मानवता की मिसाल-नवजात की जिंदगी बचाने को आगे आए बैंक प्रबंधक

श्रीनगर गढ़वाल। बेस अस्पताल श्रीनगर के एनआईसीयू नवजात गहन चिकित्सा कक्ष में जिंदगी और मौत के बीच जूझ रहे एक नवजात शिशु के लिए उस वक्त उम्मीद की किरण जगी,जब समय रहते एक सजग नागरिक ने आगे आकर रक्तदान कर उसकी जान बचा ली। यह घटना न केवल मानवता की मिसाल है,बल्कि समाज के लिए प्रेरणादायक संदेश भी देती है। प्राप्त जानकारी के अनुसार जनपद चमोली के पोखरी निवासी हेमन्त की धर्मपत्नी सुनीता देवी के 5 दिन के नवजात शिशु की हालत गंभीर बनी हुई थी और उसे तत्काल बी-पॉजिटिव रक्त की आवश्यकता थी। चिकित्सकों ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए शीघ्र रक्त की व्यवस्था करने को कहा,जिसके बाद परिजनों में चिंता और व्याकुलता बढ़ गई। इसी बीच समाजसेवी नरेश नौटियाल गायत्री मेडिकल श्रीकोट ने इस मानवीय संकट की सूचना साझा की और मदद की अपील की। अपील का असर ऐसा हुआ कि उत्तराखंड ग्रामीण बैंक श्रीकोट शाखा के प्रबंधक विशाल प्रधान ने बिना देर किए आगे बढ़कर एक यूनिट रक्तदान किया। उनके इस सराहनीय कदम से न केवल नवजात शिशु को समय पर जीवनदायी रक्त मिल सका,बल्कि एक परिवार की खुशियां भी उजड़ने से बच गईं। अस्पताल प्रशासन और परिजनों ने विशाल प्रधान के इस योगदान के प्रति गहरी कृतज्ञता व्यक्त की है। यह घटना एक बार फिर यह साबित करती है कि संकट की घड़ी में यदि समाज एकजुट हो जाए तो असंभव भी संभव हो सकता है। रक्तदान जैसे महान कार्य से किसी की जिंदगी बचाई जा सकती है,और यह हर व्यक्ति का नैतिक दायित्व भी है कि जरूरतमंदों की मदद के लिए आगे आए। स्थानीय लोगों ने भी विशाल प्रधान के इस मानवीय कार्य की सराहना करते हुए इसे अनुकरणीय बताया और अधिक से अधिक लोगों से रक्तदान के लिए आगे आने की अपील की। इस पूरी घटना ने एक सशक्त संदेश दिया है रक्तदान महादान है,यह किसी को जीवन देने का सबसे बड़ा माध्यम है।
