देवभूमि श्रीनगर से आस्था का विराट उत्सव-श्रीक्षेत्र में गूंजे भक्ति के स्वर,भव्य कलश यात्रा में उमड़ा जनसैलाब

श्रीनगर गढ़वाल। उत्तराखंड की देवभूमि सांस्कृतिक नगरी श्रीनगर के पावन श्रीक्षेत्र से एक बार फिर आस्था,परंपरा और संस्कृति का अद्भुत संगम देखने को मिला,जब श्रीमद्भागवत कथा के शुभारंभ से पूर्व भव्य कलश यात्रा ने पूरे नगर को भक्तिमय वातावरण में रंग दिया। यह दिव्य आयोजन न केवल धार्मिक श्रद्धा का प्रतीक बना,बल्कि सामाजिक एकता और पारिवारिक संस्कारों की अनुपम मिसाल भी प्रस्तुत कर गया। आशीष सड़ाना द्वारा अपने स्वर्गीय पिता जयदीप सड़ाना,माता एवं छोटे भाई की आत्मा की शांति हेतु आयोजित इस पावन कथा के अवसर पर निकली कलश यात्रा ने नगर की गलियों को मानो तीर्थ में परिवर्तित कर दिया। शारदानाथ घाट से प्रारंभ हुई यह यात्रा वैदिक मंत्रोच्चार,शंखनाद और भक्ति गीतों के बीच आगे बढ़ी,जिसमें सैकड़ों की संख्या में मातृशक्ति पारंपरिक वेशभूषा में सिर पर कलश धारण किए सम्मिलित हुई। यात्रा जैसे-जैसे नगर के विभिन्न मार्गों से गुजरी वैसे-वैसे श्रद्धालुओं की भीड़ बढ़ती चली गई। हर ओर जय श्री हरि और हरि नाम संकीर्तन की गूंज ने वातावरण को पूरी तरह आध्यात्मिक बना दिया। बच्चों-युवाओं और बुजुर्गों की सहभागिता ने इस आयोजन को जन-आस्था का विराट रूप दे दिया। इस अवसर पर श्रीमद्भागवत कथा के व्यास डॉ.शशांक शेखर डिमरी,नागेश्वर महादेव के महंत नितिन पुरी,श्रीनगर गंगा आरती समिति के अध्यक्ष प्रेम बल्लभ नैथानी,विराट हिन्दू सम्राट लखपत सिंह भण्डारी,श्रीनगर व्यापार सभा के अध्यक्ष दिनेश असवाल,प्रसिद्ध समाजसेवी खिलेंद्र चौधरी,जीवन दमीर,डॉ.अरविंद दरमोडा,जितेंद्र रावत,आशा उपाध्याय,सुषमा बड़थ्वाल,अंजलि भण्डारी,मधुसूदन घिल्डियाल,विपिन मैठाणी,भगवती प्रसाद बडोनी,अमित सड़ाना,सुरेंद्र चौहान,बिट्टू रतूड़ी,राजीव बिश्नोई,हिमांशु अग्रवाल,प्रवीण अग्रवाल,संजय विश्नोई,सुरजीत अग्रवाल,गोपाल डूडेजा,देवेंद्र मणि मिश्रा,उज्जवल अग्रवाल,प्रताप भण्डारी,कुशलानाथ,वीरेंद्र सिंह नेगी,प्रवेश चमोली,धीरेंद्र भण्डारी,गुड्डू भट्ट,बंसी कालड़ा,अरविंद कंडारी,राजेंद्र प्रसाद बड़थ्वाल,रामानंद भट्ट,युधिष्ठिर भण्डारी,शुभम प्रभाकर सहित अनेक गणमान्य व्यक्तियों की गरिमामयी उपस्थिति रही। साथ ही नगर के प्रतिष्ठित समाजसेवी,व्यापारी वर्ग,संस्कृत विद्यालय के छात्र एवं सैकड़ों नगरवासी इस धार्मिक आयोजन के साक्षी बने। कलश यात्रा में उमड़ा जनसैलाब स्वर्गीय जयदीप सड़ाना के सामाजिक जीवन,उनकी लोकप्रियता और जनसेवा के प्रति समर्पण की सजीव झलक प्रस्तुत कर रहा था। यह आयोजन न केवल एक धार्मिक अनुष्ठान,बल्कि समाज को जोड़ने वाला एक आध्यात्मिक सेतु बनकर उभरा। पूरे आयोजन के दौरान भजन-कीर्तन,जयकारों और श्रद्धा के स्वर वातावरण में गूंजते रहे,जिससे श्रीनगर का प्रत्येक कोना भक्तिमय हो उठा। निश्चित ही देवभूमि श्रीनगर के श्रीक्षेत्र से निकली यह कलश यात्रा आस्था,संस्कृति और सामाजिक एकता की एक अमिट छाप छोड़ गई है।
