Friday 01/ 05/ 2026 

Bharat Najariya
7वीं उत्तराखंड राज्य फेंसिंग चैम्पियनशिप, 2026 का आयोजन डीपीएस रुद्रपुर मेंरुद्रपुर, उत्तराखंड | अप्रैल 2026फेंसिंग एसोसिएशन ऑफ उत्तराखंड द्वारा 7वीं उत्तराखंड राज्य फेंसिंग चैम्पियनशिप, 2026 का आयोजन दिनांक 03 मई 2026 (रविवार) को दिल्ली पब्लिक स्कूल, रुद्रपुर में किया जा रहा है। प्रतियोगिता का शुभारंभ प्रातः 08:00 बजे से होगा।इस राज्य स्तरीय प्रतियोगिता में उत्तराखंड के विभिन्न जिलों से खिलाड़ी भाग लेंगे। प्रतियोगिता मिनी, सब-जूनियर, कैडेट, जूनियर एवं सीनियर (बालक एवं बालिका) वर्गों में आयोजित की जाएगी। फेंसिंग एसोसिएशन ऑफ उत्तराखंड के अध्यक्ष श्री सुरजीत सिंह जी ने यह जानकारी दी।उल्लेखनीय है कि यह प्रतियोगिता आगामी राष्ट्रीय फेंसिंग चैम्पियनशिप के लिए चयन ट्रायल के रूप में भी आयोजित की जा रही है, जिससे खिलाड़ियों को राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिभा प्रदर्शन का अवसर प्राप्त होगा।श्री सुरजीत सिंह जी ने सभी संबद्ध जिला फेंसिंग संघों से अनुरोध किया गया है कि वे अपने पात्र खिलाड़ियों की प्रविष्टियां समय पर सुनिश्चित करें तथा प्रतियोगिता के सफल आयोजन हेतु आवश्यक समन्वय करें।फेंसिंग एसोसिएशन ऑफ उत्तराखंड सभी खिलाड़ियों, अधिकारियों एवं खेल प्रेमियों का इस आयोजन में हार्दिक स्वागत करता है और खेल भावना को बढ़ावा देने की अपील करता है।जेसीज पब्लिक स्कूल, रुद्रपुर में श्रमिक दिवस एवं बुद्ध पूर्णिमा पर विशेष आयोजनरुद्रपुर में स्पा सेंटर पर छापा, देह व्यापार का भंडाफोड़ ‘खबर पड़ताल’ के नाम पर चल रहे फर्जी फेसबुक पेज पर भी उठे सवालरूद्रपुर में पैथोलॉजी कलेक्शन सेंटरों की बढ़ती संख्या पर सवाल, जांच व्यवस्था मजबूत करने की मांगरुद्रपुर शहर में तेजी से बढ़ते पैथोलॉजी लैब और कलेक्शन सेंटर अब जनस्वास्थ्य के दृष्टिकोण से चिंता का विषय बनते जा रहे हैं। हाल के दिनों में सामने आए एक मामले ने जांच की गुणवत्ता और विश्वसनीयता को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।प्राप्त जानकारी के अनुसार आवास विकास क्षेत्र में रहने वाले एक व्यक्ति ने पास के एक कलेक्शन सेंटर से ब्लड सैंपल की जांच कराई। रिपोर्ट मिलने के बाद जब उन्होंने डॉक्टर को दिखाया तो रिपोर्ट की विश्वसनीयता पर संदेह जताया गया और पुनः जांच कराने की सलाह दी गई। इसके बाद व्यक्ति ने दूसरे मान्यता प्राप्त लैब, Dr. Lal PathLabs में परीक्षण कराया, जहां दोनों रिपोर्टों में स्पष्ट अंतर सामने आया।इस अनुभव ने न केवल संबंधित व्यक्ति को मानसिक रूप से परेशान किया बल्कि यह भी संकेत दिया कि जांच की गुणवत्ता और मानकों का पालन हर जगह समान रूप से नहीं हो रहा है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि पैथोलॉजी जांच उपचार की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है, ऐसे में रिपोर्ट की शुद्धता अत्यंत आवश्यक है।शहर में बड़ी संख्या में कलेक्शन सेंटर खुलने से सुविधा तो बढ़ी है, लेकिन साथ ही प्रशिक्षित स्टाफ, मानक उपकरण और गुणवत्ता नियंत्रण जैसे पहलुओं पर भी बराबर ध्यान देना जरूरी हो गया है। स्वास्थ्य से जुड़े कार्यों में किसी भी प्रकार की लापरवाही गंभीर परिणाम ला सकती है, इसलिए नियामक संस्थाओं द्वारा समय-समय पर निरीक्षण और सत्यापन अत्यंत आवश्यक माना जा रहा है।इस प्रकार की घटनाएं यह संकेत देती हैं कि आमजन को भी जांच करवाते समय सावधानी बरतनी चाहिए और केवल प्रमाणित तथा विश्वसनीय संस्थानों का ही चयन करना चाहिए। साथ ही संबंधित विभागों से अपेक्षा की जा रही है कि वे मानकों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करें, ताकि लोगों का विश्वास और सुरक्षा दोनों कायम रह सकेजागरूकता ही सुरक्षा है सही जांच सही उपचार की पहली शर्त हैसस्ती सुविधा के बजाय प्रमाणित गुणवत्ता को प्राथमिकता दें।रिपोर्ट पर संदेह हो तो दोबारा जांच कराने में संकोच न करेंस्वास्थ्य के मामले में लापरवाही नहीं सतर्कता ही सबसे बड़ा बचाव है।जेसीज पब्लिक स्कूल में हिंदुस्तान ओलंपियाड 2025 का डीएम ने किया शुभारंभहोटल बन चुके होमस्टे पर डीएम का डंडा, 17 पंजीकरण निरस्तपर्यटन वेबसाइट से हटाने की प्रक्रिया शुरू, अवैध संचालन पर सख्त कार्रवाई जारीदेहरादून, 29 अप्रैल। जनपद में कानून व्यवस्था सुदृढ़ करने और आमजन की सुरक्षा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से जिला प्रशासन ने होमस्टे संचालन पर बड़ा एक्शन लिया है। जिलाधिकारी सविन बंसल के निर्देश पर हुई गहन जांच में मानकों का उल्लंघन पाए जाने पर प्रथम चरण में 17 होमस्टे के पंजीकरण निरस्त कर दिए गए हैं। साथ ही इन्हें पर्यटन विभाग की वेबसाइट से विलोपित करने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है।जिला प्रशासन ने “ऑपरेशन सफाई” चलाते हुए महज सात दिनों में मजिस्ट्रेट स्तर की पांच टीमें गठित कर जांच अभियान चलाया। जांच में सामने आया कि कई होमस्टे होटल की तरह संचालित किए जा रहे थे, जहां नियम विरुद्ध बार संचालन, तेज आवाज में डीजे और देर रात तक पार्टियां आयोजित हो रही थीं। इन स्थानों पर नशे और अन्य गैरकानूनी गतिविधियों के अड्डे बनने की शिकायतें भी मिलीं, जिससे आमजन की सुरक्षा पर खतरा उत्पन्न हो रहा था।जिलाधिकारी ने स्पष्ट कहा कि कानून से ऊपर कोई नहीं है और आमजन की जान से खिलवाड़ किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि होमस्टे योजना का उद्देश्य स्थानीय संस्कृति को बढ़ावा देना और लोगों की आय में वृद्धि करना है, न कि इसे व्यावसायिक होटल में बदलना।जांच के दौरान कई गंभीर अनियमितताएं सामने आईं। कई होमस्टे में रसोई की व्यवस्था नहीं थी, अग्निशमन उपकरण या तो उपलब्ध नहीं थे या उनकी वैधता समाप्त हो चुकी थी। कई स्थानों पर फूड लाइसेंस नहीं पाया गया। निर्धारित क्षमता से अधिक कमरे संचालित किए जा रहे थे और कुछ इकाइयां लीज या किराये पर चलाई जा रही थीं, जो नियमों के विपरीत है। विदेशी नागरिकों के ठहराव की अनिवार्य सूचना भी कई जगह उपलब्ध नहीं कराई गई।प्रशासन ने पाया कि कुछ होमस्टे बारात घर और अन्य व्यावसायिक गतिविधियों के लिए उपयोग किए जा रहे थे, जबकि कई स्थानों पर स्वामी का निवास ही नहीं था। मसूरी और शहरी क्षेत्रों में स्वामित्व परिवर्तन और नवीनीकरण न कराने के मामले भी सामने आए हैं।जिलाधिकारी ने निर्देश दिए हैं कि सभी होमस्टे संचालक नियमावली का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करें। भविष्य में भी यह अभियान जारी रहेगा और किसी भी प्रकार की अनियमितता पाए जाने पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।————————————++++▢ सवालों के घेरे में रुद्रपुर की व्यवस्थाएंदेहरादून में कार्रवाई के बाद अब सवाल उठने लगे हैं कि रुद्रपुर में बिना मानकों के संचालित पेइंग गेस्ट हाउस, गेस्ट हाउस और होटल पर कब कार्रवाई होगी। शहर में लंबे समय से बिना पंजीकरण, बिना अग्निशमन व्यवस्था और बिना आवश्यक लाइसेंस के कई प्रतिष्ठान संचालित होने की शिकायतें मिलती रही हैं।स्थानीय लोगों का कहना है कि कई स्थानों पर नियमों को ताक पर रखकर बाहरी व्यक्तियों को ठहराया जा रहा है, जिससे कानून व्यवस्था और सुरक्षा दोनों पर खतरा बढ़ रहा है।अब देखना यह होगा कि क्या जिला प्रशासन रुद्रपुर में भी देहरादून जैसी सख्त कार्रवाई करते हुए अवैध संचालन पर लगाम लगाता है या फिर ये व्यवस्थाएं यूं ही चलती रहेंगी।सितारगंज में मानसिक गणना का महाकुंभ: 500+ प्रतिभागियों के बीच मुदित राठी बने “चैंपियन ऑफ चैंपियंस”।काशीपुर में शिक्षक गरिमा शिविर संपन्न, भारतीय संस्कृति ज्ञान परीक्षा पर हुआ मंथनकाशीपुर। अखिल विश्व गायत्री परिवार, शांतिकुंज हरिद्वार के तत्वावधान में संचालित भारतीय संस्कृति ज्ञान परीक्षा, जनपद उधम सिंह नगर का शिक्षक गरिमा शिविर काशीपुर स्थित ब्लॉक संसाधन केंद्र के सभागार में संपन्न हुआ। शिविर में काशीपुर, जसपुर एवं रुद्रपुर से गायत्री परिवार के सदस्य एवं शिक्षकगण उत्साहपूर्वक शामिल हुए।कार्यक्रम में जसपुर से दिग्विजय सिंह, रुद्रपुर से ओमवीर सिंह, नमो नारायण, सोमपाल तथा काशीपुर से राजीव झा, सर्वेश रस्तोगी, महिपाल जी सहित कात्यानी महिला मंडल की बहनों की सहभागिता रही। इसके अतिरिक्त हल्दुचौड़ से बसंत पांडे भी उपस्थित रहे।शांतिकुंज हरिद्वार से आई टोली ने कार्यक्रम का संचालन एवं मार्गदर्शन किया। मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित प्रोफेसर प्रमोद भटनागर ने शिक्षकों को भारतीय संस्कृति ज्ञान परीक्षा के महत्व एवं उद्देश्य पर विस्तार से प्रकाश डाला। वहीं, भारतीय संस्कृति ज्ञान परीक्षा प्रकोष्ठ शांतिकुंज के सी.डी. थपलियाल ने भी अपने विचार व्यक्त करते हुए परीक्षा की उपयोगिता पर जोर दिया।कार्यक्रम का संचालन प्रदेश सह-संयोजक पुष्पा जी ने किया, जबकि धन्यवाद प्रस्ताव जिला संयोजक यशवंत सिंह द्वारा प्रस्तुत किया गया। यह आयोजन जिला इकाई, भारतीय संस्कृति ज्ञान परीक्षा उधम सिंह नगर द्वारा संपन्न कराया गया।शिविर का आयोजन दिव्य एवं भव्य रहा, जिसकी उपस्थित सभी लोगों ने सराहना करते हुए आयोजकों की भूरी-भूरी प्रशंसा की।खानपुर न.1 मे आयोजित अखण्ड नाम सकीर्तन मे शामिल हुऐ विधायक शिव अरोरा
उत्तराखण्ड

इंदर सिंह रावत राजकीय महाविद्यालय में अभिभावक-शिक्षक संघ समिति का गठन,शिक्षा गुणवत्ता और विकास पर हुई सार्थक चर्चा

गढ़वाल। इंदर सिंह रावत राजकीय महाविद्यालय में आज दिनांक 13 अक्टूबर 2025 को एक महत्वपूर्ण आयोजन के तहत अभिभावक-शिक्षक संघ समिति का गठन किया गया। कार्यक्रम का आयोजन महाविद्यालय के प्रभारी प्राचार्य डॉ.बी.आर.भद्री के निर्देशन में तथा समिति प्रभारी डॉ.अरविंद नारायण के संयोजन में सम्पन्न हुआ। इस अवसर पर शिक्षकों,अभिभावकों एवं छात्र-छात्राओं ने सक्रिय सहभागिता निभाई। कार्यक्रम का शुभारंभ समिति समन्वयक डॉ.अरविंद नारायण के स्वागत भाषण से हुआ। उन्होंने सभी अतिथियों एवं अभिभावकों का हार्दिक अभिनंदन करते हुए अभिभावक-शिक्षक संघ के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि इस समिति के माध्यम से अभिभावक और शिक्षकों के बीच समन्वय स्थापित होगा,जिससे विद्यार्थियों की शैक्षणिक प्रगति के साथ-साथ महाविद्यालय के समग्र विकास में भी सहयोग मिलेगा। इस अवसर पर प्रभारी प्राचार्य डॉ.बी.आर.भद्री ने कहा कि महाविद्यालय के विकास में अभिभावकों की सहभागिता अत्यंत आवश्यक है। जब अभिभावक शिक्षा प्रक्रिया से जुड़ते हैं,तब शिक्षण की गुणवत्ता और विद्यार्थियों का आत्मविश्वास दोनों बढ़ते हैं। अभिभावक संस्था महाविद्यालय और समाज के बीच एक सशक्त सेतु का कार्य करेगी। उन्होंने महाविद्यालय की वर्तमान दशा,उपलब्ध संसाधनों तथा भावी योजनाओं पर भी विस्तृत जानकारी दी और अभिभावकों से सहयोग की अपेक्षा व्यक्त की। इसके उपरांत सर्वसम्मति से अभिभावक-शिक्षक संघ समिति का गठन किया गया,जिसमें निम्न पदाधिकारी चुने गए। संयोजक/प्राचार्य डॉ.बी.आर.भद्री,अध्यक्ष गीता देवी,उपाध्यक्ष आशा देवी,सचिव डॉ.अरविंद नारायण,कोषाध्यक्ष रायपाल सिंह,उपमंत्री हुकम लाल,सलाहकार मंडल-शाबा देवी,संगीता देवी,मीना देवी,लक्ष्मी देवी,गठन के बाद आयोजित चर्चा सत्र में महाविद्यालय के शिक्षकों डॉ.अन्धरुति शाह,डॉ.अनुरोध प्रभाकर,डॉ.बबीत बिहान,डॉ.पुष्पा झाबा,डॉ.अरविंद नारायण,डॉ.गोविंद कुमार और प्रकाश चंद्र ने विद्यार्थियों की शैक्षणिक उन्नति,करियर काउंसलिंग,छात्रवृत्ति,राष्ट्रीय सेवा योजना (NSS),नैक (NAAC) मूल्यांकन, खेलकूद एवं अन्य गतिविधियों पर अपने विचार रखे। कार्यक्रम के अंत में डॉ.अनुरोध प्रभाकर ने सभी उपस्थित जनों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इस प्रकार के आयोजन शिक्षा जगत में अभिभावकों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करते हैं,जो भविष्य में सकारात्मक परिणाम देंगे। इस अवसर पर महाविद्यालय के सभी शिक्षकगण,कार्यालय कर्मी,बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं एवं उनके अभिभावकगण उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन उत्साह,सहभागिता और सहयोग की भावना से परिपूर्ण रहा,जिसने महाविद्यालय में एक नई ऊर्जा और पारस्परिक संवाद का वातावरण निर्मित किया।

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