Thursday 16/ 04/ 2026 

Bharat Najariya
जेसीज का दसवीं की बोर्ड परीक्षा में शतप्रतिशत परिणाम के साथ उत्कृष्ट प्रदर्शनदिल्ली पब्लिक स्कूल, रुद्रपुर के छात्रों ने रचा इतिहास – बोर्ड परीक्षा में शानदार प्रदर्शनदेवभूमि में आस्था का महासंगम-बैसाखी पर देवलगढ़ गौरा देवी दरबार में भव्य भंडारा,जागरण और कन्या पूजन से गूंजा क्षेत्रजसपुर में मूर्ति लगाने को लेकर विधायक आदेश चौहान और भाजपा पूर्व विधायक के बीच जमकर हंगामारुद्रपुर। अटरिया माँ का डोला आज शाम 4 बजे जगतपुरा से गाजे बाजे के साथ रम्पुरा पहुँचेगा।प्रेस को जारी विज्ञप्ति में अटरिया मन्दिर की महंत पुष्पा देवी ने बताया कि विगत दिनों 26 मार्च को माँ अटरिया का डोला पूरे विधि विधान से रम्पुरा से जगतपुरा स्थित मंदिर लाया गया था और उसके उपरांत भक्तों के लिए मंदिर के कपाट खोल दिए गए थे जिससे दूर-दराज से पहुंचे भक्तों ने माता के दरबार में प्रसाद चढ़कर अपनी मन्नतें मांगी व मां का आशीर्वाद प्राप्त किया, वही आज 15 अप्रैल को माँ अटरिया का डोला पूरे विधि विधान व पूजा अर्चना के बाद गाजे बाजे के साथ जगतपुरा से रम्पुरा स्थित मंदिर पहुँचेगा, जिसमें महंत पुष्पा देवी ने सभी भक्तों से ज्यादा से ज्यादा संख्या में पहुंचने की अपील की हैसूबे मुख्य सचिव आनंद वर्धन ने सभी जिलाधिकारियों की वर्चुअल बैठक लेते हुए कह कि राज्य में ग्रीष्म ऋतु के दौरान उच्च तापमान एवं शुष्क परिस्थितियों के कारण विभिन्न प्रकार की समस्याएं उत्पन्न होती हैं, जो जन-जीवन एवं आधारभूत सेवाओं को प्रभावित करती हैं। इस अवधि में पेयजल स्रोतों में कमी आने से जल संकट की स्थिति बन जाती है, जबकि विद्युत की मांग में वृद्धि से आपूर्ति तंत्र पर दबाव बढ़ता है। सूखेपन के कारण वनाग्नि की घटनाओं में भी वृद्धि होती है, जिससे वन संपदा एवं पर्यावरण को क्षति पहुंचती है। इसके अतिरिक्त शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्रों में आगजनी की घटनाएं, पेयजल आपूर्ति में व्यवधान तथा अन्य मौसमी चुनौतियां भी सामने आती हैं।मुख्य सचिव ने कहा कि इसके अतिरिक्त मैदानी जनपदों में हीट वेव की स्थिति विशेष रूप से जन-स्वास्थ्य के लिए गंभीर चुनौती उत्पन्न करती है। अत्यधिक तापमान के कारण लू लगने, डिहाइड्रेशन एवं अन्य स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का खतरा बढ़ जाता है, जिससे बुजुर्गों, बच्चों, गर्भवती महिलाओं एवं बाहरी कार्य करने वाले श्रमिकों पर विशेष प्रभाव पड़ता है। ऐसी परिस्थितियों में स्वास्थ्य सेवाओं पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है तथा समय पर राहत एवं बचाव उपायों की आवश्यकता बढ़ जाती है। अतः हीट वेव के प्रभावी प्रबंधन हेतु पूर्व चेतावनी, जनजागरूकता एवं त्वरित प्रतिक्रिया व्यवस्था सुनिश्चित किया जाना अत्यंत आवश्यक है।जिलाधिकारी नितिन सिंह भदौरिया ने बताया कि ग्रीष्म ऋतु तैयारी के संबंध में जनपद स्तरीय अधिकारियों के साथ बैठक कर सभी अधिकारियों को निर्देशित कर दिया गया है। उन्होने बताया कि स्वास्थ्य विभाग को अस्पताल में दवाइयां, एंबुलेंस, मेडिकल टीम तैयार करने, गर्भवती महिलाओं का डाटा एकत्रित करने तथा सर्पदंस एंटी वेनम किट सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, जिला चिकित्सालय में पर्याप्त रूप से रखे जाने, ग्रीष्म ऋतु की स्थिति में शिक्षण एवं पठन-पठान की समय अवधि में परिवर्तन किए जाने, ग्रीष्म ऋतु से संबंधित जानकारी का प्रचार प्रसार किया जाने हेतु शिक्षा विभाग को निर्देश दिए गये है। उन्होने बताया कि जल संस्थान और पेयजल विभाग को पेयजल लाइनों की मरम्मत कर शुद्ध पेयजल आपूर्ति किये जाने, खराब हैंडपंप आदि की समय पर मरम्मत करने के साथ ही पेयजल समस्या क्षेत्रों में सुचारू पेयजल हेतु वैकल्पिक व्यवस्था रखने के निर्देश दिये गये है। उन्होने विद्युत विभाग को निर्देश दिए कि ग्रीष्म ऋतु के दौरान सुचारू विद्युत आपूर्ति हेतु विद्युत उकरणों की व्यवस्थाएं रखने, निगर निकायों, बस अण्डो, चिकित्सालयों, निर्माण कार्य स्थलों में पर्याप्त प्याऊ, पेयजल,सेड आदि व्यवस्था करने के निर्देश दिये गये है। उन्होने कहा कि वनाग्नि पर प्रभावी रोक-थाम हेतु समुचित व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने के निर्देश प्रभागीय वनाधिकारियों को निर्देश दिये गये है। उन्होने बताया कि ग्रीष्मकाल हेतु आपदा प्रबंधन कार्यालय में कंट्रोल रूम स्थापित कर दिया गया है।उड़ान योजना के अन्तर्गत पवन हंस द्वारा पंतनगर एयरपोर्ट से हेलीकॉप्टर सेवाएं हुई प्रारम्भ। बुधवार को विधायक शिव अरोरा व जिलाधिकारी नितिन सिंह भदौरिया ने पंतनगर एयरपोर्ट से नौकुचियाताल के लिए प्रथम हैलीकॉप्टर सेवा का झण्डी दिखाकर व नारियल फोड़कर किया शुभारम्भ।विधायक शिव अरोरा ने शुभकामना देते हुए कहा कि पर्यटक व पहाड़ के विकास के दृष्टि से एक क्रांतिकारी कदम है। उन्होने कहा प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी व मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देशन में देहरादून, अल्मोड़ा, नैनीताल, पंतनगर के लिए हेली सेवा प्रारम्भ की गयी है। इसके लिए मा0 विधायक ने प्रधानमंत्री व मुख्यमंत्री का आभार व्यक्त किया। उन्होने कहा कि हेली सेवा प्रारम्भ होने से पहाड़ी क्षेत्र, नेपाल व उत्तराखण्ड की सीमा से लगे उत्तर प्रदेश के लोगों के लिए आवगमन में सुविधा का लाभ मिलेगा। उन्होने कहा पहाड़ की ओर जाने वाले पर्यटक हेली सेवा से आधे, पौने घण्टे में अल्मोड़ा, देहरादून, नैनीताल आसानी से पहुंच पायेगें, जिससे पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा। उन्होने कहा यह पहल आम नागरिकों के लिए सुलभ, किफायती व विश्वसनीय हवाई परिवहन सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है जो आगे चलकर मिल का पत्थर साबित होगा।जिलाधिकारी नितिन सिंह ने कहा हेली सेवा देहरादून, नौकुचियाताल, अल्मोड़ा को जोड़ेगा। उन्होने कहा हेली सेवा शुरू होने से लोगों को काफी सुविधा मिलेगी व समय की भी बचत होगी। उन्होने कहा पंतनगर एयरपोर्ट को अन्तर्राष्ट्रीय स्तर का एयरपोर्ट बनाया जा रहा है जिसका विस्तारिकरण कार्य का शीघ्र शुभारम्भ होगा। पंतनगर एयरपोर्ट के विस्तार से पंतनगर एयरपोर्ट नोयडा के जेवर व इन्दिरा गांधी एयरपोर्ट दिल्ली से जुड़ेगा व अन्तर्राष्ट्रीय उड़ानों का लाभ मिलेगा। उन्होने कहा एयरपोर्ट के विस्तार होने से औद्योगिक संस्थानों को भी काफी सुविधा मिलेगी।मसूरी में अग्निशमन सेवा सप्ताह की शुरुआतरू ‘छोटी चिंगारी से बड़ा खतरा’, फायर सर्विस ने शहर को किया सतर्क मसूरी, 14 अप्रैल पर्यटन नगरी मसूरी में राष्ट्रीय अग्निशमन सेवा सप्ताह 2026 के तहत फायर सर्विस ने व्यापक जागरूकता अभियान चलाकर लोगों को आग से बचाव के प्रति सतर्क किया। “सुरक्षित स्कूल, सुरक्षित अस्पताल और जागरूक समाज मिलकर रोकें आग” थीम के साथ यह अभियान 14 अप्रैल से शुरू हुआ।अंतरराष्ट्रीय अग्निशमन सेवा दिवस के मौके पर फायर अधिकारी राजकुमार के नेतृत्व में फायर स्टेशन से मालिंगा चौक तक जागरूकता रैली निकाली गई। रैली के दौरान लोगों को बताया गया कि छोटी सी आग भी समय पर काबू न पाने पर बड़ा हादसा बन सकती है।फायर टीम ने आमजन को समझाया कि आग लगने के शुरुआती मिनट सबसे अहम होते हैं मौके पर मौजूद दो लोग मिलकर तुरंत आग बुझाने का प्रयास करें। पानी, रेत या कंबल का इस्तेमाल करें, बिना देर किए 112 नंबर पर सूचना दें। अग्निशमन विभाग ने संस्थानों के लिए भी जरूरी गाइडलाइन जारी की स्कूलों के लिए पुराने बिजली तार और खराब स्विच तुरंत बदलें आपातकालीन निकास द्वार हमेशा खाली रखें व अस्पतालों के लिए ऑक्सीजन सिलेंडर के पास ज्वलनशील पदार्थ न रखें स्टाफ को फायर एक्सटिंग्यूशर चलाने की ट्रेनिंग दें। मरीजों को सुरक्षित निकालने की विशेष व्यवस्था रखें।फायर सर्विस ने लोगों को रोजमर्रा की जिंदगी में बरती जाने वाली सावधानियों पर भी जोर दिया जिसमें खाना बनाने के बाद गैस रेगुलेटर बंद करें। एक सॉकेट में ज्यादा उपकरण न लगाएंआग लगने पर झुककर बाहर निकलें, लिफ्ट का इस्तेमाल न करें, कपड़ों में आग लगने पर “स्टॉप, ड्रॉप एंड रोल” अपनाएं, माचिस-लाइटर बच्चों की पहुंच से दूर रखें।कार्यक्रम की शुरुआत में मुंबई अग्निकांड में शहीद हुए 67 अग्निशमन कर्मियों को श्रद्धांजलि दी गई। अधिकारियों ने बताया कि इसी घटना के बाद से पूरे देश में यह सप्ताह मनाकर लोगों को जागरूक किया जाता है। अग्निशमन अधिकारी धीरज सिंह तड़ियाल ने कहा कि आग से बचाव सिर्फ फायर सर्विस की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि हर नागरिक की सतर्कता से ही बड़े हादसों को रोका जा सकता है।
उत्तराखण्ड

राज्य स्थापना दिवस विशेषांक-सहकारिता से समृद्धि के नये आयाम-आत्मनिर्भर उत्तराखंड की नींव रख रही जन-सहकारिता की ताकत


देहरादून/श्रीनगर गढ़वाल। उत्तराखंड राज्य स्थापना के 25 वर्ष के इस गौरवशाली सफर में सहकारिता विभाग ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ को सशक्त कर राज्य के विकास का नया अध्याय लिखा है। पर्वतीय क्षेत्रों के किसानों,महिलाओं,काश्तकारों,युवाओं और कारीगरों को संगठित कर सहकारिता को जनांदोलन का स्वरूप देने का श्रेय इसी विभाग को जाता है। मुख्यमंत्री घस्यारी कल्याण योजना और माधो सिंह भण्डारी सामूहिक खेती योजना जैसी योजनाओं ने न केवल किसानों को आत्मनिर्भर बनाया,बल्कि पलायन पर रोक लगाने और ग्रामीण समृद्धि की नई दिशा दिखाने में भी अहम भूमिका निभाई है। राज्य गठन के समय जहां विभाग में 528 स्वीकृत पद थे,वहीं अब यह संख्या बढ़कर 607 हो गई है। सहकारी समितियों की संख्या 1800 से बढ़कर 6346,जिला सहकारी बैंक शाखाएं 207 से बढ़कर 330 और शीर्ष सहकारी संस्थाएं 3 से बढ़कर 14 तक पहुंच गई हैं। वर्तमान में 672 पैक्स समितियां सक्रिय रूप से कार्यरत हैं, जो ग्रामीण जनता तक योजनाओं का लाभ पहुंचा रही हैं। सहकारिता विभाग ने संस्थागत सुधार की दिशा में सहकारी संस्थागत सेवामंडल,सहकारी न्यायाधिकरण तथा सहकारी निर्वाचन प्राधिकरण का गठन किया-जिससे विभागीय कामकाज में पारदर्शिता और उत्तरदायित्व सुनिश्चित हुआ। विभाग में पहली बार राष्ट्रीय स्तर की संस्था IBPS के माध्यम से 2018-19 में प्रतिस्पर्धात्मक परीक्षाओं द्वारा भर्ती की गई। इस प्रक्रिया में 597 अभ्यर्थियों को नियुक्ति दी गई,जबकि 177 पदों पर भर्ती प्रक्रिया प्रगति पर है। साथ ही राज्य आंदोलनकारी,मृतक आश्रित और सीधी भर्ती कोटे के माध्यम से 475 कार्मिकों की नियुक्ति की गई जो विभागीय दक्षता और निष्पक्षता की मिसाल है। 11 लाख लाभार्थियों तक पहुंचा ब्याजमुक्त ऋण आर्थिक सशक्तिकरण की मिसाल,दीनदयाल उपाध्याय सहकारिता किसान कल्याण योजना के तहत वर्ष 2017 से सितंबर 2025 तक 11,34,434 लाभार्थी 6,413 स्वयं सहायता समूह को कुल रुपए 6957.88 करोड़ का ब्याजमुक्त ऋण प्रदान किया गया है। इस योजना के तहत कृषि कार्यों हेतु 1 लाख रुपए तक का ऋण,कृषितर कार्यों हेतु रुपए 3 लाख तक,स्वयं सहायता समूहों हेतु रुपए 5 लाख तक का ब्याज रहित ऋण उपलब्ध कराया जा रहा है। यह पहल ग्रामीण युवाओं,काश्तकारों और महिलाओं के लिए आर्थिक स्वतंत्रता का मार्ग प्रशस्त कर रही है। उत्तराखंड राज्य सहकारी संघ ने किसानों की उपज खरीद में पारदर्शी व्यवस्था लागू की है। राज्यभर में 239 क्रय केन्द्रों के माध्यम से अब तक 67171.92 क्विंटल मिलेट्स की खरीद की गई है,जिसके एवज में रुपए 26.52 करोड़ का भुगतान सीधे किसानों के खातों में किया गया। इस पहल से किसानों को स्थायी बाजार और न्यायसंगत मूल्य दोनों मिले हैं। पर्वतीय क्षेत्रों की महिलाओं को चारे के बोझ से मुक्ति दिलाने हेतु शुरू की गई मुख्यमंत्री घस्यारी कल्याण योजना ने ग्रामीण जीवन की दिशा बदल दी है। 182 सहकारी समितियों के माध्यम से 5.55 लाख मीट्रिक टन सायलेज वितरण कर 54 हजार लाभार्थियों को राहत दी गई। अब महिलाएं पशुपालन और कृषि में अधिक समय दे पा रही हैं जिससे उनकी आर्थिक भागीदारी भी बढ़ी है। माधो सिंह भंडारी सहकारी सामूहिक खेती योजना-बंजर भूमि से उपजाऊ भविष्य की ओर राज्य में पलायन से खाली पड़ी भूमि को फिर से जीवन देने वाली यह योजना आज मॉडल प्रोजेक्ट बन चुकी है। राज्य के 13 जनपदों में 24 सहकारी समितियों के माध्यम से 2400 किसानों ने मिलकर 1235 एकड़ भूमि पर सामूहिक खेती शुरू की है। यह योजना साबित कर रही है कि एकजुटता से खेती,पलायन रोकने और रोजगार सृजन दोनों में कारगर हो सकती है। वाइब्रेंट विलेज योजना के तहत सीमांत क्षेत्रों में स्थित सहकारी समितियां आईटीबीपी और सेना की वाहिनियों को स्थानीय उत्पाद-जीवित बकरी,भेड़,कुक्कट,ट्राउट मछली,फल-सब्जियां-आपूर्ति कर रही हैं। इससे स्थानीय किसानों और उत्पादकों को स्थायी आय का स्रोत मिला है और स्वदेशी उत्पादों को नया बाजार। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संकल्प से सिद्धि मंत्र को मूर्त रूप देते हुए,एनसीडीसी के सहयोग से राज्य में समेकित सहकारी विकास परियोजना संचालित की जा रही है। इसमें सहकारिता,मत्स्य,भेड़-बकरी पालन एवं डेयरी विकास के तहत 50,000 से अधिक किसान प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रूप से लाभान्वित हो रहे हैं। प्रदेश की 670 पैक्स समितियां अब पूरी तरह डिजिटल प्लेटफॉर्म पर कार्यरत हैं। उत्तराखंड के इस मॉडल से प्रेरित होकर भारत सरकार ने इसे राष्ट्रीय स्तर पर लागू करने की घोषणा की है। अब सहकारिता से जुड़ी सेवाएं ऑनलाइन उपलब्ध हैं,जिससे पारदर्शिता और जवाबदेही में अभूतपूर्व सुधार हुआ है। प्रदेश की पैक्स समितियां अब जनसुविधा केन्द्र के रूप में विकसित की जा रही हैं। वर्तमान में 23 एम-पैक्स जन औषधि केन्द्र के रूप में कार्यरत हैं। 650 सहकारी समितियां सीएससी (कॉमन सर्विस सेंटर) के रूप में काम कर रही हैं। 478 पैक्स में प्रधानमंत्री समृद्धि केन्द्र स्थापित किए गए हैं,जहां किसानों को उर्वरक और कृषि सामग्री मिल रही है। राज्य सरकार ने सहकारी समितियों एवं बैंकों में महिलाओं को प्रबंध समिति व अध्यक्ष पदों पर 33% आरक्षण देकर इतिहास रचा है। इस कदम ने सहकारिता में महिलाओं की भागीदारी को नई ऊंचाई दी है और उन्हें नेतृत्व की भूमिका में लाया है। राज्य गठन के समय सहकारी बैंकों का एनपीए रुपए 4838.16 लाख था,जो अब घटकर रुपए 690.30 लाख रह गया है। यह सहकारिता प्रणाली की वित्तीय सुदृढ़ता और सुशासन का प्रमाण है। राज्य सरकार का लक्ष्य है कि सहकारिता केवल वित्तीय लेन-देन का माध्यम न रहकर जनकल्याण का व्यापक आंदोलन बने। पारदर्शिता,जवाबदेही और सुशासन को आधार बनाकर सहकारिता विभाग आत्मनिर्भर उत्तराखंड के निर्माण में अग्रणी भूमिका निभा रहा है। सहकारिता केवल संस्था नहीं,बल्कि एक विचारधारा है,जो समाज के हर वर्ग को जोड़ती है,सशक्त बनाती है और विकास के द्वार खोलती है।

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