35 वर्षों की गौरवपूर्ण शैक्षिक यात्रा को सलाम-प्रधानाचार्य विभोर बहुगुणा को दी भावभीनी विदाई

कीर्तिनगर/श्रीनगर गढ़वाल। शिक्षा केवल पाठ्यपुस्तकों तक सीमित नहीं होती वह संस्कारों,अनुशासन और जीवन मूल्यों की आधारशिला भी रखती है। इसी विचार को अपने 35 वर्ष पांच माह के दीर्घ सेवाकाल में आत्मसात करने वाले राजकीय इण्टर कॉलेज न्यूली अकरी,विकासखंड कीर्तिनगर के प्रधानाचार्य विभोर बहुगुणा को सेवानिवृत्ति के अवसर पर विद्यालय परिवार एवं क्षेत्रीय अभिभावकों ने भावभीनी विदाई दी। विद्यालय परिसर में आयोजित सम्मान समारोह में शिक्षक-कर्मचारियों,छात्रों और क्षेत्रीय अभिभावकों ने बहुगुणा के योगदान को स्मरण करते हुए उन्हें शिक्षा जगत का सजग प्रहरी बताया। अपने सेवाकाल (24 सितंबर 1990 से 28 फरवरी 2026) के दौरान उन्होंने विभिन्न विद्यालयों में कर्तव्यनिष्ठा और समर्पण के साथ सेवाएं दीं। उनकी प्रथम नियुक्ति 24 सितंबर 1990 को राजकीय इंटर कॉलेज कल्जीखाल में भौतिक विज्ञान प्रवक्ता के रूप में हुई थी। इसके बाद उन्होंने राजकीय इंटर कॉलेज देहलचौंरी,राजकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय जखेद तथा पुनः राजकीय इंटर कॉलेज कल्जीखाल में बतौर प्रधानाचार्य अपनी जिम्मेदारियां निभाई। शिक्षकों और अभिभावकों ने कहा कि बहुगुणा ने विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास-शैक्षणिक उपलब्धियों के साथ-साथ खेल,सांस्कृतिक गतिविधियों और नैतिक मूल्यों-पर विशेष ध्यान दिया। उनके कार्यकाल में विद्यालय अनुशासन,परीक्षा परिणाम और सह-पाठ्यक्रम गतिविधियों के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की गई। समारोह में उन्हें माल्यार्पण,अंगवस्त्र और स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया गया। वक्ताओं ने उनके सरल स्वभाव,प्रशासनिक दक्षता और सामाजिक सरोकारों की सराहना की। व्यक्तिगत जीवन में भी शिक्षा से उनका गहरा नाता रहा है। उनकी धर्मपत्नी प्रभा बहुगुणा श्रीनगर स्थित भगवती पब्लिक मेमोरियल इंटर कॉलेज में प्रधानाचार्या के पद पर कार्यरत हैं। उनके दोनों सुपुत्र आयुष बहुगुणा और उत्कर्ष बहुगुणा सॉफ्टवेयर इंजीनियर के रूप में सेवाएं दे रहे हैं। विदाई के क्षणों में भावुक माहौल के बीच बहुगुणा ने विद्यालय परिवार,सहकर्मियों और क्षेत्रवासियों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि शिक्षा के क्षेत्र में बिताए गए ये वर्ष उनके जीवन की सबसे अमूल्य पूंजी हैं। समारोह में उपस्थित जनों ने उन्हें स्वस्थ,सुखद एवं सक्रिय जीवन की शुभकामनाएं दीं। शिक्षा जगत में उनका योगदान लंबे समय तक स्मरणीय रहेगा।
