Monday 25/ 05/ 2026 

Bharat Najariya
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इनफर्टिलिटी के ट्रीटमेंट में इमेजिंग की महत्वपूर्ण भूमिकाः प्रो. राजुल रस्तोगीइनफर्टिलिटी के ट्रीटमेंट में इमेजिंग की महत्वपूर्ण भूमिकाः प्रो. राजुल रस्तोगी

जीएपीआईओ की ओर से ऑनलाइन आयोजित जीएपीआईओ रेडियोलॉजी इंटरनेशनल लेक्चर सीरीज में रोल ऑफ इमेजिंग इन डायग्नोसिस एंड ट्रीटमेंट ऑफ फीमेल इनफर्टिलिटी पर तीर्थंकर महावीर हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर, मुरादाबाद में रेडियोडायग्नोसिस विभाग के सीनियर रेडियोलॉजिस्ट प्रो. राजुल रस्तोगी ने दिया ऑनलाइन व्याख्यान

तीर्थंकर महावीर हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर, मुरादाबाद में रेडियोडायग्नोसिस विभाग के सीनियर रेडियोलॉजिस्ट प्रो. राजुल रस्तोगी ने कहा, इनफर्टिलिटी-बांझपन के निदान और उपचार में इमेजिंग की महत्वपूर्ण भूमिका है। इमेजिंग बांझपन के मूल्यांकन, प्रबंधन और उपचार का केन्द्र बिन्दु है। इसके लिए अनेक इमेजिंग विकल्प हैं, जैसे-2डी एंड 3डी अल्ट्रासाउंड, एसआईएस, सोनोहिस्टेरोसाल्पिंगोग्राफी, हिस्टेरोसाल्पिंगोग्राफी, एमआरआई आदि। इन इमेजिंग तकनीकों में बांझपन से संबंधित गर्भाशय और डिम्बग्रंथि विकृति के निदान के लिए अल्ट्रासाउंड सबसे प्रभावी तरीका है। एसआईएस, सोनोहिस्टेरोसाल्पिंगोग्राफी, हिस्टेरोसाल्पिंगोग्राफी और एमआरआई इनफर्टिलिटी के बारे में अतिरिक्त जानकारी प्रदान करने में मदद करते हैं। प्रो. राजुल ग्लोबल एसोसिएशन ऑफ फिजियियंस ऑफ इंडियन ओरिजन-जीएपीआईओ की ओर से ऑनलाइन आयोजित जीएपीआईओ रेडियोलॉजी इंटरनेशनल लेक्चर सीरीज में रोल ऑफ इमेजिंग इन डायग्नोसिस एंड ट्रीटमेंट ऑफ फीमेल इनफर्टिलिटी पर बोल रहे थे। जीएपीआईओ रेडियोलॉजी इंटरनेशनल लेक्चर सीरीज के दौरान सवालों का दौर भी चला। सिडनी में कार्यरत एवम् जीएपीआईओ की ईसी मेंबर डॉ. अंजू अग्रवाल ने सभी अतिथियों का स्वागत करते हुए लेक्चर सीरीज के बारे में विस्तार से प्रकाश डाला। अंत में जीएपीआईओ के एडवाइजर डॉ. सुशील जैन ने वोट ऑफ थैंक्स दिया।

प्रश्नावली सत्र में जीएपीआईओ की चेयरपर्सन एवम् डॉ. राम मनोहर लोहिया, नई दिल्ली की सीनियर रेडियोलॉजिस्ट डॉ. अखिला प्रसाद और जीएपीआईओ की मोडरेटर एंड सीनियर रेडियोलॉजिस्ट डॉ. वीनिता सरन की मौजूदगी रही। प्रो. राजुल ने बताया, महिलाओं के बांझपन में ट्यूबल और पेरिटुबल असामान्यताओं से लेकर गर्भाशय, गर्भाशय ग्रीवा और डिम्बग्रंथि सरीखे विकार हो सकते हैं। गर्भाशय या डिम्बग्रंथि असामान्यताओं की पहचान करने के लिए रोगी के फॉलिक्यूलर फेस के दौरान एक बेसलाइन अल्ट्रासाउंड किया जाता है। उल्लेखनीय है, प्रो. रस्तोगी को रेडियोलॉजी में 23 सालों का लंबा अनुभव है। वह 09 बरस से टीएमयू में अपनी सेवाएं दे रहे है। प्रो. राजुल अब तक 15 देशों की विजिट कर चुके हैं। वह करीब 110 विभिन्न नेशनल और इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस में लगभग 185 रिसर्च पेपर प्रस्तुत कर चुके हैं। प्रो. रस्तोगी के 195 पब्लिकेशन्स भी नेशनल और इंटरनेशनल स्तर पर प्रकाशित हो चुके हैं। लगभग 712 से अधिक शोधार्थी इनका संदर्भ ले चुके हैं। इसके अलावा प्रो. राजुल के करीब 15 टेक्सट बुक्स में करीब 55 चौप्टर्स भी प्रकाशित हैं। इंटरनेशनल स्तर के छह और नेशनल स्तर के करीब एक दर्जन से अधिक अवार्ड भी प्रो. रस्तोगी की झोली में शामिल हैं।