Tuesday 26/ 05/ 2026 

Bharat Najariya
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राज्य

गढ़वाल विश्वविद्यालय में संयोगिता मंच भारतीय भाषा उत्सव के अंतर्गत प्रतियोगिता में झलकी भाषाई विविधता और सांस्कृतिक एकता


श्रीनगर गढ़वाल। भाषाएं केवल अभिव्यक्ति का माध्यम नहीं बल्कि संस्कृति,परंपरा और पहचान की जीवंत धरोहर होती हैं। इसी भावना को साकार करते हुए हेमवती नन्दन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय में एनईपी सारथी के तत्वावधान में संयोगिता मंच भारतीय भाषा उत्सव के अंतर्गत एक भव्य प्रतियोगिता का आयोजन किया गया,जिसमें भारतीय भाषाई विविधता का अद्भुत संगम देखने को मिला। इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य भारतीय भाषाओं एवं लोकबोलियों के संरक्षण,संवर्धन और प्रोत्साहन के साथ-साथ विद्यार्थियों में बहुभाषिक अभिव्यक्ति की क्षमता विकसित करना रहा। साथ ही विभिन्न भाषाई परंपराओं के प्रति सम्मान और एक भारत,श्रेष्ठ भारत की सांस्कृतिक भावना को सुदृढ़ करना भी इस पहल का प्रमुख लक्ष्य रहा। यह आयोजन नई शिक्षा नीति (एनईपी) के तहत मातृभाषा-आधारित शिक्षा को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। कार्यक्रम में छात्र-छात्राओं ने गढ़वाली,कुमाऊनी,भोजपुरी,राजस्थानी,सिंधी,ब्रज,अवधी जैसी विविध भाषाओं और बोलियों में अपनी प्रभावशाली प्रस्तुतियां देकर दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। मंच पर प्रस्तुत इन विविध स्वरूपों ने भारत की भाषाई समृद्धि और सांस्कृतिक वैभव का सजीव चित्र प्रस्तुत किया। इस अवसर पर मुख्य अतिथि प्रो.एम.सी.सती अर्थशास्त्र विभागाध्यक्ष ने अपने संबोधन में भारतीय भाषाओं के संरक्षण और उनके दैनिक जीवन में व्यापक उपयोग की आवश्यकता पर बल दिया। वहीं विशिष्ट अतिथि प्रो.प्रशांत कंडारी डीन शैक्षणिक कार्य एवं एनईपी समन्वयक ने बहुभाषिक शिक्षा की आवश्यकता को रेखांकित करते हुए ऐसे आयोजनों को समय की मांग बताया। निर्णायक मंडल में डॉ.कपिल देव पंवार,डॉ.अनुराही एवं डॉ.नितिन बिष्ट शामिल रहे,जिन्होंने प्रतिभागियों के प्रदर्शन का निष्पक्ष एवं गहन मूल्यांकन किया। साथ ही उन्होंने विद्यार्थियों को भाषाओं के महत्व और उनके संरक्षण के प्रति प्रेरित करते हुए महत्वपूर्ण मार्गदर्शन भी प्रदान किया। प्रतियोगिता में प्रतिभागियों ने उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए अपनी प्रतिभा का परिचय दिया,जिसमें नीरज बर्थवाल ने प्रथम,ऋषभ वर्मा ने द्वितीय तथा वैशाली त्रिपाठी ने तृतीय स्थान प्राप्त किया। कार्यक्रम का सफल संचालन एवं आयोजन एनईपी सारथी समन्वयक डॉ.चन्द्रशेखर जोशी के मार्गदर्शन में किया गया। इस दौरान एनईपी सारथी टीम के सृजल,श्रेया,शालिनी,अंशुमान,आंचल,अक्ष्या,सहस्रांशु एवं अनुपमा ने सक्रिय भूमिका निभाते हुए कार्यक्रम को सफल बनाया। भाषाएं ही संस्कृति की आत्मा हैं यह आयोजन न केवल एक प्रतियोगिता रहा,बल्कि भारतीय भाषाओं की समृद्ध परंपरा,सांस्कृतिक एकता और युवा पीढ़ी में अपनी जड़ों के प्रति जागरूकता का एक सशक्त संदेश भी बनकर उभरा। जब भाषा जीवित रहती है,तब संस्कृति भी जीवंत रहती है।

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