Sunday 15/ 03/ 2026 

Bharat Najariya
राजस्व विभाग ने विद्युत विभाग को अतिक्रमण मुक्त कर सौपी ज़मीन।स्थान – कालाढूंगी।रिपोर्टर – भगवान मेहरा।माननीय मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने शनिवार को अपने खटीमा भ्रमण के दौरान अपने निजी आवास नगला तराई व कैंप कार्यालय लोहियाहेड में जनप्रतिनिधियों व जनता से मुलाकात कर जनसमस्याएं सुनी तथा समस्याओं का समाधान करने के निर्देश अधिकारियों को दिए।गैंगस्टर एक्ट में वांछित अभियुक्त गिरफ्तार, आईटीआई कोतवाली पुलिस व एसओजी काशीपुर की संयुक्त कार्रवाईकाशीपुर। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक ऊधमसिंहनगर अजय गणपति के निर्देशन में जिले में अपराधियों और गिरोहबंद तत्वों के विरुद्ध चलाए जा रहे अभियान के तहत पुलिस को एक और सफलता हाथ लगी है। गैंगस्टर एक्ट के मुकदमे में वांछित एक अभियुक्त को कोतवाली आईटीआई पुलिस और एसओजी काशीपुर की संयुक्त टीम ने गिरफ्तार कर लिया है।पुलिस से प्राप्त जानकारी के अनुसार दिनांक 10 मार्च 2026 को थाना आईटीआई में एफआईआर संख्या 71/2026, धारा 2/3 गैंगस्टर एक्ट के अंतर्गत मुकदमा दर्ज किया गया था। इस प्रकरण में लोक व्यवस्था को प्रभावित करने वाले एक गिरोह के विरुद्ध कार्रवाई करते हुए पुलिस पहले ही चार अभियुक्तों को गिरफ्तार कर माननीय न्यायालय के समक्ष पेश कर चुकी है, जिन्हें न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेज दिया गया था।इसी क्रम में मुकदमे में वांछित चल रहे अभियुक्त विमल कुमार पुत्र महिपाल सिंह (32 वर्ष) निवासी ग्राम जलालपुर खालसा, थाना डिलारी, तहसील ठाकुरद्वारा, जनपद मुरादाबाद को 13 मार्च 2026 को कोतवाली आईटीआई पुलिस एवं एसओजी काशीपुर की संयुक्त टीम द्वारा गिरफ्तार कर लिया गया।पुलिस ने बताया कि गिरफ्तार अभियुक्त के विरुद्ध आवश्यक वैधानिक कार्रवाई पूरी कर उसे माननीय न्यायालय के समक्ष पेश किया जा रहा है। वहीं पुलिस का कहना है कि जनपद में अपराधियों के विरुद्ध अभियान आगे भी इसी प्रकार जारी रहेगा।टनकपुर से मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने दी चम्पावत को स्वास्थ्य सेवाओं की बड़ी सौगातयुवाओं को मानसिक और शारीरिक रूप से मजबूत बनाते है खेलः विकास शर्मापंतनगर। प्रदेश के मुखिया पुष्कर सिंह धामी के पंतनगर एयरपोर्ट पहुंचने पर किच्छा के पूर्व विधायक राजेश शुक्ला ने उनका स्वागत किया और किच्छा क्षेत्र की बहुप्रतीक्षित विकास योजनाओं के लिए वित्तीय स्वीकृति देने पर धन्यवाद पत्र सौंपकर आभार व्यक्त किया।इस दौरान पूर्व विधायक राजेश शुक्ला ने कहा कि 13 अक्टूबर को किच्छा में आयोजित नागरिक अभिनंदन समारोह में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी द्वारा किच्छा के विकास के लिए कई महत्वपूर्ण घोषणाएं की गई थीं, जिन पर अब वित्तीय स्वीकृति मिलना क्षेत्र के लिए बड़ी उपलब्धि है। उन्होंने बताया कि किच्छा नगला मार्ग से अटरिया रोड होते हुए रुद्रपुर तक 8.5 किलोमीटर शेष भाग के निर्माण के लिए लोक निर्माण विभाग को 22 करोड़ रुपये, किच्छा-रुद्रपुर एनएच-74 से मलसा-कुरैया मार्ग के निर्माण के लिए 19 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी गई है।इसके अलावा पंतनगर विश्वविद्यालय के अंबेडकर पार्क में भारत रत्न B. R. अंबेडकर की आदमकद प्रतिमा स्थापित करने एवं पार्क के सौंदर्यीकरण के लिए केएमवीएन को 45.88 लाख रुपये की स्वीकृति दी गई है। वहीं किच्छा के पुराने टैक्सी स्टैंड पर भारत-पाकिस्तान विभाजन विभीषिका के सेनानियों की स्मृति में स्मारक निर्माण के लिए ग्रामीण निर्माण विभाग को 51.51 लाख रुपये तथा किच्छा के बंडीया नमक फैक्ट्री पुल निर्माण के प्रथम चरण के लिए 8.58 लाख रुपये की धनराशि लोक निर्माण विभाग को जारी की गई है।पूर्व विधायक राजेश शुक्ला ने कहा कि इन सभी योजनाओं के धरातल पर उतरने से किच्छा क्षेत्र के विकास को नई गति मिलेगी और यह योजनाएं क्षेत्र के लिए मील का पत्थर साबित होंगी। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का किच्छा क्षेत्र से विशेष लगाव है और उनके नेतृत्व में किच्छा लगातार विकास की नई ऊंचाइयों की ओर बढ़ रहा है।पूर्व विधायक ने कहा कि इन महत्वपूर्ण योजनाओं के लिए किच्छा क्षेत्र की जनता मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का हृदय से आभार व्यक्त करती है।कानूनी जागरूकता से सशक्त होगा समाज-बछेली में विधिक जागरूकता शिविर,छात्रों को बताए अधिकार और कानूनगढ़वाल विश्वविद्यालय में 17 से 20 मार्च तक रंगारंग सांस्कृतिक व शैक्षणिक प्रतियोगिताओं का महाकुंभडीएम के निर्देश पर जिलेभर में छापेमारी,दो मामलों में 9200 रुपये का अर्थदंड
उत्तराखण्ड

पांच सौ वर्ष पुरानी आस्था का केंद्र मां डौन्डियों भगवती मंदिर,जहां आज भी जीवित हैं लोक परंपराएं

रुद्रप्रयाग/श्रीनगर गढ़वाल। गढ़वाल की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक विरासत को संजोए हुए मां डौन्डियों भगवती का प्राचीन मंदिर आज भी भक्तों की आस्था और लोक परंपराओं का जीवंत प्रतीक है। बच्छणस्यूं और कण्डारस्यूं पट्टी की सीमा पर ऊंची पहाड़ी पर बांज,बुरांस,काफल,मोरु और देवदार के घने वृक्षों के बीच स्थित यह मंदिर लगभग पांच सौ वर्ष पुराना माना जाता है। निर्माण की कथा और देवी का स्वप्नादेश-ग्राम आंकसेरा निवासी शिक्षक जसपाल सिंह गुसाई के अनुसार मंदिर का निर्माण गढ़वाल के राजा फतेशाह के समय में खाती गुसाईं गामा जखवाल पहलवान के नेतृत्व में खाती गुसाई वंशजों द्वारा कराया गया था। मान्यता है कि देवी स्वयं गुसाई परिवार के मुखिया के स्वप्न में प्रकट हुईं और आदेश दिया कि वे नयार नदी के तट पर पड़ी उनकी शिला को ऊंची डांग में स्थापित करें। गामा जखवाल पहलवान और गांववालों ने मिलकर नदी किनारे से उस शिला को उठाया। शरणा गांव के पुजारी ने शिला को अपनी पीठ पर रखकर यात्रा आरंभ की। इस दौरान देवी की शिला ने आंकसेरा और पाटा गांव में रात्रि विश्राम भी किया और अंततः डौन्डियोंखाल में मंदिर निर्माण के बाद स्थापित हुई। इसी कारण आज भी आंक गुसाई परिवार को देवी का मैती माना जाता है। विशेष पूजा परंपराएं और देवी का स्वरूप-पूर्व में इस मंदिर में देवी की आराधना के लिए पशुबलि की परंपरा थी। मान्यता है कि जब भी आंक गुसाई परिवार पशुबलि करते,तब देवी को गर्भगृह से बाहर निकालकर विशेष स्थान पर रखा जाता। देवी केवल तीन माह तक बाहर रहतीं और फिर पुनः गर्भगृह में प्रतिष्ठित होतीं। मां डौन्डियों भगवती को महाकाली का स्वरूप माना जाता है। इनके साथ घण्डियाल,हीत,भैरव,नौ नरसिंह और चौसठ बयाल भी माने जाते हैं। बलि प्रथा का अंत और आधुनिक दौर-साल 2005 में तत्कालीन ग्राम प्रधान स्व.सुदामा सिंह गुसाई के प्रयासों और शासन के आदेश के बाद यहां पशुबलि की परंपरा पूर्ण रूप से समाप्त कर दी गई। इसके बाद से मंदिर की देखरेख महाकाली मंदिर समिति द्वारा की जा रही है। जनसहयोग से समिति ने मंदिर का पुनर्निर्माण और जीर्णोद्धार कार्य भी सम्पन्न किया है। नवरात्र पर्व और सांस्कृतिक धरोहर-नवरात्र पर्व पर यहां विशेष पूजा-अर्चना,हवन और अखंड ज्योति प्रज्वलन का आयोजन होता है। अष्टमी के दिन देवी का शुद्धिकरण कर उन्हें पुनः गर्भगृह में प्रतिष्ठित किया जाता है। इस अवसर पर दूर-दराज से श्रद्धालु पहुंचते हैं। मंदिर परिसर और आसपास के गांवों में इन दिनों ढोल-दमाऊं की थाप,लोकगीतों की गूंज और झोड़ा-चांचरी नृत्य की छटा देखने को मिलती है। नवरात्र पर लगने वाले धार्मिक मेले में स्थानीय उत्पादों,पारंपरिक खानपान और सांस्कृतिक कार्यक्रमों की झलक भी देखने को मिलती है। स्थानीय जनभागीदारी और पर्यटन की संभावनाएं-इस मंदिर के संरक्षण और विकास में ग्रामीणों की सक्रिय भागीदारी देखने को मिलती है। ग्रामीण न केवल आर्थिक सहयोग देते हैं,बल्कि श्रमदान की परंपरा से मंदिर परिसर की स्वच्छता और प्रबंधन में भी योगदान करते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सरकार और पर्यटन विभाग इस क्षेत्र की धार्मिक पर्यटन योजनाओं में इसे शामिल करे तो यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं और पर्यटकों का आगमन संभव है। इससे स्थानीय युवाओं को रोजगार के अवसर मिलेंगे और पारंपरिक संस्कृति को भी नया संबल मिलेगा। आस्था और पहचान का केंद्र-मां डौन्डियों भगवती मंदिर न केवल उपासना का स्थान है,बल्कि यह गढ़वाल की उस जीवंत सांस्कृतिक धरोहर का प्रतीक है,जो पीढ़ी दर पीढ़ी लोक परंपराओं और आस्था को संरक्षित करती आई है। पर्यटन सर्किट की दिशा में पहल-शिक्षक जसपाल सिंह गुसाई के अनुसार स्थानीय जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों की साझा राय है कि यदि रुद्रप्रयाग,खिर्सू और पौड़ी को एक पर्यटन सर्किट के रूप में विकसित किया जाए,तो डौन्डियों भगवती मंदिर जैसे आस्था केंद्र इस सर्किट के आकर्षण को और भी बढ़ा देंगे। इससे धार्मिक पर्यटन को नया आयाम मिलेगा और क्षेत्रीय विकास की राह खुलेगी।

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