Wednesday 15/ 04/ 2026 

Bharat Najariya
मसूरी में अग्निशमन सेवा सप्ताह की शुरुआतरू ‘छोटी चिंगारी से बड़ा खतरा’, फायर सर्विस ने शहर को किया सतर्क मसूरी, 14 अप्रैल पर्यटन नगरी मसूरी में राष्ट्रीय अग्निशमन सेवा सप्ताह 2026 के तहत फायर सर्विस ने व्यापक जागरूकता अभियान चलाकर लोगों को आग से बचाव के प्रति सतर्क किया। “सुरक्षित स्कूल, सुरक्षित अस्पताल और जागरूक समाज मिलकर रोकें आग” थीम के साथ यह अभियान 14 अप्रैल से शुरू हुआ।अंतरराष्ट्रीय अग्निशमन सेवा दिवस के मौके पर फायर अधिकारी राजकुमार के नेतृत्व में फायर स्टेशन से मालिंगा चौक तक जागरूकता रैली निकाली गई। रैली के दौरान लोगों को बताया गया कि छोटी सी आग भी समय पर काबू न पाने पर बड़ा हादसा बन सकती है।फायर टीम ने आमजन को समझाया कि आग लगने के शुरुआती मिनट सबसे अहम होते हैं मौके पर मौजूद दो लोग मिलकर तुरंत आग बुझाने का प्रयास करें। पानी, रेत या कंबल का इस्तेमाल करें, बिना देर किए 112 नंबर पर सूचना दें। अग्निशमन विभाग ने संस्थानों के लिए भी जरूरी गाइडलाइन जारी की स्कूलों के लिए पुराने बिजली तार और खराब स्विच तुरंत बदलें आपातकालीन निकास द्वार हमेशा खाली रखें व अस्पतालों के लिए ऑक्सीजन सिलेंडर के पास ज्वलनशील पदार्थ न रखें स्टाफ को फायर एक्सटिंग्यूशर चलाने की ट्रेनिंग दें। मरीजों को सुरक्षित निकालने की विशेष व्यवस्था रखें।फायर सर्विस ने लोगों को रोजमर्रा की जिंदगी में बरती जाने वाली सावधानियों पर भी जोर दिया जिसमें खाना बनाने के बाद गैस रेगुलेटर बंद करें। एक सॉकेट में ज्यादा उपकरण न लगाएंआग लगने पर झुककर बाहर निकलें, लिफ्ट का इस्तेमाल न करें, कपड़ों में आग लगने पर “स्टॉप, ड्रॉप एंड रोल” अपनाएं, माचिस-लाइटर बच्चों की पहुंच से दूर रखें।कार्यक्रम की शुरुआत में मुंबई अग्निकांड में शहीद हुए 67 अग्निशमन कर्मियों को श्रद्धांजलि दी गई। अधिकारियों ने बताया कि इसी घटना के बाद से पूरे देश में यह सप्ताह मनाकर लोगों को जागरूक किया जाता है। अग्निशमन अधिकारी धीरज सिंह तड़ियाल ने कहा कि आग से बचाव सिर्फ फायर सर्विस की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि हर नागरिक की सतर्कता से ही बड़े हादसों को रोका जा सकता है।संघर्ष की मशाल,जनसेवा की मिसाल-स्व.रणजीत सिंह भण्डारी पुन्नी को उमड़े जनसैलाब ने दी अश्रुपूर्ण श्रद्धांजलिबैसाखी पर सेवा का संकल्प,अंबेडकर जयंती पर स्वच्छता का संदेश-अलकनंदा तट से उठी जागरूकता की मिसालशाश्वत धाम लक्ष्मोली में गूंजेगा सनातन का शंखनाद-जेष्ठ माह में भव्य भागवत कथा,सैकड़ों विद्वानों का होगा आध्यात्मिक समागमपुरानी पेंशन बहाली को लेकर देहरादून में गरजे कर्मचारी-प्रधानमंत्री के दौरे के बीच एनओपीआरयूएफ का जोरदार प्रदर्शनअंबेडकर जयंती पर सेवा का संकल्प-श्रीनगर बेस चिकित्सालय में रक्तदान शिविर,एमबीबीएस छात्रों ने दिखाई मानवता की मिसालसमानता और संविधान के शिल्पकार को नमन-पौड़ी में धूमधाम से मनाई गई अंबेडकर जयंती,संयुक्त मजिस्ट्रेट ने किया माल्यार्पणमहापौर विकास शर्मा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से की मुलाकातशहीद भगत सिंह की कांस्य प्रतिमा का हुआ भव्य अनावरण
ज़रा हटकेनई दिल्ली

वफ्फ सम्पत्ति इस्लाम की रुह है और उस रुह पर राज्य सरकार की दखलंदाजी नहीं हो सकती सुप्रीम कोर्ट में बोले कपिल सिब्बल

वफ्फ सम्पत्ति इस्लाम की रुह है और उस रुह पर राज्य सरकार की दखलंदाजी नहीं हो सकती सुप्रीम कोर्ट में बोले कपिल सिब्बल

खच्च खच भरे सर्वोच्च न्यायालय में वक्फ संशोधन बिल पर सुनवाई हुई

नहीं ये संविधान की आत्मा से जुड़ा मामला है इसका फैसला सिर्फ सुप्रीम कोर्ट ही कर सकता है – कपिल सिब्बल

नयी दिल्ली -(एम सलीम खान संवाददाता) सर्वोच्च न्यायालय ने आज वफ्फ संशोधन बिल को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई की सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस की अदालत में इतनी जबरदस्त भीड़ जमा थी कि सांस लेना भी मुश्किल हो रहा था, वफ्फ संशोधन बिल को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सर्वोच्च न्यायालय के वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने अदालत में जोरदार दलील पेश उन्होंने कहा कि वफ्फ संपत्ति इस्लाम की रुह है।

और रुह पर राज्य सरकार की दखलंदाजी नहीं हो सकती, ये संविधान के अनुच्छेद 25 और 26 की सीधी अवहेलना है कपिल सिब्बल अदालत में लगातार सवाल उठ रहे थे क्या सरकार धार्मिक संपत्तियों पर अधिकार जमा सकती है, क्या वफ्फ बाय यूजर जैसी धरोहर को इतिहास से मिटा दिया जाएगा, क्या जिला कलेक्टर तय करेगा कि कौन सी जमीन किसकी है बेंच ने ये भी पूछा कि क्या यह मामला हाईकोर्ट में जाना चाहिए, कपिल सिब्बल ने दलील दी कि नहीं ये संविधान की आत्मा से जुड़ा मामला ।

इसका फैसला सिर्फ सुप्रीम कोर्ट ही कर सकता है, माहौल गर्म था हर बात एक ऐतिहासिक दस्तावेज बन रही थी, कपिल सिब्बल ने अदालत से साफ पूछा अगर किसी जमीन पर सदियों से क़ब्रिस्तान है नमाज पढ़ी जा रही है और अब सरकार कहें कि यूज़र की बात नहीं मानी जाएगी तो इतिहास कैसे जिंदा रहेगा, अदालत ने कहा कि हम मानते हैं कि वफ्फ बाय यूजर का मुद्दा गंभीर है लेकिन ये भी जरूरी है कि हर केस को धरोहर मानने की गलती न हो, इस पर कपिल सिब्बल ने दलील दी कि मगर माई लॉर्ड सरकार ने अधिकार एक कलेक्टर को दे दिए हैं।

और अदालत की भूमिका को एक सरकारी दफ्तर से छोटा बना दिया है, ये सिर्फ धार्मिक संस्थाओं पर नहीं न्यायपालिका पर भी प्रहार है, एक और चौकन्ने वाली दलील देते हुए कपिल सिब्बल ने कहा धारा 107 को हटाकर सरकार कहती हैं कि 30 साल बाद कोई भी वफ्फ ज़मीन का कब्जा वैध हो सकता है क्या इंसाफ की। भी एक्सपायरी डेट होती है, कपिल सिब्बल ने वफ्फ बाय यूजर धारा 107 और कलेक्टर को अधिकार देने पर जोरदार आपत्ति जताई, न्यायाधीशों ने माना कि कुछ प्रावधानों पर संवैधानिक चिंता वाजिब है।

खंडपीठ ने सुझाव दिया कि क्या इन मामलों को किसी हाईकोर्ट में ट्रांसफर किया जाए, अभिषेक मनु सिंघवी और वकीलों ने इसका विरोध करते हुए कहा कि देश भर के मुसलमानो से जुड़ा यह कानून केवल सुप्रीम कोर्ट ही तय करें,कल 17 अप्रैल को दोबारा इस मामले की सुनवाई होगी संभवत सरकार की तरफ से जवाब या अगले वरिष्ठ वकील की दलीलें पेश होगी।

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