Monday 02/ 03/ 2026 

Bharat Najariya
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दीदी कैफे बना पहाड़ के स्वाद और स्वाभिमान की पहचान-मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की पहल से स्वरोजगार को नई उड़ान


पौड़ी/श्रीनगर गढ़वाल। पहाड़ की सोंधी खुशबू,मंडुवे की गरम रोटी,कंडाली की सब्जी और लाल चावल का भात जैसे ही ये व्यंजन थाली में सजते हैं,बरबस ही लोगों को अपनी मिट्टी की याद दिला देते हैं। पौड़ी मुख्यालय में संचालित दीदी कैफे आज सिर्फ एक भोजनालय नहीं,बल्कि पहाड़ी अस्मिता,महिला सशक्तिकरण और स्वरोजगार का सशक्त प्रतीक बन चुका है। प्रदेश के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की पहल पर महिलाओं को स्वरोजगार से जोड़ने और स्थानीय उत्पादों को बाजार उपलब्ध कराने की मुहिम के तहत शुरू हुआ यह कैफे अल्प समय में ही अपनी अलग पहचान बनाने में सफल रहा है। 15 अगस्त 2023 को आरंभ हुए इस कैफे का संचालन स्थानीय समूह की चार महिलाएं और दो पुरुष रसोइये मिलकर कर रहे हैं। यहां परोसे जाने वाले पारंपरिक पहाड़ी व्यंजन लोगों के बीच खासे लोकप्रिय हो चुके हैं। पहाड़ी दाल,चौंसा,लाल चावल का भात,कंडाली की सब्जी,मंडुवे की रोटी के साथ-साथ मंडुवे के मोमो ने भी ग्राहकों के स्वाद को नया आयाम दिया है। स्थानीय लोगों के अलावा बाहर से आने वाले पर्यटक और आगंतुक भी यहां पहाड़ी स्वाद का आनंद लेने पहुंच रहे हैं। दीदी कैफे की सफलता के पीछे योजनाबद्ध सहयोग और संसाधनों का भी अहम योगदान है। भवन की मरम्मत जिला योजना के माध्यम से कराई गई,जबकि हिमोत्थान समिति (टाटा ट्रस्ट) के सहयोग से कैफे को बर्तन और आवश्यक सामग्री उपलब्ध कराई गई। इससे संचालन व्यवस्था सुदृढ़ हुई और समूह की महिलाओं को बेहतर कार्य वातावरण मिला। आर्थिक दृष्टि से भी यह कैफे सशक्त मॉडल बनकर उभरा है। प्रतिदिन औसतन 3500 से 4 हजार रुपये की आय के साथ मासिक टर्नओवर 1 से 1.20 लाख रुपये तक पहुंच रहा है। वार्षिक टर्नओवर लगभग 12 से 13 लाख रुपये आंका गया है,जिसमें से करीब 4.50 से 5 लाख रुपये की शुद्ध बचत हो रही है। यह आय समूह की महिलाओं को नियमित रोजगार और आत्मनिर्भरता का भरोसा दे रही है। मुख्य विकास अधिकारी गिरीश गुणवंत ने कहा कि दीदी कैफे महिलाओं को स्वरोजगार से जोड़ने का सफल मॉडल बन चुका है। स्थानीय व्यंजनों को बाजार से जोड़कर न केवल महिलाओं की आय में वृद्धि हो रही है,बल्कि पहाड़ी कृषि उत्पादों को भी प्रोत्साहन मिल रहा है। आज दीदी कैफे पहाड़ के स्वाद को नई पहचान देने के साथ-साथ यह संदेश भी दे रहा है कि यदि अवसर और सहयोग मिले,तो ग्रामीण महिलाएं आर्थिक आत्मनिर्भरता की नई इबारत लिख सकती हैं। यह पहल निश्चित ही अन्य स्वयं सहायता समूहों के लिए प्रेरणास्रोत बन रही है।

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