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उत्तराखंड सरकार द्वारा गेहूं के मूल्य में मात्र 6.6% की वृद्धि करना, जबकि घरेलू सिलेंडर में 6.9% और व्यावसायिक सिलेंडर में 17.5% की वृद्धि मात्र एक महीने के दौरान करना, यह साफ दर्शाता है कि सरकार की प्राथमिकताएं असंतुलित हैं। दूसरी ओर, उत्तराखंड सरकार ने विधानसभा सत्र में पूर्व विधायकों की पेंशन में 33% की वृद्धि कर दी, जबकि किसानों की फसल की लागत बढ़ गई है और उनकी आय घट गई है। डॉ. गणेश उपाध्याय, प्रवक्ता उत्तराखंड कांग्रेस ने कहा कि सरकार को कम से कम ₹3200 प्रति क्विंटल गेहूं का समर्थन मूल्य देना चाहिए, ताकि किसानों को उनकी मेहनत का उचित मूल्य मिल सके और वे अपने परिवार का पालन-पोषण कर सकें। अभी हाल ही में बेमौसम की बरसात ने एवं तेज हवाओं की वजह से गेहूं की फसल को काफी नुकसान पहुंचा है । यह समय है कि सरकार किसानों की समस्याओं को समझे और उनके लिए ठोस कदम उठाए।

