Tuesday 16/ 06/ 2026 

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हल्द्वानी_उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय में इस विषय पर सम्पन्न हुई एक दिवसीय कार्यशाला

हल्द्वानी – उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय, हल्द्वानी एवं भारतीय शिक्षण मंडल, उत्तराखंड के संयुक्त तत्वावधान में एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन विश्वविद्यालय परिसर में किया गया। यह कार्यक्रम भारतीय क्षण मंडल के 56वें स्थापना दिवस की पूर्व संध्या पर आयोजित किया गया।

कार्यशाला का विषय था कौशल शिक्षा, राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 एवं भारतीय ज्ञान प्रणाली में उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय की भूमिका”।कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। समारोह की अध्यक्षता विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. ओ.पी.एस. नेगी ने की। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय नई शिक्षा नीति के अनुरूप कौशल आधारित शिक्षा, भारतीय ज्ञान परंपरा और डिजिटल परिवर्तन को आत्मसात करते हुए आगे बढ़ रहा है।

उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि विश्वविद्यालय में छात्र संख्या में निरंतर वृद्धि हो रही है और राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अनुरूप पाठ्यक्रम निर्माण की दिशा में कई महत्त्वपूर्ण पहल की गई हैं। उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय में विशेष शिक्षा में कौशल आधारित विशेष बी.एड. पाठ्यक्रम है तथा विश्वविद्यालय को राष्ट्रीय स्तर पर पुरस्कार भी प्राप्त हुआ है, जो इसकी प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डॉ. मधुकर मारुति वावरे, संयुक्त सचिव, यूजीसी-डीईबी ने कहा कि डिस्टेंस एजुकेशन राष्ट्रीय शिक्षा नीति का एक महत्वपूर्ण स्तंभ है और यूजीसी-डीईबी इसे देशभर में प्रोत्साहित कर रहा है।

उन्होंने उत्तराखंड के प्रति अपने विशेष लगाव को व्यक्त करते हुए कहा कि इस क्षेत्र में शिक्षा के क्षेत्र में कार्य करना गर्व की बात है। उन्होंने यह भी कहा कि शिक्षक ही छात्र परिवर्तन के वास्तविक वाहक होते हैं, और उनका योगदान शिक्षा व्यवस्था को जीवंत बनाता है। मुख्य वक्ता श्री बी. आर. शंकरानंद, राष्ट्रीय संगठन सचिव, भारतीय शिक्षण मंडल ने कहा कि शिक्षा भयमुक्त होनी चाहिए और इसका उद्देश्य एक स्वस्थ, स्वायत्त और आत्मनिर्भर व्यक्ति का निर्माण होना चाहिए।

उन्होंने कहा कि आज के समय में विद्यार्थियों को केवल कर्मचारी नहीं, बल्कि कर्मयोगी” बनने की ओर प्रेरित करना चाहिए। उन्होंने प्रोजेक्ट आधारित शिक्षण को भी बढ़ावा देने की बात की। कार्यशाला में विश्वविद्यालय के शिक्षकगण, शोधार्थी, विद्यार्थी एवं अन्य गणमान्य अतिथियों ने भाग लिया।

वक्ताओं ने उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय की भूमिका की सराहना करते हुए आशा जताई कि विश्वविद्यालय आने वाले वर्षों में कौशल, संस्कृति और तकनीक का संतुलित केंद्र बनेगा। कार्यक्रम में प्रो. जीतेंद्र पांडे, प्रो. अशुतोष कुमार भट्ट, प्रो. डिगर सिंह फर्सवाण, प्रो. मंजरी अग्रवाल, प्रो. अरविन्द भट्ट, डॉ. बालम दफौटी, डॉ. गोपाल, ललिता, डॉ. नीलिमा, डॉ. मनोज, रिया, डॉ हिमानी आदि शिक्षकों ने कार्यशाला में प्रतिभाग किया।

कार्यक्रम का धन्यवाद ज्ञापन विश्वविद्यालय के कुलसचिव डॉ. खेमराज भट्ट द्वारा प्रस्तुत किया गया। उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अनुरूप कौशल शिक्षा एवं भारतीय ज्ञान प्रणाली को शिक्षा की मुख्यधारा में लाने की दिशा में सक्रिय रूप से कार्य कर रहा है।

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