Sunday 26/ 07/ 2026 

Bharat Najariya
चीनी मिल के कर्मचारियों की समस्याओं के समाधान के लिए शिष्ट मंडल ने मुख्यमंत्री से की मुलाकातअमर बलिदानी श्रीदेव सुमन को उत्तरकाशी पुलिस का नमन, पूरे जनपद में हुए श्रद्धांजलि कार्यक्रमबंदरों के आतंक पर नगर निगम का बड़ा प्रहार-श्रीनगर में विशेष अभियान शुरूदेवभूमि की बेटी सनाया भण्डारी का स्वर्णिम परचम-सीबीएसई नॉर्थ जोन आर्चरी चैंपियनशिप में दो स्वर्ण पदक जीत रचा नया इतिहासशैक्षिक उत्कृष्टता और पर्यावरण संरक्षण का संदेश देकर संपन्न हुआ बाल युवा सम्मेलनस्वकर वसूली पर फिलहाल रोक-व्यापारियों के हितों की रक्षा के लिए महापौर आरती भण्डारी का बड़ा फैसलाएमबीबीएस छात्रों के ज्ञानवर्धन और बेहतर चिकित्सक बनने की दिशा में प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिताएं हैं महत्वपूर्ण–डॉ.आशुतोष सयानाएचएनबी गढ़वाल विश्वविद्यालय ने घोषित किया पीएचडी प्रवेश परीक्षा परिणाम-पारदर्शी परीक्षा प्रणाली ने रचा नया कीर्तिमानयुवाओं को भटकने से रोकने का संदेश-बद्रीश कॉलोनी में सक्रिय हुई समाज और पुलिस की साझी पहलपौधे लगाने से नहीं-उन्हें वृक्ष बनने तक संरक्षित करने से होगा पर्यावरण का संरक्षण–डॉ.मारिषा पंवार गर्ग
उत्तराखण्डकालाढूंगीज़रा हटके

आज से शुरु होगा मुकद्दस रमजानुल मुबारक का तीसरा और आखिरी अशरा

कालाढूंगी -(मुस्तज़र फारुकी) मुकद्दस रमजान का तीसरा अशरा शुरू हो गया है। रमजान में तीन अशरे होते हैं। एक अशरे में 10 दिन होते हैं। इस तरह रमजान के 30 दिनों को तीन अशरे में बांटा गया है। एक रमजान से 10 रमजान तक पहला अशरा रहमत का है। इस अशरे में अल्लाह पाक अपने बंदों पर रहमत नाजिल करता है। दूसरा अशरा मगफेरत का है।

यानि गुनाहों से माफी का। ये अशरा 10 रमजान से शुरू होकर 20 रमजान तक है। रमजान के महीने में रहमत के दरवाजे खुल जाते हैं। रोजेदार 20वें रोजे की शाम से ही एतकाफ का अमल शुरू कर देंगे। मस्जिद में एक आदमी एतकाफ में बैठ जाए तो पूरी बस्ती का हक अदा हो जाता है।

अल्लाह उस बस्ती पर आने वाले अजाबों को हटा लेते हैं। रमजान में नबी पाक ने पाबंदी के साथ एतकाफ किया था। इसलिए इस अमल का बहुत ऊंचा दर्जा है। अल्लाह, इंसान के सारे गुनाहों को माफ कर देते हैं और नेकियों में इजाफा होता है। एतकाफ में बैठने वाले को दो हज और एक उमरे का सवाब मिलता है।

मुकद्दस रमजान महीने का तीसरा अशरा जहन्नुम से निजात दिलाता है। रमजान का पूरा महीना रहमतों का महीना है, लेकिन सबसे अहम है तीसरा अशरा। इसी अशरे की पाक रातों में यानी 21, 23, 25, 27, 29 रमजान की रात पाक कुरान शरीफ नाजिल हुई थी। इन रातों में से जिस रात कुरान शरीफ नाजिल हुई, उसे शब-ए-कद्र की रात कहते हैं। इसलिए इन रातों की अहमियत काफी बढ़ जाती है।

शब-ए-कद्र की रात को हजार महीने की रातों के बराबर बताया गया है, लेकिन वह कौन सी रात है, किस रात को कुरान शरीफ नाजिल हुई, यह ठीक-ठीक मालूम नहीं है। इसलिए रोजेदार इन पांचों रात को जागकर खुदावंद करीम की इबादत करते हैं। रमजान के तीसरे अशरे में ही फितरा और जकात भी निकालते हैं, जिससे ईद की खुशियां गरीब लोग भी मना सकें।

Check Also
Close