Tuesday 24/ 02/ 2026 

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उत्तराखण्ड

प्रेस विज्ञप्ति

ट्रेड यूनियन ऐक्टू से संबद्ध बजाज मोटर्स कर्मकार यूनियन ने केंद्र सरकार द्वारा पारित चार श्रम संहिताओं को लागू करने के विरोध में श्रम संहिताओं की प्रतियां परशुराम चौक ट्रांजिट कैंप में जलाई।

इस दौरान यूनियन के महामंत्री हीरा सिंह राठौर ने कहा कि जिन चार श्रम संहिताओं को सरकार बहुत अच्छा बता रही है वे दरअसल मजदूरों की गुलामी के दस्तावेज हैं। पुराने 44 श्रम कानूनों में जो अधिकार मजदूरों को हासिल थे, उन अधिकारों में कटौती करके सरकार ने नए सिरे से 4 श्रम संहिता बना दी हैं। पहले से ही सरकार के मजदूर विरोधी रुख के कारण मजदूर बदहाली में जी रहा था। लेकिन अब नए श्रम संहिताओं में अपनी बदहाली के खिलाफ न्याय का दरवाजा भी नहीं खटखटा सकता है। पहले श्रमिक अपनी योग्यता के दम पर 58 वर्ष की उम्र तक स्थाई नौकरी फैक्ट्रियों में पा लेते थे। लेकिन इन 4 श्रम संहिताओं के लागू होने के बाद स्थाई नौकरी के बजाय निश्चित अवधि यानि फिक्स्ड टर्म जॉब होगी। यह निश्चित अवधि अलग –अलग फैक्ट्रियों के स्टैंडिंग ऑर्डर के अनुसार 1 से लेकर 10 साल तक अलग–अलग हो सकती है। निश्चित अवधि की नौकरी के बावजूद श्रमिक के ऊपर हमेशा हायर एंड फायर पॉलिसी के तहत फायर होने(नौकरी से निकाले जाने ) का खतरा बना रहेगा।
इन नए कानूनों के तहत मजदूरों का यूनियन बनाकर अपने हक अधिकार के लिए एकताबद्ध होना और लड़ना असंभव हो जाएगा। जिस कारण कंपनी मालिक मजदूरों का बेतहाशा शोषण करने में कामयाब होगा। नए श्रम संहिताओं में अब कोई भी 300 श्रमिक नियुक्त करने वाला कंपनी मालिक मनमर्जी से जब चाहे तब , बिना राज्य सरकार से अनुमति प्राप्त किए कंपनी बंद कर सकता है। पहले श्रम कानूनों में यह सीमा 100 श्रमिक की थी।
ऐक्टू की अनिता अन्ना ने कहा कि हम लगातार पाते हैं कि फैक्ट्रियों में किस तरह से प्रबंधन वर्ग मजदूरों के शोषण करता है। शोषण से तंग आकर कभी कभी मजदूर हड़ताल करके शोषण के खिलाफ आवाज उठा पाता था । जो कि पुराने कानूनों में उसका कानूनी हक था। लेकिन अब नई श्रम संहिताओं में यह हक भी खत्म कर दिया गया है। हड़ताल को गैर कानूनी बना दिया गया है। ऐसे में हमें पूरा विश्वास है कि नई श्रम संहिताओं को मजदूरों को गुलाम बनाने के लिए लाया गया है।
इस दौरान भाकपा(माले) के जिला सचिव ललित मटियाली ने कहा कि मोदी सरकार देश के हर संसाधन को पूंजीपतियों को सौंप रही है। देश के श्रम बल को पूंजीपतियों का गुलाम बनाने की कोशिश कर रही है। देश की जमीनों को धड़ल्ले से अडानी, अंबानी जैसे पूंजीपतियों के हाथों लूटा रही है। और यह सब देश में अमृतकाल के दौर के नए कानूनों के माध्यम से कर रही है। यानी हर गैर संविधानिक कार्यवाहियों को संवैधानिक बनाकर पूंजीपतियों का हित साध रही है।

इस दौरान ऐक्टू शहर अध्यक्ष उत्तम दास, यूनियन अध्यक्ष जगमोहन डसीला, हेम दुर्गापाल, विनोद कुमार, महिपाल सिंह , विनोद पंत , नवल, कैलाश कुमार,संजीव कुमार,गुड्डू कुमार, रामकोमल, बबलू सिंह, पुष्कर सिंह, उमा शंकर, संदीप हुड्डा, प्रदीप चंद , प्रकाश चंद्र, ललित लोहनी , राजेंद्र सिंह, अनिल तिवारी ,कैलाश जोशी, कैलाश भट्ट, गिरीश रावत,अजय यादव, पंचदेव आदि शामिल रहे।

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