Monday 14/ 09/ 2026 

Bharat Najariya
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राज्य

मोबाइल को छोड़ अपने लिए भी समय निकालें युवा


देवप्रयाग/श्रीनगर गढ़वाल। केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय श्री रघुनाथ कीर्ति परिसर में छात्रों को मोबाइल के दुष्प्रभाव बताए गए। वक्ताओं ने कहा कि आज की युवा पीढ़ी अपना अधिकांश समय सोशल मीडिया पर गंवा रही है। इस माध्यम से ज्ञान लेना चाहिए,पर उस पर पूरी तरह निर्भर नहीं रहना चाहिए। युवा प्रबोधन नामक संगोष्ठी में चिकित्सा अधिकारी डॉ.रक्षा रतूड़ी ने कहा कि जेन जी को लेकर कुछ लोग उत्साहित हैं,परंतु चिंता इस बात की है कि वह पीढ़ी किसके अप्रत्यक्ष नेतृत्व पर चल रही है। ये बच्चे सांस्कृतिक मूल्यों की कितनी रक्षा कर रहे हैं और उनमें सहनशीलता कितनी है,इसकी समीक्षा की जानी आवश्यक है। डॉ.रक्षा ने कहा कि भारतीय संस्कृति गला काटने की संस्कृति नहीं,बल्कि सुनने और प्रश्न करके ज्ञान ग्रहण करने की संस्कृति है। हमें अपनी क्षमताओं को पहचानना होगा,नकल के कृत्यों से बचना होगा। आज नशे,मोबाइल और अति आधुनिकता ने बच्चों को हताश,निराश और अवसादग्रस्त कर दिया है। यह राष्ट्र की शक्ति को खोखला कर रहा है। इसका समाधान आवश्यक है। बच्चे दिन में मोबाइल को छोड़ कुछ घंटे अपने लिए अलग से निकालकर आत्मावलोकन अवश्य करें। संतोष पंत ने कहा कि युवा पीढ़ी को अपने विवेक के विकास पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए। स्वस्थ मन: स्थिति के लिए शरीर का स्वस्थ होना भी आवश्यक है। स्वस्थ वातावरण इसमें अहम भूमिका निभाता है। आज राष्ट्र को इसी की आवश्यकता है। अध्यक्षता करते हुए निदेशक प्रो.पीवीबी सुब्रह्मण्यम ने कहा कि सनातन संस्कृति की जड़ें बहुत गहरी और मजबूत हैं,यह बड़े हमले सहन करने की सामर्थ्य रखती है। हमारी युवा पीढ़ी सांस्कृतिक मूल्यों से दूर जा रही है,इससे उसे बचाना होगा। भटकते युवाओं को समय पर सही राह दिखाना आवश्यक है। यह हर नागरिक का कर्तव्य है। इस अवसर पर सहनिदेशिका प्रो.कोंडी,डॉ.शैलेंद्र नारायण कोटियाल,डॉ.सुशील प्रसाद बडोनी,डॉ.मनीषा आर्या,डॉ.अनिल कुमार,डॉ.सुमिति सैनी आदि उपस्थित थे।

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