भवती महिलाओं को नियमित जांच कराने के साथ विशेषज्ञ चिकित्सक की सलाह का पालन करना चाहिए। राजकीय मेडिकल कॉलेज श्रीनगर के प्राचार्य डॉ.सीएमएस रावत ने बाल रोग विभाग की चिकित्सकीय टीम को नवजात को नया जीवन देने पर बधाई देते हुए कहा कि समय पर उपचार,चिकित्सकों की तत्परता एवं पूरी टीम की मेहनत के चलते जटिल स्थिति में भी नवजात का सफल उपचार संभव हुआ। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड सरकार द्वारा उपलब्ध कराई जा रही बेहतर चिकित्सा सुविधाओं के चलते अब रुद्रप्रयाग,चमोली,टिहरी और पौड़ी जनपद के दूरस्थ एवं दुर्गम क्षेत्रों से आने वाले मरीजों को भी बेहतर एवं विशेषज्ञ चिकित्सा उपचार उपलब्ध हो रहा है। डॉ.रावत ने कहा कि बेस अस्पताल में मरीजों को विशेषज्ञ चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने के लिए चिकित्सक एवं स्वास्थ्यकर्मी दिन-रात पूरी प्रतिबद्धता के साथ सेवा कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि गंभीर मरीजों को समय पर उपचार उपलब्ध कराना और उन्हें बेहतर स्वास्थ्य के साथ घर भेजना ही चिकित्सा टीम की सबसे बड़ी सफलता है। बेस अस्पताल श्रीनगर में इस जटिल नवजात का सफल उपचार पर्वतीय क्षेत्रों में विशेषज्ञ चिकित्सा सेवाओं के विस्तार और चिकित्सकीय टीम की तत्परता की एक महत्वपूर्ण मिसाल के रूप में सामने आया है।

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