Saturday 27/ 06/ 2026 

Bharat Najariya
भाजपा पार्षद भूपेन्द्र सिंह कठैत का कुशलक्षेम जानते कैबिनेट मंत्री गणेश जोशीबीएलके-मैक्स हॉस्पिटल ने गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल ऑन्कोलॉजी ओपीडी सेवाओं की शुरुआत कीमाननीय मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी अपने तीन दिवसीय भ्रमण पर शनिवार को खटीमा में हेलीपैड व कैम्प कार्यालय लोहियाहेड में जनता व जनप्रतिनिधियों से मुलाकात कर जनसमस्याएं सुनीस्वनिधि महोत्सव में फड़ एवं रेहड़ी व्यवसायियों को मिला प्रोत्साहन-उत्कृष्ट बैंक और लाभार्थी सम्मानितसुशासन की कसौटी पर विकास योजनाओं की समीक्षा-सचिव दीपक कुमार ने तय किया विकास का रोडमैपश्रीनगर व्यापार मंडल का शपथ ग्रहण समारोह बनेगा ऐतिहासिक,तैयारियां अंतिम चरण मेंसंस्कारों से जुड़ता पर्यावरण,समलौण आंदोलन बना जनजागरण की मिसालनशा मुक्त समाज और बेहतर स्वास्थ्य का संकल्प-पाबों में जागरूकता गोष्ठी का आयोजनपौड़ी जनपद के दो दिवसीय भ्रमण पर रहेंगे कैबिनेट मंत्री डॉ.धन सिंह रावतनिशानेबाजी के पुरोधा जसपाल राणा को मसूरी में श्रद्धांजलि
राज्य

संस्कारों से जुड़ता पर्यावरण,समलौण आंदोलन बना जनजागरण की मिसाल


पौड़ी/श्रीनगर गढ़वाल। उत्तराखण्ड की लोक संस्कृति,पारंपरिक संस्कारों और पर्यावरण संरक्षण को एक सूत्र में पिरोने वाला समलौण आंदोलन अब जन-जन का अभियान बनता जा रहा है। जनपद पौड़ी गढ़वाल के विभिन्न गांवों में धार्मिक अनुष्ठानों,पारिवारिक संस्कारों एवं पुण्य स्मरण के अवसर पर पौधारोपण कर प्रकृति संरक्षण का अनूठा संदेश दिया गया। इस दौरान ग्रामीणों ने न केवल पौधे रोपे,बल्कि उनके संरक्षण का संकल्प लेकर पर्यावरण के प्रति अपनी जिम्मेदारी भी निभाई। विकासखण्ड पौड़ी की पट्टी पैडुलस्यूं के ग्राम झालीमाली में मां झालीमाली मंदिर में विधि-विधान से पूजा-अर्चना के उपरांत गांव की दिशा-ध्याणियों (बेटियों) के हाथों मंदिर परिसर में मोरपंखी का समलौण पौधा रोपित किया गया। पौधे के संरक्षण की जिम्मेदारी समलौण सेना की नायिका हेमलता जोशी ने ली। उन्होंने कहा कि बेटियां परिवार ही नहीं बल्कि प्रकृति की भी संरक्षक हैं। यदि प्रत्येक शुभ अवसर पर पौधारोपण की परंपरा विकसित हो जाए तो आने वाली पीढ़ियों को हराभरा और स्वच्छ वातावरण मिलेगा। सभी बेटियों ने अपने-अपने गांवों में जीवन के प्रत्येक संस्कार पर पौधारोपण करने का संकल्प लिया। इसी क्रम में विकासखण्ड थलीसैंण की पट्टी कण्डारस्यूं के ग्राम बनास में भूपेंद्र सिंह नेगी एवं जितेंद्र सिंह नेगी के पुत्र अक्षित एवं रक्षित के चूड़ाकर्म संस्कार के उपलक्ष्य में घर के आंगन में नारंगी का समळौण पौधा रोपा गया। पौधे के संरक्षण का दायित्व दोनों बच्चों की माता ने लिया। कार्यक्रम का संचालन समलौण सेना की नायिका रेखा देवी गुसाईं ने किया। उन्होंने कहा कि आधुनिक जीवनशैली के कारण प्रकृति का संतुलन लगातार बिगड़ रहा है। ऐसे समय में समलौण आंदोलन समाज को जीवन के प्रत्येक संस्कार के साथ पौधारोपण के लिए प्रेरित कर पर्यावरण संरक्षण की नई चेतना जगा रहा है। उन्होंने लोगों से जंगलों को आग से बचाने तथा वृक्षों के संरक्षण का भी आह्वान किया। पौधारोपण जैसे पुण्य कार्य के लिए परिवार ने समलौण सेना को 500 रुपये की प्रोत्साहन राशि भेंट की। वहीं ग्राम सिमणी में स्वर्गीय दिनेश चंद्र मंमगाई की स्मृति में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा एवं वार्षिक पिंडदान के अवसर पर उनके पुत्र संदीप मंमगाई एवं पुत्रवधू मनीषा मंमगाई ने घर के आंगन में नींबू का समलौण पौधा रोपकर दिवंगत आत्मा को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। पौधे की देखभाल का दायित्व उनकी धर्मपत्नी आनन्दी देवी ने लिया। कार्यक्रम का संचालन समलौण सेना की नायिका सीमा देवी ने किया। उन्होंने कहा कि जब स्मृति और संस्कार प्रकृति से जुड़ते हैं तो वह आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बन जाते हैं। उन्होंने वनों को आग से बचाने और हर व्यक्ति को कम से कम एक पौधा लगाने का संदेश दिया। इस अवसर पर परिवार द्वारा समलौण सेना को 200 रुपये की प्रोत्साहन राशि भी प्रदान की गई। उधर विकासखण्ड पौड़ी के ग्राम ट्योठ्या में प्रमोद मंमगाई ने कुलदेवी-देवताओं के पूजन के उपरांत सम्पूर्ण परिवार के साथ मंदिर परिसर में मोरपंखी का समळौण पौधा रोपकर कुलदेवी का आशीर्वाद प्राप्त किया। पौधे की सुरक्षा का संकल्प मंदिर के पुजारी सतीश मंमगाई ने रक्षा सूत्र बांधकर लिया। कार्यक्रम का संचालन समलौण आंदोलन की राज्य संयोजिका सावित्री देवी मंमगाई ने करते हुए कहा कि समलौण पहल जीवन के हर सुख-दुख,संस्कार और धार्मिक अवसर को प्रकृति से जोड़ने का सशक्त माध्यम बन चुकी है। यह अभियान मानव और प्रकृति के बीच अटूट रिश्ते को मजबूत कर समाज में पर्यावरण संरक्षण की व्यापक चेतना पैदा कर रहा है। उन्होंने लोगों से जंगलों को आग से बचाने तथा अधिकाधिक पौधारोपण कर उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने की अपील की। चारों कार्यक्रमों में बड़ी संख्या में ग्रामीणों,महिलाओं,समलौण सेना के सदस्यों एवं जनप्रतिनिधियों की सहभागिता रही। पूरे आयोजन के दौरान एक ही संदेश प्रमुखता से उभरकर सामने आया कि यदि प्रत्येक धार्मिक,सामाजिक और पारिवारिक संस्कार को पौधारोपण से जोड़ा जाए तो उत्तराखण्ड की हरियाली और पर्यावरण संरक्षण का सपना शीघ्र ही साकार हो सकता है। समलौण आंदोलन आज केवल पौधारोपण का अभियान नहीं,बल्कि प्रकृति,संस्कृति और संस्कारों को जोड़ने वाला एक सशक्त जनआंदोलन बनकर पूरे प्रदेश में नई चेतना का संचार कर रहा है।

Check Also
Close